Hanuman Ansh Success: डायरेक्टर विशाल चतुर्वेदी ने बॉलीवुड पर निकाला गुस्सा
साउथ सिनेमा से लेकर बॉलीवुड तक अपनी सफलता के झंडे गाड़ने वाली हालिया रिलीज फिल्म 'हनुमान अंश' बॉक्स ऑफिस पर लगातार नए रिकॉर्ड बना रही है। फिल्म ने अपनी शानदार कमाई और वर्ड ऑफ माउथ के दम पर यह साबित कर दिया है कि अगर कंटेंट दमदार हो, तो दर्शक खुद-ब-खुद सिनेमाघरों की तरफ खिंचे चले आते हैं। हालांकि, इस ब्लॉकबस्टर सफलता के बीच फिल्म के निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने बॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्री की कार्यशैली और अंदरूनी राजनीति पर तीखा प्रहार किया है। डायरेक्टर ने खुलकर यह बात साझा की है कि कैसे उनकी फिल्म को रिलीज से पहले हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के बड़े दिग्गजों और जानकारों से कोई भी समर्थन या सहयोग नहीं मिला था, बल्कि उन्हें लगातार हतोत्साहित करने का प्रयास किया गया था।
फिल्म की शुरुआत बेहद साधारण तरीके से मात्र 10 लाख रुपये के पहले दिन के कलेक्शन से हुई थी, लेकिन धीरे-धीरे दर्शकों के प्यार और सकारात्मक प्रतिक्रिया के चलते इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली और अब यह 72.88 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर चुकी है। इस उल्लेखनीय सफर के दौरान निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने एक इंटरव्यू में बताया कि जब उनकी फिल्म रिलीज होने वाली थी, तब उन्हें किस प्रकार की प्रशासनिक और सिनेमाई बाधाओं का सामना करना पड़ा था। मल्टीप्लेक्स और थिएटर्स में बड़ी फिल्मों को प्राथमिकता दिए जाने के चलते 'हनुमान अंश' के शोज की संख्या में भारी कटौती की गई थी। आलम यह था कि फिल्म के शोज 250 से घटकर महज 25 रह गए थे, जिससे मेकर्स के सामने एक बड़ा संकट खड़ा हो गया था। इस कठिन समय में इंडस्ट्री के किसी भी बड़े नाम ने आगे आकर निर्देशक या उनकी टीम का समर्थन नहीं किया।
बॉलीवुड के दोहरे रवैये पर फूटा गुस्सा और सिनेमाई सफर की चुनौतियां
विशाल चतुर्वेदी ने आगे बातचीत करते हुए बॉलीवुड इंडस्ट्री के दोगलेपन पर भी गहरी नाराजगी जाहिर की। जब उनसे यह सवाल किया गया कि क्या उन्हें रिलीज से पहले बॉलीवुड से किसी प्रकार का सपोर्ट मिला था, तो वह खुलकर अपनी हंसी नहीं रोक पाए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि आज जब फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल हो चुकी है और चारों तरफ इसकी चर्चा हो रही है, तो इंडस्ट्री के कई जाने-माने लोगों के फोन कॉल्स आ रहे हैं और बधाइयां मिल रही हैं। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि वे किसी का नाम सार्वजनिक रूप से नहीं लेना चाहते, सिवाय फिल्मकार मधुर भंडारकर के, जिन्होंने बिना किसी पूर्व मांग के फिल्म की खुलकर सराहना की। निर्देशक ने बाकी उन लोगों का नाम लेने से इनकार कर दिया जिनसे उन्होंने मुश्किल वक्त में मदद की गुहार लगाई थी, लेकिन उन्होंने उस वक्त कोई सुधि नहीं ली थी। विशाल का मानना है कि यह फिल्म इंडस्ट्री ऐसे लोगों से भरी पड़ी है जो खुद अपनी प्राथमिकताओं को लेकर असमंजस में रहते हैं। इंडस्ट्री में दो तरह के लोग मौजूद हैं, एक वे जो पूरी शिद्दत और पैशन के साथ सिनेमा बनाना चाहते हैं, और दूसरे वे लोग जो बिना किसी विजन के सिर्फ तुक्का आजमाने आते हैं और दूसरों को यह ज्ञान देते रहते हैं कि कौन सी फिल्म चलेगी और कौन सी नहीं।
इस फिल्म की सफलता में आध्यात्मिक गुरु नीम करोली बाबा के जीवन और उनके भक्तों की आस्था का बड़ा हाथ रहा है। फिल्म में अभिनेता शोभिनव सत्य ने नीम करोली बाबा का किरदार इतनी सहजता और प्रामाणिकता के साथ निभाया है कि दर्शक थिएटर से बाहर निकलते वक्त भावुक हो जाते हैं। इसके अलावा बॉलीवुड के तमाम बड़े कलाकारों ने भी इस फिल्म की यूएसपी को पहचाना और इसकी सराहना की। जाने-माने निर्देशक मधुर भंडारकर ने थिएटर में इस फिल्म को देखने के बाद इसकी जमकर तारीफ की थी और इसे एक सच्चा सिनेमाटिक मैजिक करार दिया था। उन्होंने विशेष रूप से यह रेखांकित किया था कि कैसे दर्शक अपनी सीटों से चिपके रहे और विशाल चतुर्वेदी का निर्देशन इस कहानी के साथ पूरी तरह न्याय करता है। वहीं, अभिनेत्री कंगना रनौत ने भी सोशल मीडिया पर फिल्म की भव्य प्रशंसा करते हुए इसे एक 'सत्संग' की संज्ञा दी थी और दर्शकों से आग्रह किया था कि वे अपनी रोजमर्रा की तनाव भरी दिनचर्या को छोड़कर इस आध्यात्मिक व सिनेमाई अनुभव का हिस्सा बनने के लिए थिएटर्स का रुख करें।
विशाल चतुर्वेदी द्वारा लिखित और निर्देशित यह फिल्म इस बात का एक जीवंत प्रमाण बन चुकी है कि यदि आपकी कहानी जमीन से जुड़ी हुई है और उसमें सच्ची श्रद्धा और मेहनत शामिल है, तो बड़ी से बड़ी बाधाओं को भी पार किया जा सकता है। फिल्म की बॉक्स ऑफिस यात्रा भले ही 10 लाख रुपये से शुरू हुई थी, लेकिन आज यह लगभग 73 करोड़ रुपये के क्लब में शामिल होने की कगार पर है और दुनिया भर में इसके प्रभाव की चर्चा हो रही है। यह घटनाक्रम बॉलीवुड की उस पुरानी कार्यशैली और संकीर्ण सोच पर एक बड़ा तमाचा है जो हमेशा से नए और स्वतंत्र निर्देशकों को उभरने से रोकने का प्रयास करती रही है। 'हनुमान अंश' की यह शानदार सफलता आने वाले समय में अन्य युवा फिल्ममेकर्स को अपनी कहानियों को बिना डरे बड़े पर्दे पर उतारने के लिए प्रेरित करती रहेगी।