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November 01 2026 08:56 am

काबुल में कत्लेआम के बीच 'संकटमोचक' बना भारत: अफगानिस्तान भेजी ढाई टन दवाइयां, मानवीय मदद में फिर जीता दुनिया का दिल...

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India News Live,Digital Desk : काबुल में हुए हालिया भीषण हमले के बाद अफगानिस्तान में मचे हाहाकार के बीच भारत ने एक बार फिर अपनी इंसानियत और 'पड़ोसी धर्म' का परिचय दिया है। संकट की इस घड़ी में भारत सरकार ने तेजी से कदम उठाते हुए ढाई टन (2.5 टन) जीवन रक्षक दवाइयां और चिकित्सा सहायता की खेप काबुल भेजी है। भारत की यह मदद ऐसे समय में आई है जब वहां का चिकित्सा तंत्र बुरी तरह चरमरा गया है और घायलों को तत्काल उपचार की सख्त जरूरत है।

भारत ने निभाया मित्रता का धर्म

अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में हुए आत्मघाती हमले के बाद वहां की स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है। अस्पतालों में मरीजों की तादाद बढ़ रही है और बुनियादी दवाओं की भारी किल्लत देखी जा रही है। इसी आपात स्थिति को देखते हुए भारत के विदेश मंत्रालय ने विशेष विमान के जरिए चिकित्सा उपकरणों और दवाओं की बड़ी खेप रवाना की। इसमें एंटीबायोटिक्स, सर्जिकल उपकरण और जीवन रक्षक दवाओं के साथ-साथ गंभीर रूप से घायल लोगों के उपचार के लिए जरूरी मेडिकल सामान शामिल है। भारत के इस कदम की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना हो रही है क्योंकि भारत ने बिना किसी राजनीतिक भेदभाव के केवल मानवीय आधार पर यह मदद पहुंचाई है।

पहले भी अफगानिस्तान का सहारा बना भारत

यह पहली बार नहीं है जब भारत ने अफगानिस्तान के लोगों के लिए मदद का हाथ बढ़ाया है। इससे पहले भी भारत की ओर से हजारों मीट्रिक टन गेहूं, सर्दी के कपड़े और भारी मात्रा में पोलियो रोधी टीके भेजे जा चुके हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारत की प्रतिबद्धता अफगानिस्तान के आम नागरिकों की भलाई और उनकी सुरक्षा को लेकर है। काबुल हवाई अड्डे पर दवाइयों की यह खेप विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और अफगान रेड क्रिसेंट सोसाइटी के प्रतिनिधियों को सौंपी गई है ताकि यह सीधे जरूरतमंदों तक पहुंच सके।

संकट में घिरा काबुल और मेडिकल इमरजेंसी

काबुल में हुए हमले के बाद वहां अफरा-तफरी का माहौल है। स्थानीय अस्पतालों ने दवाओं की कमी को लेकर चेतावनी जारी की थी जिसके तुरंत बाद नई दिल्ली से राहत सामग्री की खेप रवाना कर दी गई। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की इस सक्रियता ने न केवल सैकड़ों लोगों की जान बचाने में मदद की है बल्कि दक्षिण एशिया में एक 'जिम्मेदार नेतृत्व' की छवि को भी और मजबूत किया है। आने वाले दिनों में भारत स्थिति की समीक्षा करने के बाद और अधिक मानवीय सहायता भेजने पर विचार कर सकता है।