Mohini Ekadashi 2026: 27 अप्रैल को है मोहिनी एकादशी, तुलसी मंजरी के इन उपायों से बरसेगी मां लक्ष्मी की कृपा
India News Live,Digital Desk : वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी, जिसे मोहिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है, इस साल 27 अप्रैल 2026, सोमवार को मनाई जाएगी। यह दिन भगवान विष्णु के उस 'मोहिनी' अवतार को समर्पित है, जिसने समुद्र मंथन के समय असुरों को अपनी माया में उलझाकर देवताओं को अमृत पान कराया था। ज्योतिष शास्त्र और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन तुलसी जी से जुड़े विशेष उपाय करने से वर्षों पुरानी आर्थिक तंगी दूर होती है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।
मोहिनी एकादशी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि का आरंभ और समापन इस प्रकार है:
एकादशी तिथि शुरू: 26 अप्रैल 2026, शाम 06:06 बजे।
एकादशी तिथि समाप्त: 27 अप्रैल 2026, शाम 06:15 बजे।
उदया तिथि के अनुसार व्रत: 27 अप्रैल 2026 (सोमवार)।
व्रत पारण का समय: 28 अप्रैल 2026 की सुबह।
तुलसी मंजरी के 3 अचूक उपाय, जो बदल देंगे किस्मत
तुलसी जी को माता लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है। मोहिनी एकादशी पर तुलसी की मंजरी (तुलसी के बीज) का प्रयोग करना अत्यंत शुभ फलदायी होता है:
1. धन वृद्धि के लिए 'तिजोरी' का उपाय:
एकादशी की सुबह स्नान के बाद तुलसी की सूखी मंजरी लें। इसे एक लाल रेशमी कपड़े में बांधें और माता लक्ष्मी का ध्यान करते हुए अपनी तिजोरी या धन स्थान पर रख दें। माना जाता है कि इससे घर में धन की आवक बढ़ती है और अटका हुआ पैसा वापस मिलने के योग बनते हैं।
2. कर्ज मुक्ति के लिए विशेष अभिषेक:
यदि आप लंबे समय से कर्ज के बोझ तले दबे हैं, तो एकादशी की शाम को गाय के कच्चे दूध में तुलसी की मंजरी डालकर भगवान विष्णु का अभिषेक करें। यह उपाय कुंडली में बृहस्पति ग्रह को मजबूत करता है, जिससे आय के नए स्रोत बनते हैं और व्यक्ति कर्ज मुक्त होता है।
3. घर से नकारात्मकता दूर करने के लिए:
एक तांबे के लोटे में गंगाजल भरकर उसमें तुलसी की मंजरी डालें। कुछ देर बाद इस जल को पूरे घर के कोनों में छिड़कें। यह घर की नकारात्मक ऊर्जा (Negative Energy) और दरिद्रता को दूर कर शांति का माहौल पैदा करता है।
एकादशी पर भूलकर भी न करें ये 4 गलतियां
मोहिनी एकादशी के दिन कुछ कार्यों की सख्त मनाही है, अन्यथा पुण्य की जगह दोष लग सकता है:
तुलसी को स्पर्श न करें: एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते न तोड़ें और न ही पौधे में जल चढ़ाएं (मान्यता है कि इस दिन तुलसी माता भगवान विष्णु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं)।
चावल का त्याग: एकादशी पर चावल का सेवन वर्जित है।
तामसिक भोजन: इस दिन मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन से पूरी तरह परहेज करें।
व्यवहार में शुद्धता: झूठ बोलने, गुस्सा करने और किसी की बुराई करने से बचें।
मोहिनी एकादशी का आध्यात्मिक महत्व
धार्मिक दृष्टिकोण से यह एकादशी केवल धन प्राप्ति के लिए नहीं, बल्कि मानसिक शांति और मोह-माया के बंधनों को काटने के लिए भी जानी जाती है। इस दिन भगवान विष्णु के 'मोहिनी' स्वरूप की पूजा करने से व्यक्ति के भीतर की बुराइयां नष्ट होती हैं और उसे आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।