राज्यसभा चुनाव में भाजपा का बड़ा उलटफेर: दिग्गजों को किनारे कर कार्यकर्ताओं पर लगाया दांव
उत्तर प्रदेश से राज्यसभा की सीटों के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा घोषित उम्मीदवारों की सूची ने राजनीतिक पंडितों से लेकर पार्टी के भीतर तक सबको चौंका दिया है। अक्सर केंद्रीय मंत्रियों, राष्ट्रीय स्तर के बड़े प्रवक्ताओं या कॉरपोरेट पृष्ठभूमि के चेहरों को उच्च सदन भेजने के लिए पहचानी जाने वाली भाजपा ने इस बार पूरी तरह से लीक से हटकर फैसला लिया है। पार्टी ने अपने मौजूदा दिग्गजों और बड़े रसूखदारों को दरकिनार करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और पार्टी संगठन के समर्पित, जमीनी कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता दी है।
पार्टी के इस साहसिक कदम के पीछे केवल संसद का उच्च सदन भरना नहीं है, बल्कि इसके तार साल 2024 के लोकसभा चुनाव से मिले कड़वे सबक और उत्तर प्रदेश में होने वाले मिशन 2027 के विधानसभा चुनाव की जमीन तैयार करने से सीधे जुड़े हैं।
दिग्गजों की विदाई: सभी 8 सीटों पर पूरी तरह नए चेहरे
भाजपा ने उत्तर प्रदेश से खाली हो रही 8 सीटों में से किसी भी मौजूदा सांसद को रिपीट नहीं किया है। तीन बार सांसद रहे पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के बेटे नीरज शेखर, केंद्रीय मंत्री रहे बीएल वर्मा, वरिष्ठ नेता अरुण सिंह, पूर्व डीजीपी बृजलाल, सीमा द्विवेदी और गीता शाक्य जैसे दिग्गजों को टिकट नहीं दिया गया है।
इसकी जगह पार्टी ने संगठन के लिए सालों से चुपचाप काम कर रहे चेहरों पर दांव लगाया है:
धर्मपाल सिंह (ओबीसी - लोधी): योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री और रुहेलखंड के कद्दावर नेता।
राधाकांत ओझा (सवर्ण - ब्राह्मण): इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष और संघ पृष्ठभूमि के वरिष्ठ वकील।
गोपी कृष्ण पांडेय (सवर्ण - ब्राह्मण): एबीवीपी के पूर्व कार्यकर्ता और संगठन में विभिन्न जिम्मेदारियां संभाल चुके जमीनी नेता।
राम प्रताप सिंह चौहान (सवर्ण - राजपूत): आगरा के पूर्व विधायक और पश्चिमी यूपी के वरिष्ठ संगठनात्मक चेहरे।
प्रकाश पाल (ओबीसी - पाल/गडेरिया): पूर्व प्रचारक, पूर्व क्षेत्रीय अध्यक्ष और वर्तमान में यूपी भाजपा ओबीसी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष।
श्रुति गंगवार (ओबीसी - कुर्मी): रुहेलखंड में कुर्मी राजनीति का बड़ा चेहरा और झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार की बेटी।
विद्यासागर सोनकर (दलित - खटीक): पूर्वी उत्तर प्रदेश से आने वाले पूर्व सांसद और संगठन के पुराने महारथी।
प्रियंका सिंह रावत (दलित - पासी): बाराबंकी की पूर्व सांसद और दलित-महिला राजनीति का सक्रिय चेहरा।
2024 के झटके से सबक: 'पीडीए' की काट के लिए नया सोशल इंजीनियरिंग फॉर्मूला
2014 से लेकर 2022 तक उत्तर प्रदेश में अजेय मानी जाने वाली भाजपा को 2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले ने तगड़ा झटका दिया था। भाजपा 62 सीटों से फिसलकर सीधे 33 सीटों पर आ गई थी। समीक्षा बैठकों में यह बात खुलकर सामने आई थी कि गैर-यादव ओबीसी (खासकर कुर्मी, लोध, पाल) और गैर-जाटव दलित (पासी, सोनकर) वोट बैंक में बिखराव हुआ था।
राज्यसभा की इस सूची के जरिए पार्टी ने उस सामाजिक ताने-बाने को फिर से जोड़ने की कोशिश की है:
गैर-यादव ओबीसी पर मजबूत पकड़: 3 ओबीसी उम्मीदवारों (धर्मपाल सिंह, प्रकाश पाल, श्रुति गंगवार) को चुनकर पार्टी ने लोधी, पाल और कुर्मी समुदायों को सीधा प्रतिनिधित्व दिया है।
दलितों में गैर-जाटव फोकस: जाटव वर्ग से आने वाले बृजलाल को दोबारा मौका न देकर पासी समाज से प्रियंका रावत और खटीक समाज से विद्यासागर सोनकर को टिकट देकर गैर-जाटव दलितों को अपने पाले में लाने का संदेश दिया है।
पारंपरिक सवर्ण वोट बैंक का सम्मान: 2 ब्राह्मण और 1 राजपूत उम्मीदवार उतारकर पार्टी ने अपने कोर सवर्ण कैडर को भी पूरी तरह संतुष्ट रखा है।
आधी आबादी को 25% हिस्सेदारी: 8 में से 2 सीटों (प्रियंका रावत और श्रुति गंगवार) पर महिलाओं को मौका देकर महिला सशक्तिकरण के एजेंडे को आगे बढ़ाया है।
संघ और संगठन के कार्यकर्ताओं में नया उत्साह भरने की रणनीति
लोकसभा चुनाव के बाद यह शिकायत आम हो गई थी कि सरकार और पार्टी के भीतर जमीनी कार्यकर्ताओं की उपेक्षा हो रही है, जिससे कैडर में भारी निराशा थी। केंद्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष और संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों की लखनऊ में हुई लगातार बैठकों के बाद यह सहमति बनी कि केवल बड़े नामों या 'पैराशूट' नेताओं को पद देने की प्रथा बंद होनी चाहिए।
राधाकांत ओझा, गोपी कृष्ण पांडेय और प्रकाश पाल जैसे संघ और संगठन के पुराने स्वयंसेवकों को उच्च सदन भेजकर भाजपा ने बूथ स्तर तक के कार्यकर्ताओं को यह स्पष्ट संदेश दिया है कि पार्टी के प्रति निष्ठा और जमीनी मेहनत का फल जरूर मिलता है। इससे संगठन के भीतर वर्षों से काम कर रहे कार्यकर्ताओं का मनोबल तेजी से बढ़ा है।
क्षेत्रीय संतुलन: रुहेलखंड से लेकर पूर्वांचल तक हर कोना साधा
उम्मीदवारों के चयन में पूरे उत्तर प्रदेश के भौगोलिक संतुलन का भी खास ध्यान रखा गया है। रुहेलखंड से धर्मपाल सिंह और श्रुति गंगवार, अवध से प्रियंका सिंह रावत, कानपुर-बुंदेलखंड से प्रकाश पाल, ब्रज-पश्चिम से रामप्रताप चौहान और पूर्वांचल से राधाकांत ओझा व विद्यासागर सोनकर को चुनकर पार्टी ने किसी भी संभाग को खाली नहीं छोड़ा है।
भाजपा की यह नई रणनीति यह साबित करती है कि पार्टी अब सत्ता के अभिजात्य वर्ग की राजनीति से बाहर निकलकर विशुद्ध रूप से कैडर-आधारित और 2027 के चुनावी समीकरणों को ध्यान में रखकर आगे बढ़ रही है।