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October 18 2026 12:29 pm

Kaal Bhairav ​​Jayanti 2025 : भय, पाप और नकारात्मकता से मुक्ति का दुर्लभ अवसर

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India News Live,Digital Desk : हिंदू धर्म में काल भैरव जयंती का विशेष महत्व बताया गया है। यह दिन भगवान शिव के उग्र और रौद्र रूप — भगवान काल भैरव — को समर्पित होता है। इसे भैरव अष्टमी या कालाष्टमी भी कहा जाता है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव ने काल भैरव के रूप में अवतार लेकर अधर्म का नाश किया था। इसलिए इस दिन की पूजा से व्यक्ति के जीवन से भय, पाप और नकारात्मक शक्तियाँ दूर होती हैं।

काल भैरव जयंती 2025 कब है?

हिंदू पंचांग के अनुसार, अष्टमी तिथि 11 नवंबर 2025 (मंगलवार) सुबह 11:08 बजे से शुरू होकर
12 नवंबर 2025 (बुधवार) सुबह 10:58 बजे तक रहेगी।
उदया तिथि के अनुसार, काल भैरव जयंती 12 नवंबर 2025, बुधवार को मनाई जाएगी।

काल भैरव जयंती का महत्व

भगवान काल भैरव को काशी का कोतवाल कहा जाता है। यह तिथि साहस, सुरक्षा और आत्मबल का प्रतीक मानी जाती है।
इस दिन उनकी आराधना से—

  • जीवन से भय और शत्रु बाधाएँ समाप्त होती हैं।
  • राहु, केतु और शनि दोष का प्रभाव कम होता है।
  • साधक को तंत्र-मंत्र साधना में सिद्धि प्राप्त होती है।
  • व्यक्ति के चारों ओर एक सुरक्षा कवच बनता है जो नकारात्मक ऊर्जा से बचाता है।

काल भैरव जयंती पर करें ये शुभ कार्य

  1. दीपदान करें – सरसों के तेल का दीपक जलाकर भगवान भैरव का ध्यान करें।
  2. भोग लगाएं – भैरव बाबा को जलेबी, उड़द दाल के पकौड़े और नारियल का भोग अर्पित करें।
  3. मंत्र जाप करें –
    “ॐ काल भैरवाय नमः” या
    “ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरुकुरु बटुकाय ह्रीं”
    मंत्र का 108 बार जाप करना शुभ माना जाता है।
  4. भैरव अष्टक का पाठ करें – इससे भय दूर होता है और मन में स्थिरता आती है।

काल भैरव की कृपा पाने के उपाय

  • कुत्ते को रोटी खिलाना अत्यंत शुभ माना जाता है, क्योंकि कुत्ता भैरव बाबा का वाहन है।
  • पूजा के बाद गरीबों को अन्नदान करें।
  • रात में भैरव जी के नाम से तेल का दीपक जलाकर जीवन की बाधाएँ दूर करें।