India's 'Show of Strength' Amidst Iran-US Conflict : रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तीनों सेना प्रमुखों के साथ की हाई-लेवल मीटिंग, जारी हुआ 'अलर्ट'

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India News Live,Digital Desk : मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच छिड़े भीषण संग्राम ने वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था को हिलाकर रख दिया है। 28 फरवरी को शुरू हुए इस युद्ध के एक महीने बाद भी स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। इस बीच, भारत ने अपनी सीमाओं और राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा के लिए कमर कस ली है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को दिल्ली में एक अत्यंत महत्वपूर्ण उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें भारत की सैन्य तैयारियों का व्यापक आकलन किया गया।

तीनों सेना प्रमुखों के साथ 'वॉर रूम' रणनीति

राजधानी में हुई इस मैराथन बैठक में थल सेना, नौसेना और वायुसेना के प्रमुखों के साथ-साथ रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े दिग्गज मौजूद रहे। बैठक का मुख्य एजेंडा ईरान-अमेरिका युद्ध के कारण बदलती अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के बीच भारत की रक्षा तैयारियों को परखना था। रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत अपनी संप्रभुता से कोई समझौता नहीं करेगा और किसी भी आकस्मिक चुनौती का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।

समुद्री सुरक्षा और एयर डिफेंस पर विशेष जोर

बैठक के दौरान सीमा सुरक्षा, समुद्री सुरक्षा (Maritime Security) और वायु रक्षा प्रणालियों (Air Defense) पर विस्तार से चर्चा हुई। हिंद महासागर क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर विशेष दिशा-निर्देश जारी किए गए, क्योंकि खाड़ी देशों में युद्ध की वजह से सप्लाई चेन प्रभावित होने का खतरा है। राजनाथ सिंह ने तीनों सशस्त्र बलों को हर समय सतर्क रहने और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल 'क्विक रिस्पांस' मोड में आने का निर्देश दिया है। भारत इस समय हर वैश्विक हलचल पर बारीकी से नजर रख रहा है।

ईरान का झुकने से इनकार: "शर्तें मानो वरना जारी रहेगी जंग"

एक तरफ भारत अपनी सुरक्षा पुख्ता कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ युद्ध के मैदान से शांति की खबरें फिलहाल दूर नजर आ रही हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 'शांति समझौते' वाले दावों को ईरान ने सिरे से खारिज कर दिया है। ईरानी सैन्य सलाहकार मोहसेन रेजाई ने दो टूक कहा है कि जब तक अमेरिका सभी आर्थिक प्रतिबंध नहीं हटाता और युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई की अंतरराष्ट्रीय गारंटी नहीं देता, तब तक युद्ध जारी रहेगा। ईरान की इस सख्त प्रतिक्रिया ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिज्ञों की चिंता बढ़ा दी है।

भारत की पैनी नजर: अंतरराष्ट्रीय व्यापार और सुरक्षा सर्वोपरि

रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, भारत इस युद्ध के आर्थिक और सामरिक दोनों पहलुओं का विश्लेषण कर रहा है। चूंकि युद्ध के केंद्र में वे देश हैं जिनसे भारत के गहरे व्यापारिक संबंध हैं, इसलिए भारतीय सेना की परिचालन तैयारियों (Operational Readiness) को सर्वोच्च स्तर पर रखा गया है। राजनाथ सिंह ने बैठक के अंत में दोहराया कि भारत एक शांतिप्रिय देश है, लेकिन अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए वह किसी भी हद तक जाने में सक्षम है।