जापान से हारा मैच 2 रन से जीतकर श्रेयस अय्यर ने ली राहत की सांस: 'पिच पर बैटिंग करना था बहुत मुश्किल', कप्तान का बड़ा खुलासा
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के इतिहास में मंगलवार, 22 सितंबर 2026 का दिन एक ऐसे अप्रत्याशित और सांसें थाम देने वाले मुकाबले का गवाह बना, जिसकी किसी भी क्रिकेट पंडित ने पहले से कल्पना नहीं की थी। भारत और जापान के बीच सानो स्थित सानो अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैदान (Sano International Cricket Ground) पर खेला गया इकलौता ऐतिहासिक टी20 मुकाबला रोमांच की सारी हदें पार कर गया। बारिश के चलते ओवरों में भारी कटौती के बाद यह मुकाबला महज 5-5 ओवर का कर दिया गया था। हर किसी को लग रहा था कि स्टार खिलाड़ियों से सजी भारतीय टीम पहले बल्लेबाजी करते हुए बोर्ड पर बड़ा स्कोर खड़ा करेगी और इस मुकाबले को एकतरफा अंदाज में अपने नाम कर लेगी, लेकिन 22 गज की पट्टी पर नजारा इसके बिल्कुल उलट देखने को मिला। जापानी गेंदबाजों और फील्डरों के अनुशासित प्रदर्शन के आगे भारतीय बल्लेबाजी क्रम पूरी तरह संघर्ष करता नजर आया। मैच का फैसला अंतिम गेंद तक खिंचा और टीम इंडिया हारते-हारते महज 02 रन के मामूली अंतर से जीत दर्ज कर पाई। इस बेहद नजदीकी जीत के बाद भारतीय कप्तान श्रेयस अय्यर ने गहरी राहत की सांस ली और पोस्ट मैच प्रेजेंटेशन में पिच की जटिलता और अपनी रणनीति पर खुलकर बात की।
सानो की टर्निंग पिच पर जब फेल हुए नियमित ओपनर्स: श्रेयस अय्यर ने बताया क्यों थी बल्लेबाजी इतनी कठिन
मैच खत्म होने के बाद जब प्रजेंटर ने कप्तान श्रेयस अय्यर से पूछा कि आज का मुकाबला उनके और टीम के लिए कितना चुनौतीपूर्ण और मुश्किल था, तो अय्यर ने बिना किसी हिचकिचाहट के पिच की हकीकत बयां की। अय्यर ने कहा कि सानो की यह पिच पूरी तरह से स्पिनरों की मददगार थी और गेंद अप्रत्याशित रूप से टर्न होकर बल्ले पर रुककर आ रही थी। उन्होंने साफगोई से स्वीकार किया कि सच कहूं तो इस पिच पर बल्लेबाजी करना किसी भी बल्लेबाज के लिए बेहद कठिन था। कप्तान ने आगे समझाया कि हमारी टीम के जो ओपनर्स नियमित रूप से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार बड़े रन बनाते हैं, वे भी इस पिच पर स्पिन की गति, उछाल और टर्न को ठीक से समझ नहीं पा रहे थे। जब गेंद पिच पर गिरकर रुकने लगे और असमान रूप से घूमे, तो वहां बड़े शॉट लगाना अपने आप में विकेट गंवाने का जोखिम बन जाता है, और हमारे शुरुआती बल्लेबाजों के साथ ठीक यही देखने को मिला।
रणनीति के तहत की बल्लेबाजी: हवाई फायर के बजाय सिंगल-डबल से स्ट्राइक रोटेट करने का बनाया प्लान
शीर्ष क्रम के बल्लेबाजों को रन बनाने के लिए कड़ा संघर्ष करता देख कप्तान श्रेयस अय्यर ने क्रीज पर कदम रखते ही अपनी सामान्य आक्रामक शैली को बदलकर एक सोची-समझी रणनीति के तहत खेलने का निर्णय लिया। इस पर बात करते हुए अय्यर ने कहा कि जब मैं बल्लेबाजी के लिए क्रीज पर उतरा, तो मैंने परिस्थितियों को भांपते हुए तुरंत तय किया कि यहां अंधाधुंध बाउंड्री तलाशने के बजाय समझदारी से सिंगल और डबल लेकर स्ट्राइक रोटेट करना सबसे ज्यादा जरूरी है। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने साथ बल्लेबाजी कर रहे दूसरे छोर के खिलाड़ी से भी बात की और उसे यह प्लान समझाया, हालांकि इस टर्निंग ट्रैक पर सिंगल निकालना भी कोई आसान काम नहीं था। श्रेयस ने कहा कि मैंने तय किया कि मैं हर गेंद की मेरिट के हिसाब से खेलूंगा और उसी अनुसार अपना अगला कदम उठाऊंगा ताकि टीम को एक सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया जा सके।
