एनसीईआरटी ने न्यायपालिका में भ्रष्टाचार पर अध्याय के लिए माफी मांगी आज मुख्य न्यायाधीश की पीठ में सुनवाई होगी
India News Live, Digital Desk :स्कूल की पाठ्यपुस्तक में ‘न्यायपालिका में करप्शन’ शीर्षक वाले अध्याय को लेकर उठे विवाद के बीच एनसीईआरटी ने माफी मांग ली है। मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है और आज इस पर शीर्ष अदालत की बेंच सुनवाई करने वाली है।
यह विवाद उस समय सामने आया जब एनसीईआरटी की एक पुस्तक में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से संबंधित सामग्री को लेकर आपत्ति जताई गई। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इस तरह की सामग्री से न्यायपालिका की छवि पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
मामले की सुनवाई आज सुप्रीम कोर्ट में होगी। जानकारी के मुताबिक, मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली बेंच इस मुद्दे पर पक्षों की दलीलें सुनेगी।
याचिका में कहा गया है कि स्कूली छात्रों को पढ़ाए जाने वाले पाठ्यक्रम में संवैधानिक संस्थाओं के बारे में संतुलित और जिम्मेदार भाषा का इस्तेमाल होना चाहिए।
एनसीईआरटी ने क्या कहा?
एनसीईआरटी की ओर से दायर हलफनामे में कहा गया है कि यदि अध्याय की भाषा या प्रस्तुति से किसी प्रकार की गलतफहमी या आपत्ति उत्पन्न हुई है तो संस्था को इसका खेद है।
संस्था ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुंचाना नहीं था, बल्कि छात्रों को लोकतांत्रिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली और जवाबदेही के सिद्धांतों से परिचित कराना था।
विवाद की पृष्ठभूमि
पाठ्यपुस्तक में शामिल अध्याय में न्यायपालिका की भूमिका, उसकी स्वतंत्रता और जवाबदेही के संदर्भ में कुछ उदाहरणों का उल्लेख किया गया था। इन्हीं संदर्भों को लेकर आपत्ति उठाई गई।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि शैक्षणिक सामग्री में संवेदनशील विषयों को संतुलित तरीके से प्रस्तुत करना जरूरी है, ताकि संस्थाओं की आलोचना और उनकी संवैधानिक मर्यादा के बीच संतुलन बना रहे।
संभावित असर
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद यह तय हो सकता है कि:
संबंधित अध्याय में संशोधन किया जाएगा या नहीं
भविष्य में शैक्षणिक सामग्री तैयार करने के लिए कोई दिशा-निर्देश तय होंगे
या फिर याचिका को खारिज किया जाएगा
यह मामला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शैक्षणिक स्वायत्तता और संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा जैसे महत्वपूर्ण सवालों से जुड़ा हुआ है।
निष्कर्ष
एनसीईआरटी द्वारा माफी मांगने के बाद भी मामला संवेदनशील बना हुआ है। अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर है, जहां यह तय होगा कि विवादित अध्याय का भविष्य क्या होगा और शैक्षणिक पाठ्यक्रम में संस्थागत आलोचना की सीमा क्या होनी चाहिए।