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September 06 2026 02:49 am

क्या बड़े पर्दे पर दहाड़ पाए 'कालीन भैया' और 'गुड्डू भैया'? जानिए कैसी है पंकज त्रिपाठी-दिव्येंदु की फिल्म का पहला रिव्यू

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फिल्म के रिलीज होते ही इंडस्ट्री के जाने-माने ट्रेड एनालिस्ट्स ने इस पर अपनी मुहर लगा दी है। तरण आदर्श ने अपने रिव्यू में इस फिल्म को एक 'पीक मास एंटरटेनर' करार दिया है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर लिखा है कि इस आइकॉनिक वेब सीरीज को बिग स्क्रीन का जो अपग्रेड मिला है, उसका रिजल्ट बेहद शानदार और दहाड़ने वाला है। यह एक सुपरहिट पैकेज है। सबसे खास बात यह है कि 'मिर्जापुर द मूवी' को देखकर ऐसा बिल्कुल भी महसूस नहीं होता कि किसी वेब सीरीज के पुराने एपिसोड्स को जबरदस्ती खींचकर बड़ा कर दिया गया हो। यह पूरी तरह से एक स्टैंडअलोन फिल्म की तरह महसूस होती है, जिसमें आपको थिएटर वाला फुल सिनेमाटिक एक्सपीरियंस मिलता है और इसका रॉ फ्लेवर दर्शकों को अपनी सीटों से बांधे रखता है।

दमदार राइटिंग और कड़क डायलॉग्स

किसी भी बेहतरीन फिल्म या सीरीज की असली ताकत उसकी कहानी और पटकथा में छिपी होती है। मिर्जापुर के इस फिल्मी संस्करण में भी राइटिंग डिपार्टमेंट ने कमाल कर दिखाया है। पुनीत कृष्णा द्वारा लिखी गई स्क्रिप्ट बेहद शार्प, क्रिस्प और पंचलाइन्स से भरपूर है। स्क्रीन पर होने वाला हर एक टकराव भयंकर तनाव से भरा हुआ है और किरदारों के बीच होने वाली हर बातचीत में एक ऐसा खास लोकल और देसी अंदाज झलकता है जो सीधे दिलों पर असर करता है। फिल्म के कई डायलॉग्स ऐसे हैं जो सिनेमा हॉल से बाहर निकलने के बाद भी लंबे समय तक आम लोगों की बातचीत और मीम्स का हिस्सा बने रहेंगे। राइटिंग का यही दमदार स्तर फिल्म को औसत से ऊपर उठाकर एक कल्ट क्लासिक की श्रेणी में खड़ा कर देता है।

रॉ, ब्रूटल और मैसी एक्शन का तड़का

मिर्जापुर यूनिवर्स की रीढ़ हमेशा से इसका खतरनाक एक्शन और खौफनाक माहौल रहा है। डायरेक्टर गुरमीत सिंह ने इस फिल्म में ड्रामा, एक्शन और ह्यूमर का एकदम सटीक और बेहतरीन संतुलन बिठाया है, वह भी मिर्जापुर के मूल डीएनए से बिना कोई खिलवाड़ किए। बड़े पर्दे पर आते ही इस दुनिया का एक्शन और ज्यादा इन्टेंस, ब्रूटल और मैसी हो गया है। थिएटर्स में फिल्म देखते वक्त कई ऐसे सीटी बजाने वाले मूवमेंट्स और सीन्स आते हैं जो दर्शकों को तालियां बजाने पर मजबूर कर देते हैं। हिंसा और रोमांच का यह कॉम्बिनेशन बड़े पर्दे के विजुअल मीडियम पर जादू की तरह काम करता है।

