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September 18 2026 11:58 pm

33 फिल्मों को पछाड़कर भारत की ऑफिशियल एंट्री बनी 8.9 रेटिंग वाली 'गोंधल', ऑस्कर में गूंजेगी महाराष्ट्र की लोक परंपरा

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विश्व सिनेमा के सबसे प्रतिष्ठित मंच 'एकेडमी अवॉर्ड्स' यानी ऑस्कर 2027 (99th Academy Awards) के लिए भारत की आधिकारिक प्रविष्टि (Official Entry) का बिगुल बज चुका है। फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया (FFI) ने शुक्रवार को आधिकारिक ऐलान करते हुए बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म कैटेगरी के लिए मराठी ड्रामा-थ्रिलर फिल्म 'गोंधल' (Gondhal) के नाम पर अपनी अंतिम मुहर लगा दी है। देश भर से ऑस्कर की दौड़ में शामिल 33 दिग्गज और बड़े बजट की फिल्मों को पछाड़कर 'गोंधल' ने यह मुकाम हासिल किया है। 8.9 की जबरदस्त IMDb रेटिंग और समीक्षकों की असाधारण तारीफ बटोरने वाली इस फिल्म के चयन ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि जब बात जमीनी संस्कृति, अद्वितीय कहानी और सिनेमाई कला की आती है, तो रीजनल सिनेमा का कोई सानी नहीं है।

33 फिल्मों की कड़ी दौड़ और FFI जूरी का सर्वसम्मत फैसला

चेन्नई में लगातार कई दिनों तक चली विस्तृत स्क्रीनिंग प्रक्रिया के दौरान फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया की 13 सदस्यीय चयन समिति ने देश की 33 शीर्ष फिल्मों का बारीकी से मूल्यांकन किया। इस दौड़ में बॉलीवुड, तमिल, तेलुगु, मलयालम और बंगाली सिनेमा की कई बहुचर्चित और व्यावसायिक रूप से सफल फिल्में शामिल थीं। जूरी के अध्यक्ष पी. शेषाद्री के नेतृत्व में समिति ने फिल्म निर्माण की बारीकियों, मौलिकता, अभिनय और वैश्विक स्तर पर दर्शकों को जोड़ने की क्षमता के आधार पर सर्वसम्मति से 'गोंधल' को भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए सबसे उपयुक्त माना। जूरी का मानना था कि यह फिल्म भारतीय लोक परंपरा के जरिए इंसानी जज्बातों और समाज की जटिल बुनावट को बिना किसी बनावट के दुनिया के सामने रखती है।

क्या है 8.9 रेटिंग वाली 'गोंधल' की कहानी और इसका रहस्य?

संतोष दवाखर के कुशल निर्देशन और सशक्त लेखन में बनी 'गोंधल' महाराष्ट्र के ग्रामीण परिवेश में रची-बसी एक रात की सस्पेंस-ड्रामा कहानी है। फिल्म का पूरा ताना-बाना महाराष्ट्र की सदियों पुरानी पारंपरिक लोक विधा 'गोंधल' के इर्द-गिर्द बुना गया है। आमतौर पर गोंधल एक रातभर चलने वाला आध्यात्मिक और सांस्कृतिक अनुष्ठान होता है, जिसमें गोंधली कलाकार वाद्ययंत्रों, गीतों और नृत्यों के जरिए कुलदेवी और देवताओं का आह्वान करते हैं। फिल्म में एक नवविवाहित जोड़े के कुलदेवता पूजन के दौरान यह पारंपरिक अनुष्ठान चल रहा होता है, लेकिन रात ढलने के साथ ही इस भक्तिमय माहौल के बीच इंसानी रिश्तों, छिपे हुए पारिवारिक रहस्यों, दबे हुए अपराध और आंतरिक अंतर्द्वंद्व की परतें खुलने लगती हैं। अंधेरे, मशालों की रोशनी, ढोल की थाप और रोंगटे खड़े कर देने वाले बैकग्राउंड स्कोर के बीच फिल्म दर्शकों को एक पल के लिए भी स्क्रीन से नजरें हटाने नहीं देती।

इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया में जीत चुकी है सिल्वर पीकॉक

'गोंधल' केवल ऑस्कर की चयन समिति की ही पसंद नहीं बनी है, बल्कि रिलीज के बाद से ही इसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फिल्म समीक्षकों से जबरदस्त सराहना मिली है। निर्देशक संतोष दवाखर को इस फिल्म के उत्कृष्ट निर्देशन के लिए 'इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया' (IFFI) में प्रतिष्ठित 'सिल्वर पीकॉक' (बेस्ट डायरेक्टर) अवॉर्ड से नवाजा जा चुका है। फिल्म में स्थानीय कलाकारों का सधा हुआ अभिनय, जमीनी संवाद और बिना किसी भारी भरकम सेट के खींची गई यथार्थवादी सिनेमैटोग्राफी ही इसकी सबसे बड़ी ताकत है। यही कारण है कि दर्शकों ने इसे 8.9 जैसी असाधारण रेटिंग से नवाजा है।

ऑस्कर में मराठी सिनेमा का स्वर्णिम इतिहास और चौथी आधिकारिक प्रविष्टि

मराठी सिनेमा का ऑस्कर की आधिकारिक प्रविष्टियों में बेहद गौरवशाली ट्रैक रिकॉर्ड रहा है। 'गोंधल' ऑस्कर की मुख्य दौड़ में भारत का आधिकारिक प्रतिनिधित्व करने वाली चौथी मराठी फिल्म बन गई है। इससे पहले साल 2004 में संदीप सावंत की फिल्म 'श्वास' (Shwaas) ने ऑस्कर में पहुंचकर इतिहास रचा था। इसके बाद साल 2009 में 'हरिश्चंद्राची फैक्ट्री' (Harishchandrachi Factory) और साल 2015 में चैतन्य तम्हाणे की बहुचर्चित लीगल ड्रामा 'कोर्ट' (Court) को भारत की आधिकारिक प्रविष्टि बनने का गौरव मिला था। अब एक दशक से भी अधिक समय के बाद 'गोंधल' के चयन ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि कंटेंट और कहानी के मामले में मराठी सिनेमा देश का पथ-प्रदर्शक बना हुआ है।

अब शुरू होगा ऑस्कर कैंपेन का असली इम्तिहान

फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया की तरफ से आधिकारिक चयन मिलने के बाद अब 'गोंधल' की टीम के सामने लॉस एंजिल्स में एकेडमी मेंबर्स के बीच फिल्म की स्क्रीनिंग और व्यापक प्रचार अभियान (Oscar Campaign) चलाने की बड़ी चुनौती होगी। भारत की ओर से अब तक केवल तीन फिल्में—'मदर इंडिया' (1957), 'सलाम बॉम्बे' (1988) और 'लगान' (2001)—ही बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म की अंतिम टॉप-5 नॉमिनेशन सूची में जगह बना पाई हैं। भारतीय सिनेप्रेमियों को पूरी उम्मीद है कि अपनी अनूठी लोक संस्कृति और बेजोड़ कहानी के दम पर 8.9 रेटिंग वाली 'गोंधल' 99वें एकेडमी अवॉर्ड्स के फाइनल नॉमिनेशन में जगह बनाकर देश का नाम रोशन करेगी।