भारत का 'स्मार्ट बॉर्डर' प्लान: पाकिस्तान और बांग्लादेश सीमा पर घुसपैठ और तस्करी पर लगेगा लगाम
India News Live,Digital Desk : केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भारत की सुरक्षा रणनीति में एक बड़ा बदलाव लाते हुए पाकिस्तान और बांग्लादेश के साथ 6,000 किलोमीटर लंबी सीमा को अभेद्य बनाने के लिए 'स्मार्ट बॉर्डर' परियोजना का ऐलान किया है। बीएसएफ के वार्षिक रुस्तमजी स्मृति व्याख्यान में बोलते हुए, शाह ने साफ किया कि सरकार घुसपैठ को रोकने और देश से प्रत्येक घुसपैठिए को बाहर निकालने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
क्या है 'स्मार्ट बॉर्डर' परियोजना?
इस परियोजना का उद्देश्य पारंपरिक सुरक्षा व्यवस्थाओं को अत्याधुनिक तकनीक से बदलना है। इस प्लान की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
उन्नत तकनीक का प्रयोग: सीमाओं की निगरानी के लिए ड्रोन, रडार और हाई-टेक स्मार्ट कैमरों का व्यापक उपयोग किया जाएगा।
अभेद्य सुरक्षा: पाकिस्तान (लगभग 1,289 किमी) और बांग्लादेश (4,096 किमी) के साथ लगी सीमाओं को अभेद्य बनाने के लिए इसे एक 'क्षेत्रीय जिम्मेदारी' के रूप में देखा जा रहा है।
एजेंसियों का समन्वय: सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सुरक्षा एजेंसियों और राज्य सरकारों के बीच तालमेल को अनिवार्य बनाया जाएगा।
घुसपैठ और तस्करी पर सख्ती
गृह मंत्री ने चेतावनी देते हुए कहा कि वर्तमान में इन सीमाओं को कई गंभीर खतरों का सामना करना पड़ रहा है, जिनमें शामिल हैं:
घुसपैठ और जनसांख्यिकी बदलने की साजिश।
ड्रोन के जरिए मादक पदार्थों, हथियारों और गोला-बारूद की तस्करी।
नकली भारतीय मुद्रा नोटों का चलन और संगठित अपराध।
मवेशियों की तस्करी।
अमित शाह ने बीएसएफ जवानों को निर्देश दिया कि वे स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर घुसपैठियों की पहचान करें। उन्होंने विश्वास जताया कि जिस तरह भारत को नक्सलवाद से मुक्त किया गया है, उसी तरह घुसपैठ पर भी पूरी तरह से लगाम लगाई जाएगी।
रक्षा सिद्धांत में 'आमूल-चूल' बदलाव
गृह मंत्री ने मोदी सरकार की 2014 के बाद की सुरक्षा नीति को एक 'नया रक्षा सिद्धांत' करार दिया। उन्होंने कहा:
पाकिस्तान को उरी, पुलवामा और हालिया पहलगाम हमलों का कड़ा जवाब दिया गया है।
सुरक्षा परिप्रेक्ष्य को संविधान की भावना के अनुरूप ढाला गया है।
त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल और असम की भाजपा सरकारों के साथ मिलकर घुसपैठ विरोधी नीति को सख्ती से लागू किया जाएगा।
आने वाले समय में गृह मंत्रालय इन राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक कर इस नीति को और अधिक प्रभावी बनाने पर चर्चा करेगा। साथ ही, अगले एक वर्ष में सीएपीएफ (CAPF) जवानों के कल्याण के लिए एक बड़ी योजना और मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ एक व्यापक राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू करने की भी घोषणा की गई है।