फिल्म का नेगेटिव पॉइंट और सेकंड हाफ

हर फिल्म की तरह इसमें भी कुछ छोटी-कमियां या नेगेटिव पॉइंट्स देखने को मिले हैं। ट्रेड एनालिस्ट्स के मुताबिक, फिल्म का म्यूजिकल स्कोर कहानी के साथ कुछ जगहों पर ठीक से पिरोया गया है, लेकिन गानों के लिए यहां बहुत ज्यादा स्कोप नहीं था। हालांकि बैकग्राउंड स्कोर काफी मजबूत है और माहौल को बांधे रखता है। नेगेटिविटी की बात करें तो सेकंड हाफ में फिल्म थोड़ी सी सुस्त पड़ती है और इसकी रफ्तार में थोड़ी गिरावट महसूस होती है। हालांकि, मेकर्स ने इस समस्या से बहुत अच्छे से पार पाया है। जैसलमेर के शानदार और विशाल रेत के टीलों के बीच शूट किया गया प्री-क्लाइमेक्स से लेकर क्लाइमेक्स तक का पूरा हिस्सा इतना रोमांचक और हैरान करने वाला है कि दर्शक अपनी पलकें झपकाना भूल जाते हैं। सेकंड हाफ थोड़ा स्ट्रेच जरूर लगता है और इसमें थोड़ी सी ट्रिमिंग की गुंजाइश थी, लेकिन अंत तक आते-आते फिल्म आपको पूरी तरह संतुष्ट कर देती है। फिल्म का अंत और गुड्डू पंडित व मुन्ना त्रिपाठी के बीच का सीक्वेंस काफी हंसाने वाला है और साथ ही यह एक बड़ा हिंट भी दे जाता है कि मिर्जापुर यूनिवर्स का अगला चैप्टर पहले से ही प्लान किया जा रहा है।

स्टार कास्ट की ताबड़तोड़ और धमाकेदार परफॉर्मेंस

फिल्म की सबसे बड़ी यूएसपी इसकी भारी-भरकम और मंझी हुई स्टार कास्ट है, जिन्होंने अपने किरदारों में जान फूंक दी है। पंकज त्रिपाठी हमेशा की तरह अपने 'कालीन भैया' के रूप में एक्सेप्शनल और बेजोड़ नजर आए हैं। वहीं, अली फजल ने 'गुड्डू पंडित' के रूप में एक बार फिर फैंटास्टिक परफॉर्मेंस दी है। दिव्येंदु की वापसी ने स्क्रीन पर आग लगा दी है और उनका काम एक्सीलेंट है। इसके अलावा रवि किशन शानदार दिखे हैं, जितेंद्र कुमार का काम सुपरब है, अभिषेक बनर्जी बहुत अच्छे लगे हैं, मोहित मलिक फर्स्ट रेट फॉर्म में हैं, और राजेश तायलांग, प्रमोद पाठक व सुशांत सिंह ने अपने किरदारों को बेहद फिलाल और फ्लॉलेस तरीके से निभाया है। रसिका दुग्गल का किरदार बेहद इंट्रेस्टिंग है और कहानी में एक ऐसा जबरदस्त ट्विस्ट लेकर आता है जहां वह पूरी तरह शाइन करती हैं। सोनल चौहान, शीबा चड्ढा और श्रेया पिलगावंकर ने भी अपने-अपने रोल्स में पूरा न्याय किया है और फिल्म की ओवरऑल ग्रेविटी को मजबूत किया है।

रेजर-शार्प राइटिंग, किलर डायलॉग्स, बेहतरीन स्टार कास्ट की दमदार परफॉर्मेंस, हाई-वोल्टेज ड्रामा और एक्सप्लोजिव एक्शन का यह मिश्रण 'मिर्जापुर' के तमाम चाहने वालों के लिए किसी बड़े फेस्टिव ट्रीट से कम नहीं है। यदि आप भी इस क्राइम थ्रिलर ड्रामा और मिर्जापुर के खौफनाक अंडरवर्ल्ड के फैन हैं, तो यह फिल्म आपके लिए थिएटर में देखने लायक एक परफेक्ट वीकेंड वॉच साबित होने वाली है।