'क्रीज की गहराई का इस्तेमाल और गेंद की गति का फायदा': अय्यर की सूझबूझ से संभली टीम इंडिया
अपनी बल्लेबाजी की तकनीकी बारीकियों को साझा करते हुए श्रेयस अय्यर ने बताया कि जब हालात बेहद चुनौतीपूर्ण हों तो आपको क्रीज के सही इस्तेमाल पर ध्यान देना पड़ता है। अय्यर ने कहा कि अगर गेंद पिच पर पड़ने के बाद तेजी से टर्न हो रही है और रुककर आ रही है, तो सबसे सुरक्षित तरीका यही होता है कि आप क्रीज में पीछे रहकर (डेप्थ ऑफ द क्रीज) खेलें। उन्होंने बताया कि उन्होंने जानबूझकर बैकफुट का इस्तेमाल किया और जापानी गेंदबाजों की गति का फायदा उठाते हुए गैप्स में गेंद को धकेलकर एक और दो रन जुटाने की कोशिश की। कप्तान ने संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि हमारी यह रणनीति पूरी तरह कारगर रही और इसी वजह से हम उस मुश्किल सतह पर 32 रनों के ऐसे स्कोर तक पहुंच सके, जिसके दम पर हमारे गेंदबाजों को मैच में लड़ने का मौका मिल सका।
5 ओवर के फॉर्मेट में कोई भी बन सकता है सिकंदर: जापानी टीम के बेखौफ रवैये की खुलकर की तारीफ
मैच के दबाव और क्रिकेट की बदलती गतिशीलता पर अपने विचार व्यक्त करते हुए श्रेयस अय्यर ने कहा कि वे हमेशा से यह मानते रहे हैं कि पांच-पांच ओवर के टी20 मुकाबले में कभी भी कुछ भी हो सकता है। ऐसे छोटे फॉर्मेट में यह बिल्कुल मायने नहीं रखता कि आपकी टीम कागजों पर कितनी मजबूत या स्टार-स्टडेड है, क्योंकि इस प्रारूप में कोई भी सामने वाली टीम अपने दिन पर उलटफेर करने की पूरी क्षमता रखती है। अय्यर ने जापानी टीम की जुझारू भावना को सलाम करते हुए कहा कि आज पूरे मैच में जापान ने जो रवैया, खेल भावना और आक्रामक अप्रोच दिखाया, वह वास्तव में असाधारण और काबिले-तारीफ था। उन्होंने कहा कि जापानी टीम के खेलने का तरीका बहुत ही संगठित और बढ़िया था, और उनकी इस शानदार चुनौती की हर स्तर पर मुक्तकंठ से सराहना होनी चाहिए क्योंकि उन्होंने हमें मुकाबले के आखिरी पल तक कड़ी परीक्षा में डाले रखा।
आखिरी ओवर का रोमांच और 2 रन से जीत: भारतीय गेंदबाजों ने जबड़े से छीनी विजय
लक्ष्य का पीछा करने उतरी जापानी टीम ने उम्मीद से बढ़कर जज्बा दिखाया और मैच को अंतिम गेंद तक जीवित रखा। जापान को अंतिम पलों में जीत के लिए बेहद कम रनों की दरकार थी और मुकाबला किसी भी दिशा में जा सकता था। हालांकि, दबाव के इस नाजुक मोड़ पर भारतीय स्पिन आक्रमण ने अपना धैर्य बनाए रखा और अनुशासन के साथ गेंदबाजी करते हुए जापान को निर्धारित 5 ओवरों में 30 रन पर रोक दिया। इस तरह टीम इंडिया ने यह मुकाबला केवल 2 रन से जीतकर सीरीज में अपनी लाज बचाई। मैच के बाद भारतीय खेमे में जहां एक ओर जीत की राहत देखी गई, वहीं कप्तान श्रेयस अय्यर ने यह भी माना कि यह मैच टीम के लिए परिस्थितियों के अनुरूप तुरंत ढलने और खेल के किसी भी प्रतिद्वंद्वी को कम न आंकने का एक बड़ा सबक साबित हुआ है।