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July 04 2026 02:37 am

हर हफ्ते ₹1.27 करोड़ छापने वाला मानव तस्करी का 'किंगपिन' पहुंचा ब्रिटेन, फर्जी पहचान के दम पर मांगी शरण

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ब्रिटेन की आव्रजन व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र को खुली चुनौती देते हुए इंसानों की अवैध तस्करी करने वाला एक अंतरराष्ट्रीय सरगना न सिर्फ देश की सीमा में घुस गया, बल्कि वहां शरणार्थी बनकर रहने की कानूनी पैंतरेबाज़ी भी करने लगा है। फ्रांस की अदालत से गंभीर अपराधों के लिए सजा पा चुका यह कुख्यात इराकी नागरिक, ट्वाना जमाल, ब्रिटेन के लीसेस्टरशायर स्थित ब्लैबी गांव में छिपकर रह रहा था। बीबीसी की एक खोजी रिपोर्ट के मुताबिक, इंग्लिश चैनल के रास्ते प्रवासियों को खतरनाक और अवैध तरीके से पार कराने वाले नेटवर्क का यह मास्टरमाइंड अब ब्रिटिश कानूनों की कमियों का फायदा उठा रहा है।

फ्रांसीसी जांच एजेंसियों ने साल 2016 में ट्वाना जमाल को दबोचा था, जिसे उस समय यूरोप का सबसे कामयाब और शातिर तस्कर माना गया था। वह उत्तरी फ्रांस के तटों से ब्रिटेन के लिए प्रवासियों का एक बहुत बड़ा अंडरग्राउंड नेटवर्क ऑपरेट करता था।

'पाशा' का सीक्रेट सिंडिकेट: प्याज और पनीर के ट्रकों का खेल

अभियोजन पक्ष की तफ्तीश के अनुसार, जमाल उत्तरी फ्रांस के ग्रैंड सिंथे रिफ्यूजी कैंप को अपना बेस बनाकर पूरा नेटवर्क चलाता था। वह ब्रिटेन में अवैध एंट्री की हसरत रखने वाले हर व्यक्ति से लगभग 4,500 पाउंड वसूलता था। इस अवैध धंधे से वह हर हफ्ते करीब 1 लाख पाउंड (लगभग 1 करोड़ 27 लाख भारतीय रुपये) का मुनाफा कमाता था। उसका सिंडिकेट हर महीने औसतन 80 प्रवासियों को अवैध रूप से ब्रिटिश सरजमीं पर पहुंचा रहा था।

जांच में सीमा सुरक्षा को चकमा देने का एक बेहद हैरान करने वाला तरीका सामने आया। जमाल प्रवासियों को उन ट्रकों में छिपाता था, जिनमें भारी मात्रा में प्याज और पनीर लदा होता था। इन खाद्य पदार्थों से निकलने वाली प्राकृतिक कार्बन डाइऑक्साइड गैस के कारण ब्रिटिश बॉर्डर पर तैनात हाई-टेक डिटेक्टर भी अंदर छिपे इंसानों की सांसों को ट्रेस नहीं कर पाते थे। इस शातिर दिमाग और खौफ के चलते शरणार्थी कैंपों में उसे लोग 'पाशा' (तुर्की भाषा में 'बॉस') कहकर बुलाते थे।

नकली नाम, अवैध धंधा और ब्रिटिश पुलिस को खुली चुनौती

लीसेस्टरशायर के एक छोटे से गांव में जमाल एक स्थानीय दुकान में बिना किसी वर्क परमिट के अवैध रूप से काम कर रहा था। वह बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस के बेखौफ गाड़ियां दौड़ा रहा था और एक नकली पहचान पत्र के सहारे रह रहा था। पकड़े जाने पर उसने खुद को पाक-साफ बताते हुए तस्करी के सभी आरोपों को खारिज कर दिया। उसका दावा था कि वह साल 2009 से ही ब्रिटेन में रह रहा है और उसका शरण (Asylum) का आवेदन अभी प्रोसेस में है।

हालांकि, एक खुफिया स्टिंग ऑपरेशन के दौरान रिकॉर्ड की गई फोन कॉल ने उसके झूठ का पर्दाफाश कर दिया। उस ऑडियो में जमाल को यह कहते हुए सुना गया, "इस शहर का बच्चा-बच्चा हमें जानता है, यह पूरा इलाका हमारा है।" उसने आगे घमंड से कहा कि वह यहां बहुत पैसा बना रहा है और उसे किसी कानून या पुलिस का कोई डर नहीं है, क्योंकि यहां उसे कोई हाथ भी नहीं लगा सकता।

ब्रिटिश इमिग्रेशन सिस्टम की खुली पोल

ब्रिटेन के मौजूदा सख्त आव्रजन (Immigration) नियमों के मुताबिक, अगर किसी विदेशी नागरिक को किसी दूसरे देश में एक साल या उससे अधिक की जेल की सजा मिली हो, तो उसका शरण का आवेदन तुरंत खारिज कर दिया जाता है। ट्वाना जमाल ने फ्रांस में पूरे 5 साल जेल की सलाखों के पीछे काटे हैं, इसके बावजूद ब्रिटिश सिस्टम में उसका केस लंबित पड़ा होना वहां की बैकग्राउंड सुरक्षा जांच पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

एक और बड़े ग्लोबल सरगना 'करदो रान्या' का भी भंडाफोड़

इस पूरी तफ्तीश के दौरान एक और खूंखार इंसानी तस्कर करदो जाफ का नाम भी उजागर हुआ है। जाफ को अफगानिस्तान से लेकर समूचे यूरोप और ब्रिटेन तक फैले एक विशाल अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी सिंडिकेट का कर्ताधर्ता माना जाता है। वह पुलिस को गुमराह करने के लिए 'करदो रान्या' नाम के फर्जी पासपोर्ट का इस्तेमाल करता था, जिससे उसके खिलाफ अंतरराष्ट्रीय अरेस्ट वारंट जारी करने में इंटरपोल और स्थानीय पुलिस को भारी मशक्कत करनी पड़ी।

मूल रूप से इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाले जाफ को लेकर 'चैथम हाउस' की 2024 की रिपोर्ट में भी आगाह किया गया था कि यह इलाका मानव तस्करी नेटवर्क का मुख्य केंद्र बन चुका है। एक अंडरकवर बातचीत में जाफ ने ब्रिटेन घुसपैठ के रास्ते गिनाते हुए दावा किया था, "फ्रांस में हमारे पास खुद के ट्रक, प्राइवेट बोट्स और विमान तक हैं। ब्रिटेन पहुंचने के सैकड़ों तरीके हैं, आप बस अपनी पसंद बताइए, वहां तक छोड़ना हमारा काम है।"

इस बड़े खुलासे के बाद ब्रिटिश सरकार और गृह मंत्रालय (Home Office) के गलियारों में खलबली मच गई है। गृह मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता ने बयान जारी कर सफाई दी है कि देश में शरण की मांग करने वाले हर शख्स को एक बेहद कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल से गुजरना होता है, जिसमें उनकी पहचान, बायोमेट्रिक्स और आपराधिक इतिहास की गहन जांच की जाती है। इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी गई है।