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July 11 2026 11:45 pm

भारतीयों को जान से मारने और महिलाओं को गुलाम बनाने की धमकी वाला ऑडियो वायरल, सहमे प्रवासी

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ऑस्ट्रेलिया के ट्रकिंग उद्योग में काम करने वाले भारतीय मूल के प्रवासियों और ट्रक ड्राइवरों को लेकर एक बेहद स्तब्ध करने वाली और गंभीर रूप से चिंताजनक खबर सामने आई है। ऑस्ट्रेलिया की सड़कों पर दिन-रात माल ढुलाई करने वाले भारतीय ड्राइवरों को लगातार हिंसक नस्लीय दुर्व्यवहार (Racist Abuse) और जान से मारने की धमकियों का सामना करना पड़ रहा है। हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर एक बेहद आपत्तिजनक ऑडियो क्लिप वायरल हुआ है, जिसमें स्थानीय ऑस्ट्रेलियाई ड्राइवरों द्वारा खुलेआम भारतीयों के खिलाफ नफरत का जहर उगला जा रहा है। ऑस्ट्रेलियन ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (ABC) की एक विशेष खोजी रिपोर्ट के बाद सामने आए इस क्लिप ने देश में प्रवासी कामगारों की सुरक्षा और मानवाधिकारों को लेकर एक नई अंतरराष्ट्रीय बहस छेड़ दी है।

वायरल ऑडियो में रोंगटे खड़े करने वाली धमकियां: 'श्वेत आदमी के लिए खड़े हो, आ रहा है गृह युद्ध'

इंस्टाग्राम क्रिएटर एगी (@babysoftarms) द्वारा साझा किया गया यह खौफनाक ऑडियो मूल रूप से ऑस्ट्रेलियाई ट्रक ड्राइवरों के बीच होने वाले आंतरिक टू-वे रेडियो कम्युनिकेशन (UHF Radio) का हिस्सा है। इस रेडियो चैनल का उपयोग आमतौर पर सड़क सुरक्षा, मौसम की जानकारी या रूट डायवर्जन की चर्चा के लिए किया जाता है। परंतु, इस वायरल क्लिप में सुरक्षात्मक संवादों की जगह एक अज्ञात व्यक्ति को बेहद आक्रामक और हिंसक लहजे में यह कहते सुना जा सकता है: "सभी भारतीयों को मार डालो। श्वेत आदमी के लिए खड़े हो जाओ। एक भयानक गृह युद्ध (Civil War) आने वाला है। हम सभी भारतीय पुरुषों को मार डालेंगे, उनके बच्चों को पानी में डुबो देंगे, और उनकी महिलाओं को गुलामी (Slavery) के लिए बाजार में बेच देंगे।" इस ऑडियो के सामने आने के बाद से ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के भीतर डर का माहौल है।

लहजे और भाषा को लेकर रेडियो पर गालियों की बौछार: भारतीय ड्राइवरों ने बंद किए कम्युनिकेशंस

एबीसी न्यूज (ABC News) की विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, कई भारतीय ड्राइवरों ने यह दर्दनाक सच्चाई स्वीकार की है कि ऑस्ट्रेलियाई नेशनल हाईवे पर नस्लवाद अब उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का एक अनिवार्य और दुखद हिस्सा बन चुका है। पीड़ितों में से एक ड्राइवर ने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया, "यदि आपका बात करने का लहजा (Accent) खालिस ऑस्ट्रेलियाई है, तो आपके साथ सामान्य व्यवहार किया जाता है। लेकिन जैसे ही आप रेडियो पर पंजाबी या भारतीय लहजे में कोई रूट पूछते हैं, तो तुरंत दूसरी तरफ से भयंकर नस्लीय गालियां और धमकियां मिलनी शुरू हो जाती हैं।" लगातार मानसिक प्रताड़ना और धमकियों से तंग आकर अब अधिकांश भारतीय मूल के ड्राइवरों ने सुरक्षा के लिहाज से अपने ट्रकों में लगे कम्युनिकेशंस रेडियो को ऑन करना ही पूरी तरह बंद कर दिया है।

पेट्रोल पंप पर पंजाबी बोलने पर थूका: सार्वजनिक जगहों पर भी सुरक्षित नहीं हैं भारतीय

यह नस्लीय नफरत केवल ट्रकों के केबिन या डिजिटल स्पेस तक ही सीमित नहीं है, बल्कि अब आम रास्तों और सार्वजनिक स्थलों पर भी भारतीयों को सीधे तौर पर निशाना बनाया जा रहा है। ऐसी ही एक घिनौनी और अपमानजनक घटना का जिक्र करते हुए एक भारतीय मूल के ऑस्ट्रेलियाई नागरिक ने बताया कि वह दक्षिण ऑस्ट्रेलिया (South Australia) के एक पेट्रोल पंप पर अपनी पत्नी से सामान्य तरीके से पंजाबी भाषा में बात कर रहे थे। तभी एक स्थानीय गोरे व्यक्ति ने उनके पास आकर बेहद हिंसक अंदाज में कहा, "यह ऑस्ट्रेलिया है, यहां केवल अंग्रेजी में बात करो।" हद तो तब हो गई जब वह व्यक्ति पेट्रोल के पैसे देने के बाद वापस आया और अपने बड़े वाहन में बैठने से ठीक पहले भारतीय ड्राइवर के चेहरे की तरफ आक्रामक रूप से थूक कर चला गया।

ट्रकिंग एसोसिएशन ने जताई गहरी चिंता: सड़क दुर्घटनाओं का कारण बन सकता है मानसिक तनाव

इस बढ़ते सामाजिक तनाव को देखते हुए ऑस्ट्रेलियन ट्रकिंग एसोसिएशन (ATA) और नेशनल हेवी व्हीकल रेगुलेटर (NHVR) ने एक सख्त संयुक्त बयान जारी कर इस तरह की अमानवीय हरकतों की कड़े शब्दों में निंदा की है। समाजशास्त्रियों और सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि कार्यस्थल पर इस तरह के नस्लीय दुर्व्यवहार और मानसिक उत्पीड़न से ड्राइवरों के मानसिक स्वास्थ्य पर बेहद गहरा नकारात्मक असर पड़ता है। इसके चलते भारी वाहन चलाते समय ड्राइवरों का ध्यान भटक सकता है, जो अंततः बड़े और जानलेवा सड़क हादसों का मुख्य कारण बन सकता है।

यह पूरा मामला कूटनीतिक रूप से ऐसे नाजुक समय पर सामने आया है जब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ठीक एक दिन पहले ही अपनी तीन दिवसीय व्यस्त ऑस्ट्रेलिया यात्रा संपन्न कर न्यूजीलैंड पहुंचे हैं। इस द्विपक्षीय दौरे के दौरान भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच महत्वपूर्ण खनिजों, समुद्री सुरक्षा और असैन्य परमाणु ऊर्जा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में कई ऐतिहासिक समझौतों पर हस्ताक्षर हुए थे, लेकिन इस घटना ने दोनों देशों के बीच नागरिक स्तर पर सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है।