इंटरनेट बंद, लॉकडाउन जारी PoK में बढ़ा बवाल; ब्रिटिश सांसदों ने पाकिस्तान को किया नंगा, तमतमा जाएंगे शाहबाज-मुनीर
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में पिछले एक महीने से लगातार जारी सरकार विरोधी भयंकर प्रदर्शनों और सख्त लॉकडाउन के कारण हालात पूरी तरह बेकाबू हो चुके हैं। अब इस दमनचक्र के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान की थू-थू शुरू हो गई है। ब्रिटेन के सर्वदलीय संसदीय समूह (APPG Kashmir) ने मानवाधिकार संस्था 'एमनेस्टी इंटरनेशनल' के साथ एक हाई-प्रोफाइल आपातकालीन बैठक आयोजित कर पीओके की बदतर स्थिति पर पाकिस्तान सरकार को बुरी तरह बेनकाब कर दिया है। ब्रिटिश सांसदों ने शाहबाज शरीफ सरकार और पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर की नीतियों को आड़े हाथों लेते हुए मांग की है कि पीओके से तुरंत लॉकडाउन हटाया जाए, इंटरनेट बहाल हो और मानवीय सहायता बिना किसी रोक-टोक के पहुंचाई जाए।
30 दिनों से ठप है पीओके: भोजन, दवाओं और बिजली का हाहाकार
बैठक के बाद जारी आधिकारिक बयान में ब्रिटिश सांसदों ने बताया कि रावलकोट, मीरपुर, मुजफ्फरबाद और कोटली जैसे प्रमुख शहरों में विरोध प्रदर्शन अब 30वें दिन में प्रवेश कर चुके हैं। पूरे क्षेत्र में दुकानें, बाजार, स्कूल और परिवहन सेवाएं पूरी तरह ठप हैं। स्थानीय आबादी इस समय भोजन, जीवनरक्षक दवाइयों, ईंधन और अन्य जरूरी सामानों की भारी किल्लत से जूझ रही है। हालात इतने बदतर हैं कि कई इलाकों में बिजली और पीने के पानी की सप्लाई भी जानबूझकर काट दी गई है, जिससे पूरा क्षेत्र एक बड़े मानवीय संकट के गर्त में धकेल दिया गया है।
ब्रिटिश सांसदों की दो टूक: 'सूचना का अंधेरा' तुरंत खत्म करे पाकिस्तान
ब्रिटिश संसद सदस्यों ने पाकिस्तान को साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि पीओके में लगाए गए सभी दमनकारी प्रतिबंधों को तत्काल प्रभाव से समाप्त किया जाए। सांसदों ने ब्रिटिश सरकार से भी अपील की है कि वह पाकिस्तान पर ऐसा राजनयिक दबाव बनाए जिससे प्रभावित क्षेत्रों में खाद्यान्न और चिकित्सा उपकरणों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित हो सके।
APPG ने मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सेवाओं को बिना किसी देरी के पूरी तरह बहाल करने की मांग की। समूह के अनुसार, महीनों से जारी डिजिटल ब्लैकआउट की वजह से पूरा पीओके सूचना के अंधेरे में जी रहा है, जिससे न केवल परिवारों का आपसी संपर्क टूट गया है बल्कि आपातकालीन राहत कार्यों पर भी बेहद बुरा असर पड़ा है।
भुखमरी की कगार पर महिलाएं और बच्चे; स्वतंत्र जांच की उठी मांग
आपात बैठक में शामिल सांसदों ने चिंता जताई कि दूध, आटा और ईंधन की भारी कमी के कारण स्थानीय आबादी तड़प रही है। इस संकट का सबसे दर्दनाक असर महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों पर पड़ रहा है। ब्रिटिश सांसदों ने शाहबाज सरकार से मांग की है कि अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों, मानवीय सहायता एजेंसियों और स्वतंत्र पत्रकारों को बिना किसी पाबंदी के पीओके में प्रवेश की अनुमति दी जाए ताकि वहां चल रहे सैन्य अत्याचारों की जमीनी सच्चाई पूरी दुनिया के सामने आ सके।
शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर बर्बरता: संसाधनों की लूट के खिलाफ फूटा गुस्सा
पीओके के स्थानीय नागरिकों और प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पाकिस्तानी प्रशासन और सुरक्षा बलों ने उनके शांतिपूर्ण आंदोलन को कुचलने के लिए क्रूरता की सारी हदें पार कर दी हैं। निहत्थे लोगों पर आंसू गैस के गोले, रबर की गोलियां और बर्बर लाठीचार्ज किया जा रहा है।
दरअसल, यह जनआक्रोश आसमान छूती महंगाई, भारी बिजली संकट, संसाधनों की खुली लूट और पीओके की धरती पर पाकिस्तानी सेना के जबरन दबदबे के खिलाफ फूटा है। प्रदर्शनकारी नागरिक स्वतंत्रता, लोकतांत्रिक अधिकारों की बहाली और सेना के अत्याचारों के खात्मे की मांग कर रहे हैं। हालांकि, झुंझलाई पाकिस्तानी सेना ने वहां अपनी मौजूदगी और बढ़ा दी है, जिससे घाटी में बारूद जैसी स्थिति बन गई है।
क्या घुटने टेकेगा इस्लामाबाद?
मौजूदा रिपोर्टों के मुताबिक, पूरे पीओके में इस समय कर्फ्यू जैसी पाबंदियां लागू हैं, लेकिन जनता का हौसला डिगा नहीं है। स्थानीय नेताओं और नागरिक समाज संगठनों ने आने वाले दिनों में और भी बड़े राष्ट्रव्यापी आंदोलन की चेतावनी दे डाली है। वे अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सीधे हस्तक्षेप की गुहार लगा रहे हैं। अब देखना यह होगा कि ब्रिटिश संसद और एमनेस्टी इंटरनेशनल के इस कड़े रुख के बाद क्या वैश्विक दबाव के आगे पाकिस्तान अपनी तानाशाही नीतियां बदलने पर मजबूर होता है या नहीं।