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September 23 2026 12:07 am

भारत के खिलाफ 2 रन से सांसें रोक देने वाली हार के बाद बोले जापानी कप्तान: 'दुनिया की सबसे मजबूत टीम को आखिरी गेंद तक ले जाना गर्व की बात'

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एशियाई खेलों के क्रिकेट महाकुंभ में एक ऐसा अप्रत्याशित और सांसें थाम देने वाला मुकाबला देखने को मिला, जिसकी किसी भी खेल प्रेमी ने पहले से कल्पना नहीं की थी। भारी बारिश के चलते 5-5 ओवर तक सीमित किए गए इस रोमांचक मुकाबले में मजबूत और विश्व चैंपियन भारतीय क्रिकेट टीम को नवोदित जापानी क्रिकेट टीम से अप्रत्याशित और दांतों तले उंगली दबाने वाली टक्कर का सामना करना पड़ा। टीम इंडिया ने पहले बल्लेबाजी करते हुए निर्धारित 5 ओवरों में संघर्ष करते हुए 32 रन बनाए थे, जिसके जवाब में जापान की अनुशासित और साहसी टीम ने पूरे 30 रन ठोक दिए और भारत ने यह मुकाबला महज 2 रन के बेहद मामूली अंतर से बाल-बाल जीता। हार के जबड़े से जीत छीनने के बाद भले ही अंक तालिका में जीत भारत के नाम दर्ज हुई हो, लेकिन मैदान पर असल दिल जापान के रणबांकुरों ने जीता। मैच के बाद आयोजित प्रेस वार्ता में जापान के कप्तान केंडल काडोवाकी-फ्लेमिंग ने भावुक होते हुए कहा कि भारत जैसी दुनिया की सर्वश्रेष्ठ टीम को मुकाबले की आखिरी गेंद तक ले जाना जापानी क्रिकेट के इतिहास का सबसे गौरवशाली क्षण है।

जब फासला सिर्फ 2 रन का हो तो हार पचाना मुश्किल: भावनाओं के ज्वार के बीच कप्तान ने जताया टीम पर गर्व

जापानी कप्तान केंडल काडोवाकी-फ्लेमिंग ने मैच के बाद अपनी आंतरिक भावनाओं को साझा करते हुए कहा कि जब कोई मुकाबला इतना ज्यादा करीबी हो जाता है और जीत केवल एक बाउंड्री के फासले पर छूट जाती है, तो उस हार को दिल से स्वीकार करना किसी भी खिलाड़ी के लिए बेहद दर्दनाक और कठिन होता है। ड्रेसिंग रूम में उस वक्त हर खिलाड़ी की आंखें नम थीं और भावनाएं अपने चरम पर थीं क्योंकि वे एक ऐसा करिश्मा करने के मुहाने पर खड़े थे जो विश्व क्रिकेट के पन्नों में हमेशा के लिए अमर हो जाता। इसके बावजूद, उन्होंने बेहद फख्र से कहा कि उन्हें अपनी टीम के ग्यारह खिलाड़ियों और उनके जज्बे पर अटूट गर्व है। फ्लेमिंग ने कहा कि उनकी नजर में भारत मौजूदा दौर की सबसे खतरनाक और संतुलित सफेद गेंद की टीम है, और उस वैश्विक महाशक्ति को अंतरराष्ट्रीय मंच पर आखिरी गेंद तक पसीने छुड़ाने के लिए मजबूर कर देना यह साबित करता है कि जापान में क्रिकेट का भविष्य कितना उज्ज्वल और मजबूत है।

श्रेयस अय्यर द्वारा जापानी क्रिकेट की तारीफ सुनना अवास्तविक अनुभव: उभरते देश के लिए बहुत बड़ा सम्मान

मैच के बाद भारतीय टीम के स्टार बल्लेबाज और अनुभवी खिलाड़ी श्रेयस अय्यर ने भी मीडिया के सामने जापानी टीम के अनुशासन, फील्डिंग और आक्रामक रवैये की खुले दिल से प्रशंसा की। श्रेयस अय्यर के बयानों का हवाला देते हुए कप्तान केंडल काडोवाकी-फ्लेमिंग ने कहा कि एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय दिग्गज से अपनी टीम की तरक्की और खेल कौशल की तारीफ सुनना उनके लिए किसी सपने के सच होने जैसा है। उन्होंने कहा कि जब श्रेयस अय्यर जैसा स्थापित भारतीय क्रिकेटर यह स्वीकार करता है कि जापान के खिलाफ मैच जीतना उनके लिए बेहद मुश्किल और तनावपूर्ण रहा, तो यह जापानी खिलाड़ियों के आत्मविश्वास को सातवें आसमान पर पहुंचा देता है। फ्लेमिंग ने मुस्कुराते हुए कहा कि यह सब कुछ इतना अवास्तविक लगता है कि इस पर आसानी से यकीन कर पाना भी मुश्किल हो रहा है, लेकिन यही वैश्विक क्रिकेट की खूबसूरती है जहां खेल सीमाओं को मिटा देता है।

 सुजुकी, बीसीसीआई और जापान क्रिकेट एसोसिएशन को दिल से शुक्रिया: मैदानकर्मियों की रातभर की मेहनत रंग लाई

