विपक्षी एकजुटता के बीच मोदी सरकार का बड़ा मास्टरप्लान, 'एक देश एक चुनाव' और परिसीमन बिल पर नई तैयारी

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India News Live,Digital Desk : उत्तर प्रदेश से लेकर देश की राजधानी दिल्ली तक इस समय देश के सबसे बड़े संवैधानिक और राजनीतिक सुधारों को लेकर पर्दे के पीछे एक बड़ी बिसात बिछाई जा रही है। अप्रैल 2026 में संसद के भीतर संविधान संशोधन विधेयक (Constitution Amendment Bill) के गिर जाने के बाद, अब केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार 'एक देश एक चुनाव' (One Nation One Election - ONOE) और 'परिसीमन बिल' (Delimitation Bill) को नए सिरे से और बेहद आक्रामक रणनीति के साथ संसद में दोबारा पेश करने की तैयारी में जुट गई है।

'इंडियन एक्सप्रेस' की एक विशेष रिपोर्ट के मुताबिक, यह तेजी ऐसे समय में आई है जब हाल ही में हुए राज्यों के चुनावों में पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) और तमिलनाडु में एम.के. स्टालिन की द्रविड़ मुन्नेत्र कझगम (DMK) जैसे मजबूत क्षेत्रीय दलों को करारी चुनावी हार का सामना करना पड़ा है। इस राजनीतिक फेरबदल का फायदा उठाकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) अब विपक्षी खेमे में सेंध लगाने और आम सहमति बनाने के बड़े मिशन पर काम कर रही है।

केंद्रीय गृह मंत्रालय तैयार कर रहा है नया 'परिसीमन बिल'

सूत्रों के हवाले से बड़ी खबर है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) एक नया और बेहद संतुलित परिसीमन विधेयक तैयार कर रहा है, जिसे 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले हर हाल में संसद से पास कराने का लक्ष्य रखा गया है।

पहले क्यों फेल हो गया था यह बिल?

जब पूर्व में संसद के भीतर लोकसभा सीटों की सीमाएं दोबारा तय करने (सीटें बढ़ाने) वाला परिसीमन विधेयक लाया गया था, तो कांग्रेस, डीएमके और टीएमसी समेत समूचे 'INDIA' गठबंधन के 230 सांसदों ने एकजुट होकर इसका तीखा विरोध किया था और सरकार के पास नंबर न होने के कारण यह गिर गया था। विपक्ष के दो मुख्य ऐतराज थे:

महिला आरक्षण से जुड़ाव: सरकार ने महिला आरक्षण कानून के कार्यान्वयन को लोकसभा सीटें बढ़ाए जाने के पेचीदा मुद्दे से जोड़ दिया था।

उत्तर बनाम दक्षिण भारत का विवाद: विपक्ष (विशेषकर दक्षिण भारतीय राज्यों) को यह बड़ा डर है कि यदि 'आबादी' (Population) को मुख्य आधार मानकर लोकसभा सीटें बढ़ाई गईं, तो उत्तर भारत के राज्यों (जैसे यूपी, बिहार, मध्य प्रदेश) की सीटें बहुत ज्यादा बढ़ जाएंगी, जबकि जनसंख्या नियंत्रण में बेहतरीन काम करने वाले दक्षिण भारत के राज्यों की संसद में हिस्सेदारी और आवाज दोनों बेहद कमजोर पड़ जाएंगी।

बदले राजनीतिक समीकरण: भाजपा की नजरें DMK और TMC के रुख पर

हालिया चुनावी नतीजों के बाद विपक्षी खेमे के भीतर आए आंतरिक बदलावों ने सरकार को एक नया अवसर दे दिया है:

1. DMK (तमिलनाडु): शर्तों के साथ बातचीत के लिए तैयार

तमिलनाडु में करारी शिकस्त और कांग्रेस के साथ अंदरूनी तनातनी के बाद सत्ताधारी द्रमुक (DMK) के सुर अब कुछ बदलते दिख रहे हैं। 'इंडियन एक्सप्रेस' से बातचीत में DMK के एक शीर्ष नेता ने बेहद महत्वपूर्ण संकेत देते हुए कहा:

