ढह गया पूरा पहाड़: नेपाल में पलक झपकते ही मलबे में तब्दील हुई विशाल पहाड़ी, जान बचाकर भागे लोग
पड़ोसी मुल्क नेपाल के पहाड़ी इलाके से प्रकृति के रौद्र रूप की एक ऐसी रूह कंपा देने वाली तस्वीर सामने आई है, जिसने पूरे हिमालयी क्षेत्र में दहशत फैला दी है। सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे एक वीडियो में एक विशालकाय हरा-भरा पहाड़ पलक झपकते ही भरभराकर ताश के पत्तों की तरह ढहता नजर आ रहा है। चट्टानों के टूटने की गड़गड़ाहट और लाखों टन मलबे के नीचे गिरने की तेज आवाज सुनते ही नीचे मौजूद ग्रामीण और राहगीर अपनी जान बचाने के लिए चीखते-पुकारते हुए सुरक्षित स्थानों की ओर भागते दिखे। इस भीषण भूस्खलन (Landslide) ने न केवल आसपास के कई घरों और प्रमुख सड़क मार्गों को अपनी चपेट में ले लिया, बल्कि नीचे बहने वाली पहाड़ी नदी के प्रवाह को भी अवरुद्ध कर दिया है, जिससे अब वहां एक कृत्रिम झील बनने और विनाशकारी बाढ़ आने का खतरा मंडराने लगा है।
पलक झपकते ही जमींदोज हुआ विशाल पहाड़
सामने आए इस खौफनाक वीडियो में देखा जा सकता है कि शुरुआत में पहाड़ की चोटी से कुछ छोटी चट्टानें और धूल का गुबार उठता है। स्थानीय लोग जब तक इस हलचल को समझ पाते, तब तक पहाड़ी का एक बहुत बड़ा हिस्सा दरक गया और पूरी की पूरी पहाड़ी नीचे घाटी की तरफ समा गई। धूल और मलबे का ऐसा विशाल बवंडर उठा जिसने पूरे इलाके को कुछ ही सेकंडों में अपनी आगोश में ले लिया। वहां मौजूद लोगों ने जब इस भयावह मंजर को अपनी आंखों से देखा, तो हर तरफ अफरा-तफरी मच गई। लोग अपने मवेशियों और सामान को छोड़कर जान बचाने के लिए पहाड़ी से दूर ऊंची जगहों की ओर दौड़ पड़े। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, धमाके जैसी आवाज इतनी तेज थी कि कई किलोमीटर दूर तक लोगों को भूकंप जैसी कंपकंपी महसूस हुई।
नदी का रास्ता रुका और निचले इलाकों में बाढ़ का साया
इस बड़े लैंडस्लाइड का सबसे खतरनाक पहलू यह है कि पहाड़ का लाखों मीट्रिक टन मलबा नीचे बह रही नदी के मुख्य प्रवाह पर जाकर गिर गया है। नदी का प्राकृतिक रास्ता पूरी तरह बंद हो जाने की वजह से वहां तेजी से पानी का भराव हो रहा है और एक विशाल अस्थाई झील तैयार हो गई है। अगर मलबे का यह प्राकृतिक बांध पानी के अत्यधिक दबाव से अचानक टूटता है, तो निचले तटीय इलाकों और सीमावर्ती गावों में भारी तबाही मच सकती है। नेपाल की स्थानीय आपदा प्रबंधन टीम, सेना और सशस्त्र पुलिस बल तुरंत हरकत में आ गए हैं। ड्रोन कैमरों के जरिए नदी में बने मलबे के अवरोध का मुआयना किया जा रहा है ताकि नियंत्रित तरीके से पानी की निकासी कराई जा सके और किसी बड़े जलप्रलय को टाला जा सके।
सीमावर्ती इलाकों में हाई अलर्ट और राहत-बचाव अभियान
नेपाल में हुई इस प्राकृतिक आपदा का असर केवल वहीं तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे सटे भारत के सीमावर्ती तराई इलाकों में भी प्रशासन सतर्क हो गया है। उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और बिहार के सीमावर्ती जिलों की निगरानी बढ़ा दी गई है ताकि नदी के जलस्तर में होने वाले किसी भी अचानक बदलाव से निपटा जा सके। नेपाल के प्रभावित क्षेत्र में मुख्य संपर्क मार्ग पूरी तरह कट चुके हैं, जिससे दर्जनों गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क टूट गया है। बचाव दल फंसे हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर बनाए गए राहत शिविरों में पहुंचाने में जुटे हैं। भूवैज्ञानिकों का मानना है कि हिमालयी क्षेत्र में कमजोर मिट्टी, अनियोजित निर्माण और भारी बारिश के कारण पहाड़ों की आंतरिक संरचना अस्थिर हो रही है, जिससे इस तरह के विनाशकारी भूस्खलन की घटनाएं बार-बार सामने आ रही हैं।