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July 10 2026 11:36 pm

'मौत आए तो अपनी मिट्टी पर आए...' शेख हसीना का सबसे बड़ा एलान, भारत छोड़ दिसंबर में बांग्लादेश लौटकर करेंगी सरेंडर

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पड़ोसी देश बांग्लादेश की राजनीति से इस वक्त की सबसे सनसनीखेज और हड़कंप मचा देने वाली खबर सामने आ रही है। भारत में शरण लेकर रह रहीं बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने आधिकारिक तौर पर अपने देश वापस लौटने की तारीख का एलान कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स को दिए एक एक्सक्लूसिव और भावुक इंटरव्यू में शेख हसीना ने साफ किया है कि वह आगामी दिसंबर 2026 के आसपास भारत में अपना निर्वासन पूरी तरह खत्म कर स्वदेश लौट जाएंगी। उन्होंने बताया कि वह बांग्लादेश पहुंचकर वहां की अदालत में आत्मसमर्पण (सरेंडर) करेंगी। इस बड़े और अप्रत्याशित फैसले ने ढाका से लेकर नई दिल्ली के राजनयिक गलियारों में खलबली मचा दी है।

कोर्ट में खुद को पेश कर सरकार को चुनौती: शेख हसीना ने कहा—देखना चाहती हूं उनका व्यवहार

बांग्लादेश में इस समय मौत की सजा का सामना कर रहीं और अपनी पार्टी 'अवामी लीग' पर प्रतिबंध झेल रहीं शेख हसीना ने अपने इस कदम को बेहद सोची-समझी रणनीति का हिस्सा बताया है। दक्षिण एशियाई देश में सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री के पद पर काबिज रहीं हसीना ने कहा कि वे कोर्ट के सामने खुद को स्वेच्छा से सरेंडर करना चाहती हैं ताकि वे पूरी दुनिया के सामने यह देख सकें कि बांग्लादेश की वर्तमान अंतरिम सरकार अपने देश के सबसे प्रमुख राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी और अवामी लीग के नेताओं के साथ कैसा कानूनी व्यवहार करती है। शेख हसीना ने पुष्टि की कि उनके साथ अवामी लीग के कई अन्य निर्वासित वरिष्ठ नेता भी दिसंबर में एक साथ स्वदेश वापसी करेंगे।

'वे मुझे मार भी डालें, तो भी मुझे जाना है': एक घंटे के इंटरव्यू में छलका शेख हसीना का दर्द

शुक्रवार को हुए लगभग एक घंटे के भावुक टेलीफोनिक इंटरव्यू के दौरान जब शेख हसीना से उनकी सुरक्षा और मौत की सजा को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने बेहद सख्त लहजे में जवाब दिया। शेख हसीना ने कहा, "हो सकता है कि जब मैं बांग्लादेश की धरती पर कदम रखूं, तो वे मुझे तुरंत गिरफ्तार कर लें या फिर मेरी हत्या भी कर दें। इन सबके बावजूद, अब मुझे वापस जाना ही है। बांग्लादेश में मेरी पार्टी के लाखों नेताओं और जमीनी कार्यकर्ताओं को इस समय भारी दमन और अत्याचार का सामना करना पड़ रहा है। अगर मुझे मौत आनी ही है, तो मैं चाहती हूं कि वह मेरी अपनी मातृभूमि पर आए, जहां मेरे माता-पिता की कब्रें हैं और जहां मेरे पूरे परिवार का खून बहा था।"

साल 2024 का तख्तापलट और वॉर क्राइम कोर्ट की सजा: क्या था पूरा घटनाक्रम?

गौरतलब है कि साल 2024 में बांग्लादेश में हुए भीषण छात्र आंदोलन और हिंसक विद्रोह के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को अचानक देश छोड़कर भारत भागना पड़ा था। उनके जाने के बाद बांग्लादेश की स्पेशल वॉर क्राइम कोर्ट ने नवंबर महीने में छात्र-नेतृत्व वाले विद्रोह के खिलाफ सुरक्षाबलों को घातक और हिंसक कार्रवाई का आदेश देने का दोषी मानते हुए शेख हसीना की अनुपस्थिति में ही उन्हें मौत की सजा (Death Penalty) सुना दी थी। हालांकि, भारत में रहते हुए शेख हसीना ने अपने ऊपर लगे इन सभी मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों को सिरे से खारिज किया है और इसे राजनीतिक साजिश बताया है।

भारत और बांग्लादेश के तनावपूर्ण संबंधों में आ सकता है बड़ा सुधार: प्रत्यर्पण विवाद पर लगेगा विराम

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शेख हसीना का खुद वापस जाने का फैसला भारत और बांग्लादेश के बीच पिछले दो साल से चल रहे भारी कूटनीतिक तनाव को कम कर सकता है। जब से भारत ने शेख हसीना को मानवीय आधार पर अपने यहां गुप्त शरण दी थी, तब से ढाका की नई सरकार लगातार भारत से उन्हें प्रत्यर्पित (Extradite) करने की मांग कर रही थी और इसे लेकर दोनों देशों के व्यापारिक संबंध भी प्रभावित हो रहे थे। शेख हसीना ने स्पष्ट किया, "ढाका के अधिकारी मुझे वापस ले जाना चाहते हैं और वे भारत को लगातार प्रत्यर्पण के पत्र भेज रहे हैं, लेकिन अब उन्हें इसकी जरूरत नहीं पड़ेगी क्योंकि मैं खुद स्वेच्छा से वापस जा रही हूं।" शेख हसीना के साथ बांग्लादेश के पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल भी सरेंडर करेंगे, जो वर्तमान में मौत की सजा का सामना कर रहे हैं।