बंगाल चुनाव के बाद क्या महंगे होंगे पेट्रोल-डीजल? तेल की कीमतों पर केंद्र सरकार का बड़ा स्पष्टीकरण
India News Live,Digital Desk : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण के मतदान के बीच आम जनता के मन में यह बड़ा सवाल था कि क्या चुनाव खत्म होते ही पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी उछाल आएगा? अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक तनाव को देखते हुए इन अटकलों को और बल मिल रहा था। हालांकि, केंद्र सरकार ने अब इन तमाम चर्चाओं पर विराम लगाते हुए अपना पक्ष साफ कर दिया है।
सरकार का रुख: "कीमतों में वृद्धि का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं"
पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि चुनाव के बाद तेल की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर फिलहाल कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने मंगलवार को एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कहा कि देश में पेट्रोलियम पदार्थों का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और आपूर्ति को लेकर किसी भी तरह की घबराहट (Panic) की जरूरत नहीं है। उन्होंने जनता से अपील की कि वे अफवाहों के चक्कर में आकर जरूरत से ज्यादा तेल या एलपीजी सिलेंडर का भंडारण न करें।
तेल कंपनियों को हो रहा भारी नुकसान
भले ही सरकार ने अभी दाम बढ़ाने से इनकार किया है, लेकिन अंदरूनी आंकड़े चिंताजनक हैं। केंद्र सरकार द्वारा साझा की गई जानकारी के मुताबिक:
पेट्रोल पर नुकसान: कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों को प्रति लीटर पेट्रोल पर लगभग 20 रुपये का नुकसान हो रहा है।
डीजल पर नुकसान: डीजल की स्थिति और भी गंभीर है, जहां कंपनियों को प्रति लीटर करीब 100 रुपये का घाटा उठाना पड़ रहा है।
यह घाटा वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आई अस्थिरता और डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति के कारण बढ़ रहा है।
युद्ध और वैश्विक तनाव का असर
अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के 60 दिन पूरे होने पर सरकार की रणनीति के बारे में पूछे जाने पर मंत्रालय ने भरोसा जताया कि युद्ध लंबा चलने के बावजूद भारत की आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा। सरकार ने वैकल्पिक मार्गों और रणनीतिक भंडार के जरिए आपूर्ति सुनिश्चित करने की योजना बनाई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर भारत की नजर
वैश्विक स्तर पर तेल की निर्बाध आपूर्ति के लिए भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भी आवाज उठाई है। संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी मिशन की प्रभारी राजदूत योजना पटेल ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में समुद्री सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इस महत्वपूर्ण जलमार्ग से जहाजों का आवागमन सुरक्षित और बिना किसी बाधा के होना चाहिए। बता दें कि दुनिया के कच्चे तेल का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है।