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May 15 2026 04:45 pm

Historic Decline in Silver Prices: सिर्फ 2 दिन में ₹33,000 लुढ़के दाम, क्या ₹3 लाख के पार जाना बना बड़ी गलती

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India News Live, Digital Desk : सरकार द्वारा सोना-चांदी पर आयात शुल्क (Import Duty) बढ़ाने के फैसले के बाद सर्राफा बाजार में मची हलचल अब एक नए मोड़ पर आ गई है। शुरुआती तेजी के बाद अब चांदी के खरीदारों और निवेशकों के लिए राहत भरी खबर है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी की कीमतों में ऐसी भारी गिरावट दर्ज की गई है जिसकी उम्मीद बाजार विशेषज्ञों को भी नहीं थी। पिछले महज दो कारोबारी सत्रों में चांदी के भाव लगभग 33 हजार रुपये प्रति किलोग्राम तक टूट गए हैं। यह गिरावट तब आई है जब कुछ ही दिन पहले भावों ने 3 लाख रुपये का ऐतिहासिक स्तर छुआ था।

क्यों आई चांदी के भाव में 11% की बड़ी सेंध?

बाजार के आंकड़ों पर नजर डालें तो शुक्रवार को चांदी की कीमतों में अकेले 6% की गिरावट देखी गई, जिससे यह प्रति किलो करीब 17,500 रुपये सस्ती हो गई। दो दिनों के भीतर कुल गिरावट 11% यानी करीब 32,624 रुपये तक पहुंच गई है। दरअसल, 12 मई को जब सरकार ने आयात शुल्क बढ़ाकर 15% किया, तब चांदी के भाव 2.79 लाख से सीधे 3 लाख रुपये के पार निकल गए थे। लेकिन इतनी ऊंची कीमतों पर मांग पूरी तरह ठप हो गई, जिससे बाजार में 'बिकवाली' का दौर शुरू हो गया। विशेषज्ञों का कहना है कि ऊंचे दामों पर मुनाफावसूली और डिमांड में कमी इस भारी गिरावट की मुख्य वजह है।

सरकार के 15% ड्यूटी वाले फैसले का असर

केंद्र सरकार ने घरेलू मुद्रा रुपये पर दबाव कम करने और आयात बिल को नियंत्रित करने के लिए चांदी पर आयात शुल्क 6% से बढ़ाकर सीधे 15% कर दिया था। इस 'ड्यूटी शॉक' की वजह से बाजार में तुरंत कीमतों में उछाल आया क्योंकि आयातित चांदी की लागत अचानक बढ़ गई। हालांकि, Enrich मनी के CEO पोनमुडी आर के अनुसार, यह उछाल केवल एक तात्कालिक प्रतिक्रिया थी। जैसे ही निवेशकों को लगा कि इतनी महंगी चांदी की खपत औद्योगिक क्षेत्र में कम हो जाएगी, बाजार नीचे की ओर फिसलने लगा।

औद्योगिक धातु होने का चांदी को हुआ नुकसान

चांदी केवल एक आभूषण वाली धातु नहीं है, बल्कि इसका बड़ा हिस्सा सोलर पैनल, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक वाहन (EV), बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और AI इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे ग्रीन एनर्जी सेक्टर्स में इस्तेमाल होता है। वैश्विक आर्थिक सुस्ती की आशंका और ईरान तनाव के कारण कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने निवेशकों को डरा दिया है। जब वैश्विक विकास दर पर संकट आता है, तो औद्योगिक धातुओं की मांग गिर जाती है। यही कारण है कि चांदी अब एक सुरक्षित निवेश (Safe Haven) के बजाय एक इंडस्ट्रियल कमोडिटी की तरह व्यवहार कर रही है और दबाव झेल रही है।

क्या कहते हैं बाजार के जानकार?

बोनांजा के सीनियर कमोडिटी एनालिस्ट निरपेंद्र यादव का मानना है कि 15% की ड्यूटी बढ़ोतरी से स्थानीय कीमतें इतनी ज्यादा बढ़ गई हैं कि इससे ज्वेलरी की मांग पर बहुत बुरा असर पड़ सकता है। यदि ईरान संघर्ष के चलते तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो महंगाई बढ़ने के डर से केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख अपना सकते हैं। ऐसे माहौल में चांदी की कीमतों में और भी अस्थिरता देखी जा सकती है। फिलहाल, 3 लाख रुपये के स्तर से चांदी का नीचे आना उन लोगों के लिए मौका हो सकता है जो लंबे समय के लिए निवेश करना चाहते हैं।