'BJP में शामिल होने पर वॉशिंग मशीन, डटे रहने पर क्रशिंग मशीन': TMC के बागी सांसद अरूप चक्रवर्ती को लोकपाल से राहत पर भड़के अभिषेक बनर्जी
पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के आधिकारिक नाम और सिंबल विवाद के बीच अब केंद्रीय जांच एजेंसियों और बागी नेताओं को मिलने वाली राहत पर सियासी घमासान तेज हो गया है। तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर निशाना साधते हुए 'वॉशिंग मशीन' और 'क्रशिंग मशीन' का तंज कसा है।
अभिषेक बनर्जी की यह तीखी प्रतिक्रिया बांकुरा से लोकसभा सांसद अरूप चक्रवर्ती के खिलाफ लोकपाल में चल रही भ्रष्टाचार की शिकायत खारिज होने के बाद सामने आई है। अरूप चक्रवर्ती हाल ही में ममता बनर्जी का साथ छोड़कर तृणमूल के बागी धड़े में शामिल हुए थे।
'पीएम मोदी के न्यू इंडिया के मशीन युग में आपका स्वागत है'
अभिषेक बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए भाजपा की कार्यशैली पर सीधा प्रहार किया:
एक्स पर किया व्यंग्य: अभिषेक बनर्जी ने लिखा, "अद्भुत! पीएम मोदी के 'न्यू इंडिया' के शानदार मशीन युग में आपका स्वागत है—BJP में शामिल हो जाइए और 'वॉशिंग मशीन' आपका इंतजार कर रही है। अपनी जगह पर डटे रहिए, तो 'क्रशिंग मशीन' (कुचलने वाली मशीन) चलने लगती है।"
एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप: उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से यह आरोप लगाया कि जो विपक्षी नेता झुकने से इनकार करते हैं, उनके खिलाफ केंद्रीय जांच एजेंसियों को हथियार बनाकर कुचलने की कोशिश की जाती है। वहीं, जो नेता पाला बदलकर सत्ता पक्ष के साथ चले जाते हैं, उनके सारे दाग रातों-रात धुल जाते हैं और मामले बंद कर दिए जाते हैं।
क्या था सांसद अरूप चक्रवर्ती के खिलाफ मामला?
बांकुरा से सांसद अरूप चक्रवर्ती के खिलाफ लोकपाल में भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग की शिकायत दर्ज कराई गई थी।
सीबीआई को सौंपी गई थी जांच: लोकपाल ने इन आरोपों की सत्यता जांचने के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को प्राथमिक जांच (PE) का आदेश दिया था।
दस्तावेजों और गवाहों की पड़ताल: जांच के दौरान सीबीआई ने 45 से अधिक अहम दस्तावेजों की जांच की और 6 प्रमुख गवाहों के बयान दर्ज किए। आरोपों में अवैध वित्तीय लेन-देन, स्थानीय लोगों को धमकाने और सरकारी मत्स्य पालन योजना व जमीन से जुड़ी कथित अनियमितताओं की बात कही गई थी।
सीबीआई की रिपोर्ट: सीबीआई ने 28 अगस्त को सौंपी अपनी शुरुआती रिपोर्ट में कहा कि चक्रवर्ती के खिलाफ लगाए गए सभी 6 आरोप निराधार हैं और उनका कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिला है।
लोकपाल ने खारिज की शिकायत: पूर्व जस्टिस ए.एम. खानविलकर की अध्यक्षता वाली लोकपाल की छह सदस्यीय पीठ ने मामले को 'मेरिट विहीन' (आधारहीन) मानते हुए पूरी तरह समाप्त कर दिया। साथ ही यह भी उल्लेख किया गया कि कथित घटनाएं उस समय की हैं जब वे सांसद नहीं थे।
बगावत के तीन महीने बाद मिली क्लीन चिट पर उठे सवाल
टीएमसी का कहना है कि यह महज कोई संयोग नहीं हो सकता। अरूप चक्रवर्ती ने तीन महीने पहले ही तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व से बगावत कर पार्टी से दूरी बना ली थी और बागी खेमे का हिस्सा बन गए थे।
टीएमसी नेताओं का तर्क है कि जब तक कोई नेता ममता बनर्जी और तृणमूल के साथ डटकर खड़ा रहता है, तब तक उस पर सीबीआई, ईडी और लोकपाल की तलवार लटकी रहती है।
जैसे ही कोई नेता बागी गुट या भाजपा के पाले में जाता है, उसे क्लीन चिट थमा दी जाती है।
बंगाल में राजनीतिक तापमान चरम पर
यह बयान ऐसे समय पर आया है जब चुनाव आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न 'जोड़ा फूल' को अंतरिम रूप से फ्रीज कर दिया है और ममता गुट व बागी गुट दोनों को नए अंतरिम नाम और सिंबल आवंटित किए हैं। आगामी विधानसभा उपचुनावों के प्रचार के बीच अभिषेक बनर्जी के इस आक्रामक हमले ने बंगाल की राजनीति में केंद्रीय एजेंसियों की निष्पक्षता और दल-बदल को लेकर एक बार फिर तीखी बहस छेड़ दी है।