Kaiserbagh fish market accident: 100 साल पुराने पीपल का पेड़ गिरा, एक की मौत और कई घायल

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India News Live,Digital Desk : कैसरबाग मछली मंडी में मंगलवार दोपहर करीब एक बजे एक सौ साल पुराने पीपल के पेड़ के गिरने से सनसनी फैल गई। यह पेड़ एक मकान के बिल्कुल पास था। पेड़ के गिरने से मकान भी ढह गया और उसके साथ लगी टीन शेड वाली दस से ज्यादा दुकानों पर भारी नुकसान हुआ।

स्थानीय लोग तुरंत मलबे में फंसे लोगों को निकालने में जुट गए। कुछ ही समय में दमकलकर्मी और एसडीआरएफ की टीम भी मौके पर पहुँच गई। सभी की मदद से करीब दस लोगों को मलबे से बाहर निकाला गया, जिनमें से पांच को गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया।

बलरामपुर अस्पताल में डॉक्टरों ने 70 वर्षीय मछली विक्रेता रामू देवनाथ को मृत घोषित किया। अन्य घायलों का इलाज चल रहा है। सूचना मिलते ही उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक मौके पर पहुंचे और राहत एवं बचाव कार्य का इंतजाम कराया। महापौर सुषमा खर्कवाल और अन्य प्रशासनिक अधिकारी भी घटनास्थल पर मौजूद रहे।

प्रशासनिक लापरवाही उजागर

घटना ने यह सवाल भी खड़ा किया कि मकानों के पास खतरे वाले पेड़ों को कटवाने के लिए शिकायतों के बावजूद कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई। विधायक रविदास मेहरोत्रा ने नगर निगम को जिम्मेदार ठहराया और मृतक परिवार को एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग की।

परिवार की कहानी

जिस मकान के पास पेड़ था, वह शेखू का घर है। शेखू ने बताया कि परिवार के साथ वह घर में मौजूद थे कि अचानक पेड़ गिरने लगा। उन्होंने माता-पिता को लेकर बाहर भागने की कोशिश की। पलटकर देखा तो मकान और पेड़ साथ में टीन शेड वाली दुकानों पर गिर चुके थे। चीख-पुकार सुनकर स्थानीय लोग मदद के लिए दौड़े।

राहत एवं बचाव

मौके पर दमकलकर्मी और एसडीआरएफ की टीम ने आरी से पेड़ काटकर घायलों को निकाला। मलबे से निकाले गए लोगों में मो. रिजवान, मो. शोएब, मो. अरमान रसूल और अभिषेक यादव शामिल हैं। स्थानीय निवासी अनुज सोनकर ने बताया कि मंगलवार को मछली की दुकानों में कम लोग आए थे, वरना घायलों की संख्या 50 से ज्यादा हो सकती थी।

शिकायतों के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं

शेखू की बहन सरिता ने बताया कि पेड़ को काटने के लिए तीन बार नगर निगम में शिकायत की गई थी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। सरिता ने कहा, “एक पल में घर और सारी संपत्ति खत्म हो गई।”

मछली विक्रेता रामू देवनाथ

हादसे में जान गंवाने वाले रामू देवनाथ को सभी बंगाली दादा के नाम से जानते थे। वे बड़े मछली विक्रेता थे और पश्चिम बंगाल व अन्य स्थानों से मछलियाँ लेकर आते थे। राजधानी के बंगाली परिवार मछली खरीदने उनके पास ही जाते थे। कई दुकानदारों को भी इस हादसे में नुकसान हुआ है।