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August 16 2026 01:21 am

जम्मू-कश्मीर के तेज गेंदबाज आकिब नबी ने रचा इतिहास: भारत की टेस्ट टीम में जगह बनाने वाले पहले क्रिकेटर बने, संघर्ष से सफलता तक की कहानी

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घरेलू क्रिकेट में अपने शानदार प्रदर्शन के दम पर दाएं हाथ के तेज गेंदबाज आकिब नबी ने भारतीय क्रिकेट में एक नया अध्याय लिख दिया है। बारामूला के शीरी गांव के रहने वाले आकिब नबी जम्मू-कश्मीर के इतिहास के पहले ऐसे क्रिकेटर बन गए हैं, जिन्हें भारत की टेस्ट टीम में जगह मिली है। श्रीलंका दौरे के लिए चुनी गई भारतीय टीम में उनका चयन न सिर्फ उनके वर्षों के कड़े संघर्ष का परिणाम है, बल्कि पूरे जम्मू-कश्मीर के युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा है।

जब पिता की जिद और मैकग्रा के शिविर के बीच अटकी थी राह

आकिब नबी का यहां तक पहुंचना आसान नहीं था। जब उन्हें बीसीसीआई के तेज गेंदबाजी शिविर में हिस्सा लेने का मौका मिला, तब वह बायो-साइंस विषय से 12वीं बोर्ड की परीक्षा की तैयारी कर रहे थे।

शिक्षक पिता की चिंता: उनके पिता गुलाम नबी डार एक सरकारी स्कूल में शिक्षक थे और शिक्षा को सर्वोपरि मानते थे। वह चाहते थे कि उनका बेटा पढ़ाई पर ध्यान दे और क्रिकेट के चक्कर में अपना भविष्य दांव पर न लगाए।

क्लब कप्तान जुबैर की अहम भूमिका: नबी के पहले क्लब कप्तान जुबैर डार ने उस दौर को याद करते हुए बताया कि उन्होंने उनके पिता को काफी समझाया कि ऑस्ट्रेलिया के महान तेज गेंदबाज ग्लेन मैकग्रा से गेंदबाजी सीखने का यह मौका गंवाना नहीं चाहिए।

हवाई जहाज का सफर: आखिरकार पिता राजी हुए और एक सरकारी शिक्षक होने के बावजूद करीब 10,000 रुपये की व्यवस्था कर बेटे को ट्रेन की बजाय हवाई जहाज से चेन्नई भेजा। आज यह फैसला नबी की जिंदगी का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ है।

बिना स्पाइक्स के मैदान पर उतरने से लेकर सादगी तक की अनसुनी दास्तान

आकिब नबी से जुड़े शुरुआती दिन उनकी मासूमियत और खेल के प्रति दीवानगी की गवाही देते हैं:

बिना स्पाइक्स के गेंदबाजी: श्रीनगर के प्रसिद्ध शेर-ए-कश्मीर स्टेडियम में जब वह पहली बार जिला स्तर का मैच खेलने पहुंचे, तो उन्हें पता ही नहीं था कि गेंदबाजी के लिए स्पाइक्स वाले जूते पहनने होते हैं। उन्होंने सामान्य जूते पहन रखे थे और पहली ही गेंद पर उनका पैर फिसल गया। इसके बाद सीनियर खिलाड़ियों ने उन्हें अपनी स्पाइक्स उधार दी थीं।

दो-दो ट्रायल में हिस्सा: अपनी मासूमियत का परिचय देते हुए उन्होंने एक बार जम्मू-कश्मीर क्रिकेट संघ (JKCA) के दो अलग-अलग गुटों द्वारा आयोजित चयन शिविरों में एक ही दिन हिस्सा ले लिया था।

सफलता के बाद भी सादगी बरकरार: कुछ महीने पहले आईपीएल में रिकॉर्ड अनुबंध मिलने और अब भारतीय टेस्ट टीम में चयन के बावजूद आकिब की सादगी में कोई बदलाव नहीं आया है। उनके करीबी दोस्त बताते हैं कि वह आज भी बेहद सरल, जमीन से जुड़े और अपने काम से काम रखने वाले इंसान हैं।