EOS-05 की ऐतिहासिक सफलता के बाद गगनयान की बारी; इसी साल लॉन्च होगा पहला मानवरहित मिशन
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अत्याधुनिक अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट EOS-05 को निर्धारित कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित कर एक नया इतिहास रच दिया है। इस बड़ी और गौरवशाली सफलता के बाद इसरो ने देश के सबसे महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष अभियान 'गगनयान' (Gaganyaan Mission) को लेकर अपने अगले रोडमैप का औपचारिक ऐलान कर दिया है।
इसरो प्रमुख डॉ. वी. नारायणन ने श्रीहरिकोटा से स्पष्ट किया है कि अंतरिक्ष एजेंसी इस कैलेंडर वर्ष (2026) के समाप्त होने से पहले ही गगनयान परियोजना के तहत पहला मानवरहित मिशन (First Uncrewed Mission) लॉन्च करने के लिए पूरी तरह से तैयार है और इस पर काम बेहद तेज व व्यवस्थित गति से चल रहा है।
मानवरहित मिशन क्यों है जरूरी और क्या परखा जाएगा?
गगनयान मिशन भारत का पहला मानवयुक्त अंतरिक्ष कार्यक्रम है, जिसके तहत भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों (गगनयात्रियों) को पृथ्वी की निचली कक्षा (Low Earth Orbit - लगभग 400 किमी की ऊंचाई) में भेजकर सुरक्षित वापस धरती पर लाया जाएगा। अंतरिक्ष यात्रियों को भेजने से पहले सुरक्षा मानकों की अंतिम जांच के लिए मानवरहित परीक्षण उड़ान अनिवार्य है:
क्रू मॉड्यूल की कार्यप्रणाली: इस पहली उड़ान में कोई इंसान सवार नहीं होगा, बल्कि 'व्योममित्र' (हाफ-ह्यूमनॉइड रोबोट) या सेंसर-युक्त प्रणालियों के जरिए अंतरिक्ष के दबाव, तापमान और जीवन रक्षक प्रणालियों की वास्तविक कार्यप्रणाली को रिकॉर्ड किया जाएगा।
री-एंट्री और थर्मल शील्ड: अंतरिक्ष की कक्षा से धरती के वायुमंडल में दोबारा प्रवेश (Re-entry) के दौरान उत्पन्न होने वाले अत्यधिक घर्षण और भीषण गर्मी को झेलने की क्रू मॉड्यूल की क्षमता का परीक्षण होगा।
पैराशूट और स्प्लैशडाउन: मिशन की सबसे संवेदनशील कड़ी अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षित वापसी है। समुद्र में सुरक्षित लैंडिंग (Splashdown) के लिए मॉड्यूल की रफ्तार को धीमा करने वाले विशाल पैराशूट सिस्टम के समन्वित संचालन को जांचा जाएगा।
'कड़ी मेहनत का इनाम और ज्यादा काम': 6 और बड़े लॉन्च की तैयारी
इसरो प्रमुख वी. नारायणन ने बताया कि जीएसएलवी-एफ17/ईओएस-05 का सफल प्रक्षेपण चालू वित्त वर्ष में इसरो की पहली बड़ी कामयाबी है। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष विज्ञान में एक सफलता के बाद जिम्मेदारी और बढ़ जाती है।
उद्योग जगत के साथ समन्वय: इसरो देश के प्रमुख एयरोस्पेस उद्योगों, रक्षा प्रतिष्ठानों और वैज्ञानिक संस्थानों के साथ मिलकर गगनयान के हार्डवेयर और सब-सिस्टम्स को अंतिम रूप दे रहा है।
चालू वित्त वर्ष में 6 नए अभियान: गगनयान की पहली मानवरहित उड़ान के अलावा इसरो इस वित्त वर्ष में NVS-03 नेविगेशन उपग्रह समेत छह और प्रमुख अंतरिक्ष अभियानों को अंजाम देने का लक्ष्य लेकर चल रहा है।
EOS-05 ने मिटाया पिछली नाकामियों का दाग, भारत बना तीसरा देश
शुक्रवार को GSLV-F17 के जरिए लॉन्च किया गया 2,367 किलोग्राम वजनी EOS-05 उपग्रह जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट में 24 घंटे पृथ्वी की निगरानी रखने की अभूतपूर्व क्षमता रखता है। अंतरिक्ष से पृथ्वी के विस्तृत भू-भाग पर लगातार नजर रखने की यह दुर्लभ तकनीक हासिल करने वाला भारत अब अमेरिका और चीन के बाद दुनिया का तीसरा देश बन गया है।
अगस्त 2021 में क्रायोजेनिक चरण की विफलता (GSLV-F10) और जनवरी 2026 में पीएसएलवी मिशन में आई तकनीकी दिक्कतों के बाद इसरो के वैज्ञानिकों ने जो गहन तकनीकी समीक्षा और सुधार किए थे, यह प्रक्षेपण उसकी शानदार सफलता की गवाही देता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस ऐतिहासिक सफलता की सराहना करते हुए कहा कि इसरो ने अपनी नवाचार और तकनीकी दक्षता से वैश्विक अंतरिक्ष पटल पर भारत की साख को और मजबूत किया है। अब पूरे देश और दुनिया के वैज्ञानिकों की निगाहें इस साल के अंत में होने वाली गगनयान की पहली मानवरहित अंतरिक्ष उड़ान पर टिकी हैं।