म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग पहुंचे भारत, पीएम मोदी से हैदराबाद हाउस में मुलाकात; क्यों उड़े चीन के तोश

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India News Live,Digital Desk : भारत के रणनीतिक और भौगोलिक पड़ोसी देश म्यांमार (Myanmar) से एक बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक कूटनीतिक खबर सामने आ रही है। म्यांमार के नवनियुक्त राष्ट्रपति और सैन्य जुंटा प्रमुख जनरल मिन आंग ह्लाइंग (Min Aung Hlaing) सोमवार को अपनी पहली आधिकारिक विदेश यात्रा पर भारत की राजधानी नई दिल्ली पहुंचे हैं।

दिल्ली के ऐतिहासिक हैदराबाद हाउस (Hyderabad House) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और म्यांमार के राष्ट्रपति के बीच एक उच्च स्तरीय द्विपक्षीय (Bilateral) बैठक हुई। साल 2021 में म्यांमार की सत्ता पर काबिज होने के बाद, किसी भी बड़े वैश्विक लोकतांत्रिक देश के शीर्ष नेता के साथ जनरल मिन आंग ह्लाइंग की यह पहली सीधी और व्यक्तिगत मुलाकात है, जिसे म्यांमार सरकार के लिए एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय संजीवनी माना जा रहा है। इस मुलाकात के बाद बीजिंग (चीन) के राजनीतिक गलियारों में भारी मिर्ची लगना तय माना जा रहा है।

क्यों भारत का रुख कर रहा है म्यांमार? चीन को लगेगा बड़ा झटका

अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञों के मुताबिक, म्यांमार के राष्ट्रपति द्वारा अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए भारत को चुनना सीधे तौर पर चीन को एक कड़ा और कूटनीतिक संदेश है:

चीन का दोहरा खेल: चीन एक तरफ म्यांमार की सैन्य सरकार पर अपने 'चीन-म्यांमार आर्थिक कॉरिडोर' (CMEC) को तेजी से पूरा करने का भारी दबाव बना रहा है, तो दूसरी तरफ म्यांमार के आंतरिक गृहयुद्ध में वहां के विद्रोही गुटों को गुप्त रूप से हथियार और फंडिंग देकर हवा भी दे रहा है।

बैलेंसिंग एक्ट (संतुलन की नीति): म्यांमार में भारत के पूर्व राजदूत गौतम मुखोपाध्याय के अनुसार, "यह भारत और चीन से निपटने का म्यांमार का पुराना और आजमाया हुआ तरीका रहा है।" म्यांमार अब चीन के इस चक्रव्यूह और अत्यधिक निर्भरता से बाहर निकलने के लिए भारत के साथ मिलकर एक संतुलित कूटनीतिक कवच तैयार कर रहा है।

इन 3 सबसे संवेदनशील और रणनीतिक मुद्दों पर हुई महामंथन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति मिन आंग ह्लाइंग के बीच हुई इस बैठक में भारत-म्यांमार साझेदारी के साथ-साथ क्षेत्र की स्थिरता को लेकर निम्नलिखित अहम मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई:

1. 1600 किमी लंबा बॉर्डर और सुरक्षा (Border Security)

भारत और म्यांमार आपस में 1,640 किलोमीटर से अधिक लंबी और अत्यंत दुर्गम सीमा साझा करते हैं। म्यांमार में पिछले 5 वर्षों से जारी गृहयुद्ध के कारण भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों (विशेषकर मिजोरम और मणिपुर) में म्यांमार के आम नागरिकों के साथ-साथ वहां के पराजित सैनिकों की भी भारी घुसपैठ हो रही है। बैठक में भारत द्वारा फ्री मूवमेंट रीजीम (FMR - सीमा पर बिना वीजा आवाजाही की पुरानी व्यवस्था) को पूरी तरह खत्म करने और सीमा पर मजबूत फेंसिंग (बाड़ लगाने) के काम को लेकर म्यांमार सरकार से सहयोग मांगा गया है।

2. कलादान मल्टी-मोडल प्रोजेक्ट (Kaladan Connectivity Project)

भारत का बेहद महत्वाकांक्षी कलादान प्रोजेक्ट इस समय म्यांमार के विद्रोही गुटों (जैसे अराकान आर्मी) के हमलों के कारण अधर में लटका हुआ है। यह प्रोजेक्ट भारत के कोलकाता बंदरगाह को म्यांमार के रास्ते सीधे भारत के मिजोरम राज्य से जोड़ता है, जो उत्तर-पूर्व के विकास के लिए गेम-चेंजर है। पीएम मोदी ने म्यांमार के राष्ट्रपति से इस मार्ग और सित्तवे बंदरगाह (Sittwe Port) को पूरी तरह सुरक्षित करने और इसका काम जल्द से जल्द पूरा करने का विशेष अनुरोध किया।

3. अंतरराष्ट्रीय सम्मान की चाह

2021 के सैन्य तख्तापलट के बाद से ही पश्चिमी देशों ने म्यांमार पर कड़े प्रतिबंध लगा रखे हैं। ऐसे में म्यांमार की जुंटा सरकार भारत जैसे दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का हाथ थामकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर खुद को दोबारा स्थापित करने और अपनी संप्रभुता को मान्यता दिलाने की कोशिश में जुटी है।