भारतीय रुपये में ऐतिहासिक गिरावट, डॉलर के मुकाबले 92.62 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुँचा; जानें आपकी जेब पर क्या होगा असर...
India News Live,Digital Desk : पश्चिम एशिया में गहराते ईरान संकट और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव का सीधा प्रहार अब भारतीय मुद्रा पर देखने को मिल रहा है। विदेशी मुद्रा बाजार में बुधवार को भारतीय रुपये ने अपने अब तक के सबसे खराब दौर का सामना किया। शुरुआती कारोबार में ही रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले टूटकर 92.62 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर जा गिरा। ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते युद्ध के साये और कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल ने रुपये की कमर तोड़ दी है, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था और आयातकों की चिंताएं चरम पर पहुँच गई हैं।
वैश्विक तनाव और कच्चे तेल ने बिगाड़ा खेल
भारतीय रुपये में आई इस बड़ी गिरावट के पीछे सबसे प्रमुख कारण ईरान-अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ता तनाव है। पश्चिम एशिया में अस्थिरता के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल (Crude Oil) की सप्लाई चेन बाधित होने का डर सता रहा है, जिसकी वजह से तेल की कीमतें सातवें आसमान पर पहुँच रही हैं। भारत अपनी जरूरत का 80 फीसदी से ज्यादा तेल आयात करता है, ऐसे में डॉलर की बढ़ती मांग और रुपये की घटती कीमत ने विदेशी मुद्रा भंडार पर भी दबाव बना दिया है। निवेशकों में बढ़ते डर के कारण वे उभरते बाजारों से पैसा निकालकर सुरक्षित निवेश यानी डॉलर की ओर भाग रहे हैं।
आपकी जेब पर पड़ेगा सीधा असर, बढ़ सकती है महंगाई
रुपये के रिकॉर्ड स्तर तक गिरने का असर केवल शेयर बाजार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका सीधा असर आम आदमी की रसोई और जेब पर पड़ना तय है। डॉलर के महंगा होने से कच्चा तेल महंगा होगा, जिससे पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना बढ़ जाएगी। इसके अलावा, विदेश से आयात होने वाले मोबाइल फोन, लैपटॉप, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स और अन्य जरूरी सामान भी अब महंगे हो सकते हैं। इतना ही नहीं, जो छात्र विदेश में पढ़ाई कर रहे हैं, उनके लिए फीस और रहने का खर्च भी अब पहले के मुकाबले काफी बढ़ जाएगा।
आरबीआई (RBI) के हस्तक्षेप पर टिकी सबकी नजरें
रुपये की इस फ्री-फॉल स्थिति को देखते हुए अब सबकी निगाहें भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) पर टिकी हैं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि रुपये को और अधिक गिरने से बचाने के लिए केंद्रीय बैंक डॉलर की बिक्री कर बाजार में हस्तक्षेप कर सकता है। हालांकि, वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए फिलहाल रुपये में बड़ी रिकवरी की उम्मीद कम ही नजर आ रही है। यदि ईरान संकट जल्द नहीं थमा, तो आने वाले दिनों में रुपया 93 के स्तर को भी पार कर सकता है, जो भारतीय बाजार के लिए एक बड़ा खतरे का संकेत होगा।