राजनाथ सिंह का जर्मनी में 'ट्रंप' कार्ड: मजाकिया अंदाज में कही ऐसी बात कि हंस पड़े लोग, रक्षा सौदों पर भी हुई बड़ी चर्चा
India News Live,Digital Desk : तीन दिवसीय जर्मनी दौरे पर पहुंचे भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इन दिनों अपने कूटनीतिक कौशल के साथ-साथ अपने हाजिरजवाब अंदाज के लिए भी सुर्खियों में हैं। म्यूनिख में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का जिक्र किया, तो पूरा हॉल ठहाकों से गूंज उठा। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच रक्षा मंत्री की यह यात्रा भारत और जर्मनी के सामरिक रिश्तों के लिए मील का पत्थर मानी जा रही है।
"ट्रंप साहब के आने के बाद दो बार गया..."
संबोधन के दौरान राजनाथ सिंह ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि वह अमेरिका तो 7-8 बार जा चुके हैं, लेकिन जर्मनी पहली बार आए हैं। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, "ट्रंप साहब जब से दोबारा राष्ट्रपति बने हैं, तब से मैं दो बार अमेरिका गया हूं।" इतना कहते ही वह खुद भी हंस पड़े और वहां मौजूद प्रवासी भारतीय भी ठहाके लगाने लगे। जब लोग काफी देर तक हंसते रहे, तो राजनाथ सिंह ने चुटकी लेते हुए कहा, "अब आप लोगों के हंसने का क्या कारण है, मैं समझ नहीं पाया। मैं तो आप लोगों को देखकर ही मुस्कुरा रहा हूं।"
जर्मनी की अर्थव्यवस्था में भारतीयों का लोहा
रक्षा मंत्री ने जर्मनी की साख और उसकी मजबूत अर्थव्यवस्था की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि जर्मनी आज दुनिया की टॉप 3 इकोनॉमी में शामिल है और इसकी इस कामयाबी में भारतीय समुदाय के योगदान को कोई नकार नहीं सकता। उन्होंने प्रवासियों से कहा कि वे भारत के 'सांस्कृतिक राजदूत' हैं और जर्मनी में उनकी विश्वसनीयता ही भारत का मान बढ़ाती है।
'आत्मनिर्भर भारत' के लिए जर्मनी को न्योता
बर्लिन पहुंचे राजनाथ सिंह ने जर्मनी के सांसदों और रक्षा क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों से मुलाकात की। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत अब केवल हथियार खरीदने वाला देश नहीं रहना चाहता।
को-डेवलपमेंट पर जोर: उन्होंने जर्मन कंपनियों को भारत में 'मेक इन इंडिया' के तहत मिलकर हथियार और तकनीक विकसित करने का न्योता दिया।
मिटेलस्टैंड (Mittelstand) की तारीफ: राजनाथ सिंह ने जर्मनी की मध्यम दर्जे की कंपनियों (SMEs) की फुर्ती और तकनीक की तारीफ की और कहा कि भारतीय स्टार्टअप्स के साथ मिलकर वे रक्षा उत्पादन में क्रांति ला सकते हैं।
बदलता सुरक्षा माहौल: उन्होंने कहा कि आज की दुनिया नए और पेचीदा सुरक्षा खतरों का सामना कर रही है, जिसके लिए भारत और जर्मनी का साथ आना जरूरी है।
होर्मुज जलडमरूमध्य और वैश्विक तनाव
यात्रा के दौरान रक्षा मंत्री ने पश्चिम एशिया और होर्मुज की स्थिति पर भी चर्चा की। उन्होंने भारत के संतुलित रुख को दोहराते हुए कहा कि भारत के संबंध अमेरिका और ईरान दोनों से अच्छे हैं, और भारत इस संकट में सूझबूझ भरी भूमिका निभा रहा है।