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August 02 2026 04:31 pm

'हारे हुए लोग शर्तें तय नहीं करते': ईरान ने उड़ाया ट्रंप का मजाक, सीजफायर को बताया 'नया युद्ध'

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India News Live,Digital Desk : मिडिल ईस्ट में मचे घमासान के बीच जुबानी जंग अब बेहद तीखी हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पाकिस्तान के अनुरोध पर युद्धविराम (Ceasefire) बढ़ाने के फैसले को ईरान ने सिरे से खारिज करते हुए अमेरिका की 'कमजोरी' करार दिया है। ईरानी नेतृत्व ने न केवल ट्रंप के प्रस्ताव का मजाक उड़ाया, बल्कि दो-टूक शब्दों में कहा कि जो जंग हार रहे हैं, वे शर्तें थोपने की स्थिति में नहीं हैं।

ट्रंप का 'शांति कार्ड' ईरान की नजर में केवल एक चाल

राष्ट्रपति ट्रंप ने 'ट्रुथ सोशल' पर घोषणा की थी कि वे ईरानी नेतृत्व को एक साझा प्रस्ताव तैयार करने का समय दे रहे हैं। लेकिन ईरान ने इसे शांति की पहल मानने से इनकार कर दिया है। ईरानी संसद के अध्यक्ष के सलाहकार मेहदी मोहम्मदी ने सोशल मीडिया पर तीखा हमला बोलते हुए कहा, "ट्रंप के युद्धविराम विस्तार का कोई मतलब नहीं है। जब आप हमारे बंदरगाहों की घेराबंदी कर रहे हैं, तो यह बमबारी करने से अलग कैसे है?" उन्होंने चेतावनी दी कि यह केवल अचानक हमले (Surprise Attack) के लिए समय जुटाने की एक अमेरिकी चाल है।

आर्थिक घेराबंदी ने सुलगाई बदले की आग

भले ही ट्रंप ने बमबारी फिलहाल टाल दी हो, लेकिन ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसेना की सख्त नाकाबंदी जारी है। अमेरिका का मानना है कि इस घेराबंदी से ईरान की अर्थव्यवस्था चरमरा जाएगी और उनका नेतृत्व घुटने टेक देगा। दूसरी ओर, ईरान इसे 'आर्थिक युद्ध' मान रहा है। तेहरान के सैन्य हलकों में मांग उठ रही है कि इस नाकाबंदी का जवाब अब केवल 'सैन्य कार्रवाई' से ही दिया जाना चाहिए।

मतभेदों की थ्योरी पर ईरान का पलटवार

व्हाइट हाउस और अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का दावा है कि ईरानी सरकार के भीतर भारी आपसी मतभेद हैं, जिसके कारण वे किसी एक शांति प्रस्ताव पर सहमत नहीं हो पा रहे हैं। ट्रंप ने इसी 'खंडित नेतृत्व' का हवाला देकर सीजफायर बढ़ाया था। हालांकि, मोहम्मदी के बयानों ने साफ कर दिया है कि ईरान खुद पहल करने और अपनी शर्तों पर जवाब देने की तैयारी में है। मोहम्मदी ने कड़े लहजे में कहा, "युद्ध के मैदान में पिछड़ने वाला देश अपनी शर्तें नहीं थोप सकता।"

क्या फिर गूंजेंगी तोपें?

ईरान के रुख से साफ है कि पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ और जनरल आसिम मुनीर की मध्यस्थता फिलहाल रंग लाती नहीं दिख रही है। ईरान के भीतर सैन्य जवाबी कार्रवाई का दबाव बढ़ रहा है। अगर तेहरान ने इस घेराबंदी के खिलाफ कोई बड़ा कदम उठाया, तो ट्रंप की 'बमबारी' की चेतावनी हकीकत में बदल सकती है, जिससे पूरी दुनिया एक भीषण ऊर्जा संकट और युद्ध की आग में झुलस सकती है।