क्या 'शांति का मसीहा' बनने की आड़ में अपनी तिजोरी भर रहा पाकिस्तान? रिपोर्ट ने खोले कूटनीतिक खेल के राज
India News Live,Digital Desk : मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की कमान संभालने वाला पाकिस्तान क्या वाकई शांति चाहता है, या इसके पीछे कोई गहरी आर्थिक साजिश है? इजरायल के प्रमुख मीडिया संस्थान 'सी14' ने एक चौंकाने वाली रिपोर्ट जारी की है, जिसमें पाकिस्तान के 'शांति मिशन' के पीछे छिपे असली मकसद पर सवाल खड़े किए गए हैं।
शांति का मुखौटा, आर्थिक मजूबरी का सच
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान द्वारा लगातार शांति की अपील और मध्यस्थता के प्रयास केवल मानवीय चिंता नहीं हैं, बल्कि इसके पीछे पाकिस्तान की अपनी बदहाल अर्थव्यवस्था है। 100 बिलियन डॉलर से अधिक के विदेशी कर्ज के बोझ तले दबे पाकिस्तान के लिए मिडिल ईस्ट में जारी यह तनाव एक बड़ी मुसीबत बन चुका है। अपनी गिरती अर्थव्यवस्था को संभालने और वैश्विक दबाव से बचने के लिए पाकिस्तान हर हाल में अमेरिका और ईरान के बीच एक युद्धविराम समझौता चाहता है।
ईरान के साथ 'डील' की पटकथा?
सी14 की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पर्दे के पीछे एक विशेष समझौता तैयार किया जा रहा है। इसके तहत पाकिस्तान, अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता का रास्ता साफ करेगा, और बदले में ईरान पाकिस्तान को आर्थिक संकट से उबरने के लिए भारी मात्रा में फंड मुहैया कराएगा। यह 'गिव एंड टेक' की नीति इस्लामाबाद के लिए जीवनदान साबित हो सकती है। यही कारण है कि पाकिस्तानी नेतृत्व, जिसमें गृह मंत्री मोहसिन नकवी और सेना प्रमुख आसिम मुनीर की सक्रियता लगातार बढ़ती जा रही है।
कूटनीति के बीच बढ़ती खटास
पाकिस्तान की ये कोशिशें एक तरफ तो तेहरान में चर्चा में हैं, वहीं दूसरी ओर वाशिंगटन और तेल अवीव के बीच तनाव को बढ़ा रही हैं। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू इस बात से बेहद खफा हैं कि अमेरिका सैन्य हमले के बजाय कूटनीतिक समझौते की ओर झुक रहा है। नेतन्याहू का मानना है कि ईरान पर हमलों को रोकना उसकी सैन्य शक्ति को फिर से खड़ा करने का मौका देने जैसा है। रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप और नेतन्याहू के बीच हुई हालिया तीखी फोन कॉल इसी असहमति का नतीजा थी।
पाकिस्तान का 'शांति ड्राफ्ट' और इजरायल की चिंता
पाकिस्तान, कतर और अन्य क्षेत्रीय सहयोगियों ने मिलकर एक 'संशोधित शांति मसौदा' तैयार किया है, जिसे लेकर वे अमेरिका को मनाने में जुटे हैं। इस मसौदे का मकसद मिडिल ईस्ट में युद्ध की आग को ठंडा करना है, लेकिन इजरायल इसे अपने सुरक्षा हितों के लिए खतरा मान रहा है। पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी का एक सप्ताह के भीतर दूसरी बार तेहरान दौरा यह साफ करता है कि इस्लामाबाद इस डील को फाइनल करने के लिए कितनी जल्दबाजी में है।
क्या पाकिस्तान अपनी इस कूटनीति से मिडिल ईस्ट में शांति ला पाएगा, या उसकी यह 'आर्थिक डील' क्षेत्र में नए समीकरणों को जन्म देगी? पूरी दुनिया की नजरें अब इस्लामाबाद, तेहरान और वाशिंगटन के बीच चल रही इस गुप्त वार्ता पर टिकी हैं।