संयुक्त राष्ट्र शांति रक्षक दल पर भीषण गोलाबारी, इंडोनेशियाई सैनिक की मौत; दुनिया भर में आक्रोश

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India News Live,Digital Desk : पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष अब अंतरराष्ट्रीय कानूनों की सीमाओं को लांघता दिख रहा है। दक्षिणी लेबनान के अदशित अल-कुसैर गांव में इस्राइली तोपखाने की भारी गोलाबारी की चपेट में आने से संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल (UNIFIL) के एक इंडोनेशियाई शांति रक्षक की दर्दनाक मौत हो गई। इस हमले में तीन अन्य सैनिक गंभीर रूप से घायल हुए हैं। इस घटना ने वैश्विक स्तर पर सनसनी फैला दी है, क्योंकि शांति मिशन पर तैनात सैनिकों को निशाना बनाना सीधे तौर पर 'युद्ध अपराध' की श्रेणी में आता है।

धमाके से दहला दक्षिणी लेबनान, UN के हेलीकॉप्टरों ने संभाला मोर्चा

रिपोर्ट्स के मुताबिक, रविवार को जब UNIFIL की टीम अपने निर्धारित क्षेत्र में तैनात थी, तभी इस्राइली सेना की ओर से अंधाधुंध गोलाबारी शुरू हो गई। इस हमले में इंडोनेशियाई इकाई का एक जवान शहीद हो गया। घटना के तुरंत बाद संयुक्त राष्ट्र के रेस्क्यू हेलीकॉप्टर प्रभावित इलाके की ओर दौड़ते देखे गए। UNIFIL ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर दुख जताते हुए कहा, "शांति के लिए काम करने वाले किसी भी व्यक्ति को इस तरह अपनी जान नहीं गंवानी चाहिए। यह हमला सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1701 का खुला उल्लंघन है।"

इंडोनेशिया का कड़ा रुख: 'पारदर्शी जांच हो और शव वापस मिले'

अपने सैनिक की शहादत पर इंडोनेशिया सरकार ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। जकार्ता स्थित विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर इस हमले को 'अंतरराष्ट्रीय कानून का जघन्य उल्लंघन' बताया है। इंडोनेशिया ने मांग की है कि इस घटना की उच्च स्तरीय और पारदर्शी जांच की जाए। वर्तमान में इंडोनेशियाई सरकार संयुक्त राष्ट्र के साथ मिलकर शहीद सैनिक के पार्थिव शरीर को सम्मानपूर्वक वापस लाने और घायल सैनिकों के बेहतर इलाज की व्यवस्था में जुटी है।

युद्ध अपराध की श्रेणी में आता है शांति रक्षकों पर हमला

संयुक्त राष्ट्र ने सभी पक्षों को चेतावनी दी है कि अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत UN कर्मचारियों और उनकी संपत्ति की सुरक्षा करना सभी की जिम्मेदारी है। जानबूझकर शांति रक्षकों को निशाना बनाना न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि इसे युद्ध अपराध माना जा सकता है। संगठन ने जोर देकर कहा कि इस सैन्य संघर्ष का कोई समाधान बंदूकों से नहीं निकलेगा; केवल कूटनीति ही शांति का रास्ता साफ कर सकती है।

लेबनान सीमा पर बढ़ता तनाव, पत्रकारों की भी जा चुकी है जान

यह पहली बार नहीं है जब इस्राइली हमलों में गैर-सैन्य या अंतरराष्ट्रीय निकायों से जुड़े लोग हताहत हुए हैं। इससे पहले दक्षिणी लेबनान में ही इस्राइली हमले में तीन पत्रकारों की मौत हो गई थी। वहीं, दुबई के एयर डिफेंस द्वारा मिसाइल रोकने के दौरान गिरे मलबे से एक भारतीय समेत दो लोगों की जान जा चुकी है। लेबनान और इस्राइल सीमा पर बढ़ती गोलीबारी ने पूरे क्षेत्र को बारूद के ढेर पर बिठा दिया है, जहाँ अब अंतरराष्ट्रीय शांति रक्षक भी सुरक्षित नहीं हैं।