5 साल में भारत की चिप इंडस्ट्री में ऐतिहासिक क्रांति: Semicon 2.0 का अगला बड़ा मास्टरप्लान तैयार
वैश्विक अर्थव्यवस्था और आधुनिक तकनीक की रीढ़ मानी जाने वाली सेमीकंडक्टर चिप इंडस्ट्री में भारत ने पिछले पांच वर्षों में जो लंबी छलांग लगाई है, उसने दुनिया भर के टेक दिग्गजों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। स्मार्टफोन, इलेक्ट्रिक वाहन (EV), डिफेंस सिस्टम, 5G इंफ्रास्ट्रक्चर से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) डेटा सेंटर्स तक—हर जगह माइक्रोचिप्स की मांग अभूतपूर्व रूप से बढ़ी है।
कोविड महामारी के दौरान पैदा हुए वैश्विक चिप संकट और ताइवान पर अत्यधिक निर्भरता के जोखिम को देखते हुए भारत सरकार ने वर्ष 2021 के अंत में ₹76,000 करोड़ के वित्तीय परिव्यय के साथ 'इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन' (ISM 1.0) की ऐतिहासिक नींव रखी थी। अब इस मिशन के पहले चरण की शानदार सफलता के बाद सरकार 'सेमीकॉन 2.0' (Semicon India 2.0) का व्यापक रोडमैप जमीन पर उतारने की तैयारी कर चुकी है, जिसका लक्ष्य भारत को अगले दशक में दुनिया का शीर्ष सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग और डिजाइनिंग हब बनाना है।
5 साल का सफर: पायलट प्रोजेक्ट से लेकर कमर्शियल फैब तक की यात्रा
पिछले पांच वर्षों में भारत केवल चिप डिजाइनिंग में बैकएंड सपोर्ट देने वाले देश से आगे बढ़कर वास्तविक मैन्युफैक्चरिंग (फैब्रिकेशन और पैकेजिंग) की कतार में खड़ा हो चुका है:
टाटा-पावरचिप कमर्शियल फैब: गुजरात के धोलेरा में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और ताइवान की पीएसएमसी (PSMC) की साझेदारी में ₹91,000 करोड़ का पहला कमर्शियल सेमीकंडक्टर फैब तेजी से आकार ले रहा है।
एडवांस्ड पैकेजिंग (ATMP/OSAT) प्रोजेक्ट्स: असम के जगीरोड में टाटा का विशाल असेंबली और टेस्टिंग प्लांट, सानंद (गुजरात) में माइक्रोन (Micron) की अत्याधुनिक टेस्टिंग यूनिट और केनेस सेमीकॉन (Kaynes Semicon) के प्रोजेक्ट्स पर काम युद्धस्तर पर जारी है।
रोजगार और इंफ्रास्ट्रक्चर: इन पांच वर्षों में देश में सेमीकंडक्टर ग्रेड अल्ट्रा-प्योर वाटर, स्पेशल गैसेस, केमिकल्स और 24x7 अनइंटरप्टेड ग्रीन पावर ग्रिड का मजबूत स्थानीय नेटवर्क तैयार किया गया है।
Semicon 2.0 का क्या है अगला बड़ा प्लान?
'सेमीकॉन 1.0' का मुख्य उद्देश्य दुनिया की शीर्ष कंपनियों को भारत में अपनी इकाइयां लगाने के लिए आकर्षित करना और भरोसा पैदा करना था। अब 'सेमीकॉन 2.0' का ध्यान आत्मनिर्भरता, स्थानीयकरण और एडवांस नोड्स पर केंद्रित है:
बजट और वित्तीय प्रोत्साहन में बड़ा विस्तार: केंद्र सरकार सेमीकॉन 2.0 के तहत वित्तीय आवंटन को दोगुना करने की योजना बना रही है, जिसमें राज्यों की ओर से मिलने वाली अतिरिक्त सब्सिडी को भी एकीकृत किया जाएगा।
घरेलू चिप डिजाइन इकोसिस्टम (Design-Led Manufacturing): भारत में पहले से ही दुनिया के 20% सेमीकंडक्टर डिजाइन इंजीनियर्स मौजूद हैं। सेमीकॉन 2.0 के तहत भारतीय फैबलेस स्टार्टअप्स को चिप डिजाइन करने, पेटेंट रजिस्टर कराने और उनका कमर्शियल उत्पादन देश के भीतर ही कराने के लिए 'डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव' (DLI) स्कीम का दायरा कई गुना बढ़ाया जा रहा है।
सप्लाई चेन और केमिकल्स का स्थानीय निर्माण: सेमीकंडक्टर निर्माण में इस्तेमाल होने वाले सिलिकॉन वेफर्स, फोटोरेसिस्ट केमिकल्स, स्पेशल गैसेस और फैब इक्विपमेंट्स के स्थानीय निर्माण को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि विदेशों पर आयात निर्भरता शून्य की जा सके।
एडवांस्ड नोड्स पर फोकस: 28nm और 40nm के मैच्योर नोड्स (जो ऑटोमोबाइल और होम अप्लायंसेज में लगते हैं) के बाद अब भारत का लक्ष्य 7nm, 5nm और उससे भी छोटे नोड्स पर शोध और फैब स्थापित करना है, जिनकी जरूरत एआई और सुपरकंप्यूटिंग में होती है।
85,000 सेमीकंडक्टर टैलेंट तैयार करने का महाअभियान
किसी भी सेमीकंडक्टर उद्योग की सफलता कुशल मानव संसाधन (Skilled Workforce) पर निर्भर करती है।
सरकार ने देश के 300 से अधिक शीर्ष विश्वविद्यालयों, इंजीनियरिंग कॉलेजों और आईआईटी (IITs) में सेमीकंडक्टर डिजाइन, वीएलएसआई (VLSI) और फैब्रिकेशन टेक्नोलॉजी का विशेष पाठ्यक्रम अनिवार्य किया है।
लक्ष्य अगले 5 से 7 वर्षों के भीतर 85,000 से अधिक विश्वस्तरीय सेमीकंडक्टर इंजीनियर्स, रिसर्चर्स और ऑपरेटरों की एक ऐसी फौज खड़ी करना है जो न केवल भारत बल्कि वैश्विक चिप इंडस्ट्री का नेतृत्व कर सके।
भू-राजनीतिक दृष्टि से क्यों महत्वपूर्ण है भारत की यह छलांग?
वर्तमान भू-राजनीतिक परिदृश्य (Geopolitics) में चिप्स को 'नया कच्चा तेल' कहा जा रहा है। ताइवान स्ट्रेट में तनाव और पश्चिमी देशों की 'चाइना प्लस वन' नीति के बीच अमेरिका, यूरोप, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे तकनीकी रूप से सक्षम देश भारत को एक भरोसेमंद और सुरक्षित भागीदार के रूप में देख रहे हैं। सेमीकॉन 2.0 की यह नई रणनीति भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन की अग्रिम पंक्ति में स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होने जा रही है।