"परिसीमन और एक देश एक चुनाव जैसे राष्ट्रीय मुद्दों पर हमारी पार्टी का अंतिम फैसला किसी राजनीतिक विचारधारा की जिद पर नहीं, बल्कि हमेशा तमिलनाडु के हक और फायदे को देखकर तय होता है। अगर केंद्र सरकार हमें यह लिखित व पक्का भरोसा दे कि जनसंख्या रोकने में अच्छा काम करने वाले दक्षिण के राज्यों को सीटें कम करके सजा नहीं दी जाएगी और सबकी सहमति से एक ऐसा फॉर्मूला (जैसे वेटेज सिस्टम) बनाया जाए जिससे हमारी मौजूदा सीटों का अनुपात संसद में सुरक्षित रहे, तो हमें इस प्रस्ताव का समर्थन करने में कोई गुरेज नहीं है।"

पार्टी के एक पूर्व मंत्री ने दिवंगत नेता अटल बिहारी वाजपेयी के दौर का उदाहरण देते हुए कहा कि राजनीति में कुछ भी स्थायी नहीं होता। अगर राज्य के अधिकार और संघीय ढांचा सुरक्षित रहता है, तो देश हित के मुद्दों पर सरकार को बाहर से भी समर्थन दिया जा सकता है।

2. TMC (पश्चिम बंगाल): बगावत और टूट की अटकलें

पश्चिम बंगाल चुनाव में पराजय के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर गंभीर आंतरिक कलह मची हुई है। पार्षद स्तर के नेता लगातार इस्तीफे सौंप रहे हैं और स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स ('संघवाद प्रतिदिन') का दावा है कि टीएमसी के कुछ मौजूदा सांसद पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी के तानाशाही रवैए से नाराज होकर पाला बदलने और भाजपा में शामिल होने की गुप्त योजना बना रहे हैं। यदि ऐसा होता है, तो संसद में सरकार का पलड़ा बेहद मजबूत हो जाएगा।

ONOE पर संसदीय समिति (JPC) का बड़ा एक्शन: 2027 से शुरुआत?

दूसरी तरफ, 'एक देश एक चुनाव' विधेयक की समीक्षा कर रही संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के अध्यक्ष और वरिष्ठ भाजपा नेता पीपी चौधरी ने बड़ा अपडेट देते हुए बताया कि समिति की रिपोर्ट बनाने का काम बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है और इसे नियत समय पर सरकार को सौंप दिया जाएगा।

ONOE कार्यान्वयन रणनीतिमुख्य बातें
चरणबद्ध तरीका (Phased Rollout)देश के सभी राज्यों में एक साथ चुनाव कराने के बजाय इसे चरणों में लागू किया जा सकता है।
2027 के विधानसभा चुनावयोजना के मुताबिक, साल 2027 में जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं (जैसे उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा, मणिपुर, हिमाचल प्रदेश और गुजरात), वहां के चुनावों को ONOE के पहले चरण के रूप में शामिल किया जा सकता है।
संवैधानिक संशोधनइसके लिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम और संविधान के कुछ अनुच्छेदों में आवश्यक तकनीकी और विधायी संशोधन किए जाएंगे।

कांग्रेस का रुख: 'प्रक्रिया का पालन करे सरकार'

इन सब कवायदों के बीच मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार को आगाह किया है कि वह जबरन कोई भी कानून थोपने का प्रयास न करे। कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने साफ कर दिया है कि इतने बड़े और दूरगामी फैसले लेने से पहले सरकार को स्थापित संसदीय प्रक्रियाओं का पूरी तरह पालन करना होगा और देश की सभी छोटी-बड़ी राजनीतिक पार्टियों को भरोसे में लेकर ही आगे बढ़ना होगा।