मिशन यूरोप: अगले महीने 3 देशों के 'पावर पैक' दौरे पर रहेंगे PM मोदी, 100 अरब डॉलर के निवेश और 10 लाख नौकरियों पर टिकी नजरें
India News Live,Digital Desk : वैश्विक कूटनीति के पटल पर भारत की धमक एक बार फिर सुनाई देने वाली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले महीने यानी मई के मध्य में यूरोप के एक सप्ताह के अति-महत्वपूर्ण दौरे पर रवाना होंगे। इस 'ताबड़तोड़' विदेश यात्रा के दौरान पीएम मोदी नॉर्वे, नीदरलैंड और इटली का दौरा करेंगे। इस यात्रा का मुख्य एजेंडा व्यापारिक संबंधों को नई ऊंचाई देना, सुरक्षा साझेदारी को मजबूत करना और भारत के युवाओं के लिए लाखों नौकरियों के अवसर पैदा करना है।
नॉर्वे (ओस्लो): 100 अरब डॉलर के निवेश का रोडमैप
पीएम मोदी के दौरे का सबसे अहम पड़ाव नॉर्वे की राजधानी ओस्लो होगा। यहाँ वे तीसरे 'भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन' में हिस्सा लेंगे, जिसमें नॉर्डिक क्षेत्र के 5 देशों (नॉर्वे, स्वीडन, डेनमार्क, फिनलैंड और आइसलैंड) के राष्ट्राध्यक्ष शामिल होंगे।
EFTA का फायदा: नॉर्वे 'यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ' (EFTA) का सदस्य है। हालिया समझौतों के तहत EFTA देश भारत में अगले 15 वर्षों में 100 अरब डॉलर का भारी-भरकम निवेश करेंगे।
रोजगार के अवसर: इस निवेश से भारत में करीब 10 लाख नई नौकरियां सृजित होने का अनुमान है।
फोकस एरिया: दोनों देशों के बीच ग्रीन एनर्जी, ब्लू इकॉनमी और आर्कटिक क्षेत्र में सहयोग पर चर्चा होगी।
नीदरलैंड (द हेग): तकनीक और खेती की नई जुगलबंदी
ओस्लो के बाद पीएम मोदी नीदरलैंड पहुंचेंगे। जल प्रबंधन (Water Management) और आधुनिक कृषि तकनीक में नीदरलैंड दुनिया का अग्रणी देश है।
प्रमुख लक्ष्य: भारत और नीदरलैंड के बीच कृषि, तकनीक और आतंकवाद विरोधी मोर्चे पर सहयोग को और अधिक गहरा करना।
महत्व: 2017 के बाद पीएम की यह पहली अधिकारिक नीदरलैंड यात्रा है, जो द्विपक्षीय व्यापार के नए द्वार खोलेगी।
इटली और वेटिकन सिटी: मेलोनी से मुलाकात और 'पोप' का आशीर्वाद!
प्रधानमंत्री का इटली दौरा कई मायनों में ऐतिहासिक होने वाला है। यह पीएम मोदी की इटली की पहली आधिकारिक द्विपक्षीय यात्रा होगी।
मेलोनी के साथ रणनीतिक चर्चा: इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी के साथ रक्षा, ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र में निवेश पर गहन मंथन होगा।
वेटिकन सिटी का रुख: कयास लगाए जा रहे हैं कि पीएम मोदी वेटिकन सिटी जाकर ईसाई धर्मगुरु पोप से भी मुलाकात कर सकते हैं, जो कूटनीतिक और सांस्कृतिक रूप से बड़ा संदेश होगा।
भारत को क्या मिलेगा? (Key Takeaways)
FTA पर अमल: जनवरी 2026 में भारत-ईयू शिखर सम्मेलन में घोषित हुए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को जमीन पर उतारने की प्रक्रिया तेज होगी।
सप्लाई चेन: चीन पर निर्भरता कम करने के लिए सप्लाई चेन को विविधतापूर्ण बनाने में यूरोपीय देशों का साथ मिलेगा।
क्लीन टेक: स्वच्छ तकनीक और जलवायु परिवर्तन के लक्ष्यों को पाने के लिए यूरोप से नई तकनीक का हस्तांतरण।
जून में फ्रांस का दौरा
यूरोप की इस सक्रिय कूटनीति का सिलसिला यहीं नहीं थमेगा। मई के इस दौरे के ठीक बाद, जून में प्रधानमंत्री मोदी G7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए फ्रांस जाएंगे। यह लगातार सातवीं बार होगा जब भारत को दुनिया के सबसे प्रभावशाली आर्थिक समूह (G7) की बैठक में विशिष्ट अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है।