इस्लामाबाद बना 'किला': US-ईरान वार्ता से पहले पाकिस्तान की उड़ी नींद, रेड जोन सील और 2 दिन की छुट्टी का एलान
India News Live,Digital Desk : अमेरिका और ईरान के बीच ऐतिहासिक शांति वार्ता की मेजबानी करना पाकिस्तान के लिए 'सिर मुड़ाते ही ओले पड़ने' जैसा साबित हो रहा है। शुक्रवार, 10 अप्रैल 2026 को होने वाली इस उच्च-स्तरीय बैठक से पहले पूरी पाकिस्तानी राजधानी इस्लामाबाद में डर और भारी तनाव का माहौल है। अंतरराष्ट्रीय मेहमानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के चक्कर में पाकिस्तान की 'हवा टाइट' है और पूरे शहर को एक छावनी में तब्दील कर दिया गया है।
रेड जोन सील और नागरिकों की आवाजाही पर रोक
सुरक्षा की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस्लामाबाद प्रशासन ने दो दिन के स्थानीय अवकाश की घोषणा की है।
किलेबंदी: आधिकारिक वाहनों को छोड़कर रेड जोन की ओर जाने वाली सभी सड़कें पूरी तरह सील कर दी गई हैं।
ट्रैफिक एडवाइजरी: पुलिस ने सख्त निर्देश जारी किए हैं कि नागरिक अनावश्यक रूप से घरों से बाहर न निकलें। प्रमुख सरकारी इमारतों और दूतावासों के चारों ओर सुरक्षा का घेरा कई गुना बढ़ा दिया गया है।
अचूक सुरक्षा का वादा: पाकिस्तान के गृहमंत्री मोहसिन नकवी ने अमेरिकी कार्यवाहक राजदूत नैटली बेकर को 'अचूक सुरक्षा' का भरोसा दिलाया है, लेकिन जमीनी हकीकत घबराहट बयां कर रही है।
पाकिस्तान पर भरोसा नहीं, अमेरिका ने भेजी अपनी 'एडवांस टीम'
पाकिस्तान के सुरक्षा दावों के बावजूद अमेरिका कोई जोखिम नहीं लेना चाहता। खबरों के मुताबिक, 30 सदस्यीय अमेरिकी सुरक्षा दल पहले ही इस्लामाबाद पहुंच चुका है। यह टीम खुद जमीन पर उतरकर सुरक्षा व्यवस्था का मुआयना कर रही है। अमेरिका का यह कदम दर्शाता है कि उसे पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों पर पूरी तरह भरोसा नहीं है।
जेडी वेंस और जेरेड कुशनर करेंगे नेतृत्व
व्हाइट हाउस के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस नाजुक वार्ता के लिए एक हाई-प्रोफाइल टीम भेजी है। इसका नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे हैं। इस दल में ट्रंप के करीबी जेरेड कुशनर और विशेष दूत स्टीव विटकॉफ के भी शामिल होने की खबर है।
ईरान की 'ट्रिगर' वाली चेतावनी: क्या बेनतीजा रहेगी वार्ता?
एक तरफ सुरक्षा की टेंशन है, तो दूसरी तरफ कूटनीतिक संकट। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने लेबनान पर हुए हालिया इजरायली हमलों (जिसमें 200 से अधिक मौतें हुई हैं) पर सख्त नाराजगी जताई है। उन्होंने चेतावनी दी है कि:
"इजरायल के ऐसे कदम बातचीत को बेमानी बना देते हैं। हमारे हाथ अभी भी ट्रिगर पर हैं और हम अपने लेबनानी भाई-बहनों को अकेला नहीं छोड़ेंगे।"
ईरान के इस कड़े रुख ने इस्लामाबाद में होने वाली इस बैठक की सफलता पर सवालिया निशान लगा दिया है। यदि ईरान वार्ता से पीछे हटता है, तो मेजबान के तौर पर पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय किरकिरी होना तय है।