June 20 2026 09:58 am

AI की रेस में 'दिमाग' की जंग: मेटा ने Apple के टॉप रिसर्चर को 1600 करोड़ में जोड़ा टीम से

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India News Live,Digital Desk : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की दुनिया में जंग सिर्फ़ तकनीक की नहीं, बल्कि टैलेंट की भी है। मेटा (पूर्व में फेसबुक के सीईओ मार्क ज़करबर्ग) इस दौड़ में बढ़त बनाने की तैयारी में हैं। खबर है कि मेटा ने ऐपल के अनुभवी एआई रिसर्चर रूमिंग पेंग को 20 करोड़ डॉलर यानी लगभग 1600 करोड़ रुपये के भारी-भरकम पैकेज पर नियुक्त किया है।

यह फैसला मेटा द्वारा हाल ही में ओपनएआई के त्रिपित बंसल को अपनी टीम में शामिल होने के लिए लगभग 800 करोड़ रुपये की पेशकश के बाद आया है। अब मेटा टैलेंट हंट मिशन पर है, जहाँ ऐप्पल, ओपनएआई, गूगल डीपमाइंड और एंथ्रोपिक जैसी कंपनियों के शीर्ष एआई विशेषज्ञों को 800 से 1600 करोड़ रुपये तक के पैकेज ऑफर किए जा रहे हैं।

मेटा इतना पैसा क्यों बर्बाद कर रहा है? 
मेटा का लक्ष्य एक ऐसी सुपरइंटेलिजेंस लैब बनाना है जो आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस (AGI) से भी आगे जाए। AGI एक ऐसी AI है जो इंसानों की तरह सोच सकती है, लेकिन मेटा उससे भी आगे जाकर सुपरइंटेलिजेंट AI बनाना चाहता है। एक ऐसी प्रणाली जो हर क्षेत्र में इंसानों से ज़्यादा स्मार्ट हो।

इसीलिए मेटा अब दुनिया के सबसे सक्षम एआई दिमागों को एक छत के नीचे लाने के लिए काम कर रहा है। यह लैब ओपनएआई और गूगल डीपमाइंड जैसी कंपनियों से सीधा मुकाबला करेगी।

यह निवेश सिर्फ़ वेतन से कहीं ज़्यादा है। 
मेटा द्वारा पेश किए गए व्यापक पैकेज सिर्फ़ वेतन नहीं हैं। इनमें शामिल हैं:

हस्ताक्षर बोनस
कंपनी के शेयर (इक्विटी)
प्रदर्शन बोनस
इन पैकेजों की राशि प्रौद्योगिकी उद्योग में सीईओ स्तर के वेतन से भी अधिक है।

सुपरइंटेलिजेंस लैब क्यों ज़रूरी है? 
मार्क ज़करबर्ग ने साफ़ कर दिया है कि एआई अब मेटा की पहली प्राथमिकता है। सुपरइंटेलिजेंस लैब के ज़रिए, मेटा का लक्ष्य है:
इंसानों से तेज़ और ज़्यादा स्मार्ट एआई बनाना।
चिकित्सा, विज्ञान, अर्थव्यवस्था और रचनात्मक उद्योगों में एआई का इस्तेमाल करना।
दुनिया की सबसे मज़बूत एआई टीम बनाना।

यह लैब मेटा को एआई की दुनिया में अग्रणी बनाने के लिए बनाई जा रही है। और यह दर्शाता है कि अब एआई की लड़ाई तकनीक की नहीं, बल्कि प्रतिभा की लड़ाई बन गई है।