नाना पाटेकर ने शेखर सुमन से जाहिर की थी खास ख्वाहिश, निधन के साथ हमेशा के लिए अधूरी रह गई ये हसरत
दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन के बाद सिनेमा जगत की हस्तियां उनसे जुड़ी अपनी सबसे यादगार यादों को साझा कर रही हैं। इसी कड़ी में वरिष्ठ अभिनेता शेखर सुमन ने सोशल मीडिया पर एक बेहद भावुक पोस्ट लिखकर नाना पाटेकर के साथ हुई अपनी अंतिम मुलाकातों का जिक्र किया। शेखर सुमन ने बताया कि नाना पाटेकर ने कुछ समय पहले उनके साथ मिलकर एक खास रचनात्मक प्रोजेक्ट करने की प्रबल इच्छा जाहिर की थी, जो उनके यूं अचानक चले जाने से अब ताउम्र के लिए अधूरी हसरत बनकर रह गई है।
शेखर सुमन और नाना पाटेकर का संबंध सिर्फ बॉलीवुड फिल्मों तक सीमित नहीं था, बल्कि दोनों के बीच रंगमंच (थिएटर) और संजीदा अभिनय को लेकर गहरा वैचारिक लगाव था। दोनों जब भी मिलते थे, सिनेमा की मौजूदा स्थिति, पटकथा लेखन और सामाजिक सरोकारों पर लंबी बातचीत हुआ करती थी। नाना पाटेकर की स्पष्टवादिता और अभिनय के प्रति दीवानगी को याद करते हुए शेखर सुमन ने लिखा कि उनके जाने से उन्होंने न केवल एक महान सहकर्मी खोया है, बल्कि एक ऐसा साथी खो दिया है जिससे कला के गूढ़ पहलुओं पर बेबाकी से बात की जा सकती थी।
क्या थी वह दिली ख्वाहिश जो रंगमंच के मंच तक नहीं पहुंच सकी
शेखर सुमन ने खुलासा किया कि नाना पाटेकर रंगमंच पर एक बार फिर पूरे दमखम के साथ वापसी करने को लेकर बेहद उत्साहित थे। उन्होंने शेखर सुमन से बातचीत के दौरान कहा था कि वे दोनों मिलकर एक ऐसा दो-पात्रीय (Two-character) नाटक या प्रयोगात्मक सिनेमाई प्रोजेक्ट तैयार करें, जो सीधे आम जनता के दिल को छू जाए और जिसमें केवल शुद्ध अभिनय का दम हो। नाना का मानना था कि आज के तकनीकी दौर में जहां वीएफएक्स और शोर-शराबा हावी है, वहां दो मंझे हुए कलाकारों को मंच पर आमने-सामने बिठाकर अभिनय का असली जादू पेश करना चाहिए।
नाना पाटेकर ने इस विचार की रूपरेखा पर भी चर्चा शुरू कर दी थी और वे चाहते थे कि जैसे ही उनके मौजूदा सामाजिक और सिनेमाई कमिटमेंट्स थोड़े हल्के हों, वे इस पर काम शुरू करेंगे। शेखर सुमन ने दर्द बयां करते हुए लिखा कि वे अक्सर कहते थे, "शेखर, हमें साथ में कुछ ऐसा करना है जिसे लोग सालों तक याद रखें, सिर्फ हमारे अभिनय के लिए।" लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था और वह प्रोजेक्ट कागजों और बातों से आगे बढ़कर मंच तक नहीं पहुंच सका।
बेबाक मिजाज और संवेदनशील दिल के मालिक थे नाना, शेखर सुमन ने किया नमन
शेखर सुमन ने अपने संदेश में नाना पाटेकर के व्यक्तित्व के उस पहलू को भी याद किया जो बाहर से बेहद सख्त और भीतर से बेहद कोमल था। उन्होंने कहा कि लोग अक्सर नाना के गुस्से या तीखे तेवरों की बात करते थे, लेकिन असल में वह गुस्सा व्यवस्था की खामियों और समाज के पाखंड के खिलाफ होता था। दिल से वे एक बच्चे की तरह मासूम और किसी का भी दर्द देखकर रो पड़ने वाले इंसान थे।
किसानों के हक के लिए उनकी लड़ाई और आम लोगों की मदद के जज्बे को सलाम करते हुए शेखर सुमन ने लिखा कि नाना पाटेकर जैसे कलाकार सदियों में एक बार जन्म लेते हैं। उनके साथ मंच साझा करने की वह अधूरी इच्छा अब उनके सीने में हमेशा एक टीस बनकर रहेगी। शेखर सुमन की इस पोस्ट ने प्रशंसकों को भी भावुक कर दिया है, जो नाना पाटेकर के इस अधूरे सपने को उनके कला के प्रति अटूट प्रेम का प्रमाण मान रहे हैं।