जापानी कप्तान ने इस ऐतिहासिक और रोमांचक मुकाबले के सफल आयोजन के लिए उन सभी संस्थाओं और व्यक्तियों के प्रति आभार व्यक्त किया जिन्होंने पर्दे के पीछे रहकर अथक परिश्रम किया। फ्लेमिंग ने वैश्विक ऑटोमोबाइल दिग्गज सुजुकी, भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) और जापान क्रिकेट एसोसिएशन (JCA) का विशेष रूप से धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि इन तीनों संस्थाओं के सक्रिय समर्थन, बेहतरीन तालमेल और संसाधन उपलब्ध कराने के बिना यह मैच किसी भी परिस्थिति में संभव नहीं हो पाता। इसके साथ ही उन्होंने ग्राउंड स्टाफ और क्यूरेटरों की सराहना करते हुए बताया कि भारी बारिश के बाद मैदान को सुखाने और मैच खेलने लायक बनाने के लिए ग्राउंड्समैन ने पूरी रात बिना सोए पसीना बहाया। मैदानकर्मियों की इस निस्वार्थ मेहनत की बदौलत ही दोनों टीमों को 5-5 ओवर का एक ऐतिहासिक मुकाबला खेलने का मौका मिल सका।

 जापान की महिला क्रिकेट टीम ने भी निभाई अहम भूमिका: पूरे देश के क्रिकेट परिवार की साझा जीत

कप्तान केंडल काडोवाकी-फ्लेमिंग ने मैच के आयोजन में जापान की महिला क्रिकेट टीम के निस्वार्थ योगदान को भी गर्व से रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि जापान की राष्ट्रीय महिला टीम की खिलाड़ी भी स्टेडियम में मौजूद थीं और वे केवल दर्शक बनकर तालियां नहीं बजा रही थीं, बल्कि मैच के संचालन, लॉजिस्टिक्स और ग्राउंड अरेंजमेंट्स में सक्रिय रूप से हाथ बंटा रही थीं। फ्लेमिंग ने कहा कि यही वजह है कि वे इस ऐतिहासिक प्रदर्शन का श्रेय केवल प्लेइंग इलेवन को नहीं देना चाहते, बल्कि यह पूरे जापानी क्रिकेट समुदाय, सहयोगी स्टाफ, महिला टीम और बोर्ड के प्रत्येक सदस्य की सामूहिक मेहनत और समर्पण का नतीजा है। यह एकजुटता दर्शाती है कि जापान में खेल संस्कृति कितनी तेजी से परिपक्व हो रही है।

अक्षर पटेल, वाशिंगटन सुंदर और रवि बिश्नोई की फिरकी के सामने योजना: 6-7 रन प्रति ओवर का था लक्ष्य

मैच की तकनीकी रणनीति का खुलासा करते हुए कप्तान फ्लेमिंग ने बताया कि 33 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए उनकी टीम के अंदर गजब का उत्साह और सकारात्मक माहौल था। टीम का हर बल्लेबाज यही मानकर क्रीज पर उतरा था कि टी-20 के इस छोटे प्रारूप में कुछ भी असंभव नहीं है। हालांकि चुनौती बेहद कठिन थी क्योंकि भारत के पास अंतरराष्ट्रीय स्तर के विश्वस्तरीय स्पिन गेंदबाज मौजूद थे। अक्षर पटेल, वाशिंगटन सुंदर और मिस्ट्री लेग स्पिनर रवि बिश्नोई के रूप में भारत का स्पिन आक्रमण किसी भी बल्लेबाजी क्रम को ध्वस्त करने में सक्षम था, और पिच भी धीमी होकर घूमती हुई गेंदों के लिए काफी मददगार साबित हो रही थी। फ्लेमिंग ने कहा कि उन्हें प्रति ओवर लगभग 6 से 7 रन बनाने की आवश्यकता थी, जो बहुत बड़ा लक्ष्य नहीं था। टीम की स्पष्ट रणनीति थी कि स्पिनरों के खिलाफ हड़बड़ी नहीं दिखानी है और अगर बीच के ओवरों में दो या तीन गेंदें भी बल्ले के बीचों-बीच कनेक्ट होकर सीमा रेखा पार कर गईं, तो मैच का रुख पूरी तरह जापान की तरफ मुड़ जाएगा।

 आखिरी ओवर का हाई-वोल्टेज ड्रामा: 6 गेंदों पर चाहिए थे 8 रन, अक्षर पटेल के अनुभव ने भारत को बचाया

लक्ष्य का पीछा करते हुए जापानी बल्लेबाजों ने सटीक रनिंग बिटवीन द विकेट्स और बीच-बीच में प्रहार करते हुए मैच को अंतिम ओवर के रोमांच तक खींच लिया। मैच के अंतिम 6 गेंदों पर जापान को ऐतिहासिक जीत दर्ज करने के लिए केवल 8 रनों की दरकार थी और स्ट्राइक पर उनके सेट बल्लेबाज मौजूद थे। भारतीय खेमे में बेचैनी साफ देखी जा सकती थी। ऐसी विषम और दबाव भरी परिस्थिति में भारतीय कप्तान ने गेंद अपने सबसे भरोसेमंद और अनुभवी बाएं हाथ के स्पिनर अक्षर पटेल को थमाई। अक्षर पटेल ने अपने अंतरराष्ट्रीय अनुभव और सटीकता का परिचय देते हुए जापानी बल्लेबाजों को खुलकर बड़े शॉट खेलने की कोई जगह नहीं दी। उन्होंने अपनी सटीक लाइन-लेंथ, आर्म बॉल्स और गति में चतुराई भरा बदलाव करते हुए अंतिम ओवर में केवल 5 रन खर्च किए। इस तरह भारतीय टीम ने महज 2 रन के मामूली अंतर से यह सांसे रोक देने वाला मैच जीत लिया। भले ही तकनीकी रूप से जापान मैच हार गया, लेकिन भारतीय दिग्गजों को आखिरी गेंद तक बैकफुट पर धकेलने का यह कारनामा जापानी क्रिकेट के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया है।