राजेश खन्ना: 'सुपरस्टार' टैग के पीछे का मास्टर प्लान? पब्लिसिस्ट के खुलासे ने सोशल मीडिया पर छेड़ी बहस

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India News Live,Digital Desk : हिंदी सिनेमा के इतिहास में जब भी 'सुपरस्टार' शब्द का जिक्र होता है, सबसे पहला नाम राजेश खन्ना का आता है। 1969 से 1971 के बीच लगातार 15-17 सोलो हिट फिल्में देने का रिकॉर्ड आज भी उनके नाम है। लेकिन क्या यह 'सुपरस्टार' का खिताब रातों-रात मिला था या इसके पीछे कोई सोची-समझी रणनीति थी? हाल ही में वायरल हो रही एक पुरानी क्लिप ने इस टाइटल की हकीकत से पर्दा उठाया है।

पब्लिसिस्ट का चौंकाने वाला दावा: "हम लिखकर भेजते थे नाम"

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में प्रसिद्ध पब्लिसिटी एजेंट तारक नाथ गांधी राजेश खन्ना के स्टारडम के निर्माण की प्रक्रिया समझा रहे हैं। गांधी के अनुसार, यह टाइटल एक मार्केटिंग स्ट्रैटेजी का हिस्सा था। उन्होंने बताया:

"जब हम प्रेस रिलीज या खबरें भेजते थे, तो जानबूझकर नाम के आगे 'सुपरस्टार राजेश खन्ना' लिखते थे। शुरुआत में कई पत्रकारों को इस पर आपत्ति होती थी। वे पूछते थे कि हम इन्हें 'सुपरस्टार' क्यों लिखें? तब उन्हें समझाने के लिए हम कभी प्यार से बात करते, कभी डिनर पर ले जाते तो कभी तोहफे देते थे। जब एक ही शब्द बार-बार छपने लगा, तो धीरे-धीरे लोगों ने इसे सच मान लिया और यह टाइटल उनके नाम के साथ हमेशा के लिए जुड़ गया।"

क्या केवल मार्केटिंग थी वजह?

इस क्लिप के सामने आने के बाद इंटरनेट पर दो गुट बन गए हैं। वीडियो के कैप्शन में दावा किया गया है कि 99% लोगों को इस सच्चाई का पता नहीं होगा कि कैसे पुराने समय में भी मीडिया का इस्तेमाल 'इमेज बिल्डिंग' के लिए किया जाता था। हालांकि, फिल्म जानकारों और फैंस का मानना है कि केवल पब्लिसिटी से इतना बड़ा नाम नहीं कमाया जा सकता।

फैंस ने दिया करारा जवाब: "स्टारडम बनाया जा सकता है, भीड़ नहीं"

वीडियो पर कमेंट्स की बाढ़ आ गई है। राजेश खन्ना के समर्थकों का कहना है कि आप मीडिया के जरिए 'टैग' तो दे सकते हैं, लेकिन लोगों के दिलों में जगह नहीं बना सकते।

लगातार हिट फिल्में: फैंस ने याद दिलाया कि काका ने 2 साल में बैक-टू-बैक 17 सुपरहिट फिल्में दी थीं, जो कोई छोटा कारनामा नहीं था।

क्रेज और जुनून: उस दौर में लड़कियों का उनकी कार की धूल से अपनी मांग भरना और उन्हें खून से खत लिखना कोई 'प्लान्ड' इवेंट नहीं था।

आधुनिक तुलना: कुछ यूजर्स ने आज के दौर की तुलना करते हुए कहा कि आज कार्तिक आर्यन या आलिया भट्ट जैसे सितारों को 'मैन्युफैक्चर्ड स्टार्स' कहा जा सकता है, लेकिन राजेश खन्ना का जादू बिल्कुल मौलिक (Original) था।

'आशीर्वाद' और स्टारडम का अंत

राजेश खन्ना के बंगले 'आशीर्वाद' के बाहर लगने वाली भीड़ आज भी बॉलीवुड के इतिहास की सबसे बड़ी भीड़ मानी जाती है। हालांकि तारक नाथ गांधी का खुलासा यह बताता है कि उस दौर में भी पब्लिसिटी मशीनरी कितनी सक्रिय थी, लेकिन यह भी सच है कि राजेश खन्ना के पास वह 'X-फैक्टर' था जिसने उन्हें वाकई में पहला सुपरस्टार बनाया।