पेंशन और कम्यूटेशन स्कीम में बड़े बदलाव की तैयारी! केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स पर पड़ेगा सीधा असर
आठवें केंद्रीय वेतन आयोग (8th Central Pay Commission) को लेकर सेवारत कर्मचारियों के वेतन संशोधन के साथ-साथ सेवानिवृत्त कर्मचारियों की सबसे अहम योजना यानी 'पेंशन और कम्यूटेशन स्कीम' (Pension Commutation & Restoration Scheme) में बड़े नीतिगत बदलाव की तैयारी चल रही है। केंद्रीय कर्मचारी संगठनों (NC-JCM) और अखिल भारतीय पेंशनर्स परिसंघ (AIFPA) ने वेतन आयोग के समक्ष ज्ञापन सौंपकर मौजूदा 15 वर्ष की कम्यूटेशन बहाली अवधि को घटाने और पेंशन गणना के फॉर्मूले को नए सिरे से परिभाषित करने का प्रस्ताव रखा है।
यदि वेतन आयोग इन सिफारिशों को स्वीकार करता है, तो इसका सीधा और सकारात्मक प्रभाव देश भर के लगभग 50 लाख सेवारत केंद्रीय कर्मचारियों और 65 लाख से अधिक पेंशनभोगियों के वित्तीय भविष्य पर पड़ेगा।
15 साल के बजाय 11 से 12 वर्ष में पूरी पेंशन बहाल करने की मांग
मौजूदा नियमों के तहत जब कोई केंद्रीय कर्मचारी सेवानिवृत्त होता है, तो उसे अपनी मूल पेंशन का अधिकतम 40 प्रतिशत हिस्सा एकमुश्त (Lump Sum) अग्रिम राशि के रूप में लेने की सुविधा मिलती है, जिसे 'पेंशन कम्यूटेशन' कहा जाता है। इसके बदले में अगले 15 वर्षों तक कर्मचारी को केवल 60 प्रतिशत मासिक पेंशन का ही भुगतान किया जाता है।
पेंशनर्स एसोसिएशनों का तर्क है कि मौजूदा वित्तीय गणना और ब्याज दरों के अनुसार सरकार द्वारा दी गई कम्यूटेड राशि और उस पर बनने वाले ब्याज की पूरी वसूली 10 से 11 वर्षों में ही पूरी हो जाती है। इसके बावजूद 15 साल तक कटी हुई पेंशन देना बुजुर्ग पेंशनर्स के साथ अन्याय है।
प्रस्तावित बदलाव: कम्यूटेशन बहाली की समयसीमा को 15 वर्ष से घटाकर 11 या 12 वर्ष किया जाए।
सीधा फायदा: 60 वर्ष की उम्र में रिटायर होने वाले कर्मचारियों को 75 वर्ष की उम्र तक इंतजार करने के बजाय 71 या 72 वर्ष की आयु में ही 100% पूरी पेंशन दोबारा मिलनी शुरू हो जाएगी।
अंतिम वेतन का 67% पेंशन और पारिवारिक पेंशन में बढ़ोतरी का प्रस्ताव
वेतन आयोग के समक्ष पेंशन स्कीम के बुनियादी फॉर्मूले में भी संशोधन का बड़ा प्रस्ताव रखा गया है:
फुल पेंशन दर: वर्तमान में कर्मचारी को उसके अंतिम आहरित वेतन (Last Pay Drawn) का 50 प्रतिशत पेंशन के रूप में मिलता है। संगठनों ने मांग की है कि जीवनयापन और चिकित्सा खर्च को देखते हुए इसे बढ़ाकर अंतिम वेतन का 67 प्रतिशत तय किया जाए।
पारिवारिक पेंशन (Family Pension): किसी कर्मचारी या पेंशनर के निधन के बाद आश्रित पति/पत्नी को मिलने वाली पारिवारिक पेंशन को मौजूदा 30 प्रतिशत से बढ़ाकर अंतिम वेतन का 50 प्रतिशत करने की सिफारिश की गई है।
अतिरिक्त पेंशन की आयु सीमा: वर्तमान व्यवस्था में 80 वर्ष की उम्र पूरी होने पर 20% अतिरिक्त पेंशन मिलती है। नई मांग के अनुसार, 65 वर्ष की आयु से ही प्रत्येक 5 वर्ष के अंतराल पर 5% अतिरिक्त पेंशन दी जानी चाहिए।
न्यूनतम पेंशन और सेवारत कर्मचारियों पर क्या होगा असर?
पेंशन स्कीम में होने वाले इन संभावित संशोधनों का सीधा असर सेवारत और सेवानिवृत्त दोनों वर्गों पर दिखेगा:
न्यूनतम पेंशन में उछाल: यदि फिटमेंट फैक्टर को 2.0 से 2.5 के दायरे में भी लागू किया जाता है, तो वर्तमान न्यूनतम पेंशन ₹9,000 प्रति माह से बढ़कर ₹18,000 से ₹22,500 के पार पहुंच जाएगी।
रिटायरमेंट प्लानिंग में आसानी: कम्यूटेशन अवधि घटने से कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के समय एकमुश्त राशि लेने में हिचकिचाहट नहीं होगी, क्योंकि उन्हें कम समय में ही पूरी पेंशन वापस मिलने का भरोसा रहेगा।
यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) और NPS समन्वय: हाल ही में घोषित सुनिश्चित पेंशन व्यवस्थाओं के बीच 8वें वेतन आयोग द्वारा तय किया जाने वाला नया पे-मैट्रिक्स यह निर्धारित करेगा कि भविष्य के पेंशनर्स का मासिक सुनिश्चित कॉर्पस कितना मजबूत होगा।