भारत के लाल कैप्टन स्मित मच्छार? जिन्होंने 34,000 फीट पर लहूलुहान होकर भी बचा ली 180 यात्रियों की जान
जब हवा में 34 हजार फीट की ऊंचाई पर मौत और जिंदगी के बीच फासला महज चंद सेकंड का रह गया था, तब एक भारतीय जांबाज के फौलादी इरादों ने इतिहास की सबसे खौफनाक संभावित विमान दुर्घटनाओं में से एक को टाल दिया। फ्लाईदुबई की उड़ान FZ1073 में सिरफिरे सह-पायलट द्वारा कॉकपिट में किए गए जानलेवा हमले के बाद पूरी दुनिया की जुबान पर आज सिर्फ एक ही नाम है—कैप्टन स्मित मच्छार। गंभीर रूप से घायल और लहूलुहान होने के बावजूद जिन्होंने न तो होश खोया और न ही विमान का स्टीयरिंग छोड़ा। भारत की इस संतान ने अपने अदम्य साहस, असाधारण सूझबूझ और पेशेवर निष्ठा के दम पर 180 से अधिक मुसाफिरों को नई जिंदगी दी है। आइए जानते हैं कि कौन हैं कैप्टन स्मित मच्छार और किस मिट्टी से बने हैं यह जांबाज पायलट, जिनके शौर्य को आज पूरा विश्व सलाम कर रहा है।
कौन हैं कैप्टन स्मित मच्छार: भारत की माटी से निकलकर आसमान छूने का सफर
कैप्टन स्मित मच्छार भारतीय मूल के एक बेहद कुशल, अनुशासित और अनुभवी कमर्शियल एयरलाइन कैप्टन हैं। बचपन से ही आसमान में उड़ने और एविएशन क्षेत्र में करियर बनाने का सपना देखने वाले स्मित ने अपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा पूरी करने के बाद पायलट बनने का कड़ा प्रशिक्षण हासिल किया।
कठोर प्रशिक्षण और उड़ान का लंबा अनुभव: कैप्टन स्मित ने प्रतिष्ठित फ्लाइंग स्कूलों से कमर्शियल पायलट का लाइसेंस प्राप्त किया और हजारों घंटों की सुरक्षित उड़ान का बेदाग रिकॉर्ड बनाया।
बोइंग 737 के माहिर कमांडर: वे आधुनिकतम यात्री विमानों में गिने जाने वाले बोइंग 737 और 737 मैक्स सीरीज के प्रमाणित और वरिष्ठ कमांडर हैं। अंतरराष्ट्रीय उड्डयन मानकों के तहत उन्हें जटिल मौसम और आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित निर्णय लेने के लिए जाना जाता है।
फ्लाईदुबई में भरोसेमंद चेहरा: अंतरराष्ट्रीय एयरलाइन फ्लाईदुबई के साथ जुड़ने के बाद कैप्टन स्मित ने मध्य पूर्व, यूरोप और दक्षिण एशिया के कई संवेदनशील और व्यस्त हवाई मार्गों पर सैकड़ों सफल उड़ानों का संचालन किया। उनके साथी पायलट और केबिन क्रू उन्हें एक शांत, सौम्य और संकट के समय बेहद धैर्यवान लीडर के रूप में पहचानते हैं।
34,000 फीट पर जब सामने आई साक्षात मौत: क्या हुआ था उस खौफनाक दोपहर?
30 सितंबर को दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट से इजरायल के तेल अवीव के लिए रवाना हुई उड़ान FZ1073 जब लगभग 34,000 फीट की ऊंचाई पर थी, तब कॉकपिट में अचानक ऐसा मंजर बना जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। सह-पायलट ने कथित तौर पर हिंसक रुख अपनाते हुए विमान को सीधे क्रैश कराने के इरादे से कंट्रोल्स को नीचे धकेल दिया और कैप्टन स्मित पर जानलेवा हमला बोल दिया।
हमले में कैप्टन स्मित के सिर और चेहरे पर गंभीर चोटें आईं और वे लहूलुहान हो गए। एक सामान्य इंसान शायद उस क्षणिक सदमे और दर्द में होश खो बैठता, लेकिन स्मित मच्छार ने 'पैसेंजर्स फर्स्ट' के अपने मूल संकल्प को टूटने नहीं दिया। उन्होंने असहनीय पीड़ा के बीच एक हाथ से हमलावर को रोकने का प्रयास किया और दूसरे हाथ से विमान के थ्रस्ट और कंट्रोल कॉलम को थामे रखा, जिससे विमान अनियंत्रित गोता (Nose-dive) लगाने से बच गया।
जांबाजी और त्वरित निर्णय: कोड 7500 और सऊदी अरब में सेफ लैंडिंग
कैप्टन स्मित ने कॉकपिट के भीतर कुश्ती लड़ते हुए भी अपनी ट्रेनिंग का परिचय दिया। उन्होंने तुरंत ट्रांसपोंडर पर 'कोड 7500' (अवैध हस्तक्षेप/विमान पर हमला) और 'कोड 7700' एक्टिवेट किया, जिससे केबिन क्रू तुरंत अलर्ट होकर कॉकपिट में दाखिल हुआ और हमलावर को काबू में कर बांधा गया।
हमलावर के निष्क्रिय होने के बाद, शरीर से लगातार बहते खून और गंभीर चोटों के बावजूद कैप्टन स्मित ने एयर ट्रैफिक कंट्रोल से संपर्क साधा। उन्होंने शांत आवाज में निकटतम सऊदी अरब के तबुक एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग की अनुमति मांगी और अत्यंत कुशलता से बोइंग 737 मैक्स विमान को सुरक्षित रनवे पर उतार दिया। रनवे पर विमान के पहिए थमते ही 180 यात्रियों की सांस में सांस आई।
वैश्विक स्तर पर कैप्टन स्मित को नागरिक उड्डयन के सर्वोच्च सम्मान की मांग
इस चमत्कारिक बचाव के बाद कैप्टन स्मित मच्छार रातों-रात वैश्विक एविएशन के रियल-लाइफ हीरो बन गए हैं। सऊदी अरब के अस्पताल में उनका इलाज जारी है, जहां डॉक्टरों ने उनकी स्थिति को खतरे से बाहर बताया है। सोशल मीडिया पर भारत से लेकर खाड़ी देशों तक लोग उन्हें 'भारत का गौरव' और 'देवदूत' बता रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय पायलट संगठनों और विमानन विशेषज्ञों ने एक स्वर में कहा है कि यदि कैप्टन स्मित ने उस जानलेवा क्षण में 10 सेकंड की भी कमजोरी या हिचकिचाहट दिखाई होती, तो 180 जिंदगियों के साथ इतिहास का एक दर्दनाक हादसा दर्ज हो जाता। वैश्विक स्तर पर उन्हें नागरिक उड्डयन के सर्वोच्च वीरता पुरस्कार से सम्मानित करने की मांग जोर पकड़ रही है।