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August 07 2026 05:09 pm

गोरखपुर यूनिवर्सिटी के हॉस्टलों और मेस की बदहाली पर भड़कीं राज्यपाल आनंदीबेन पटेल: तेल को बताया 'भंगार'

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उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल के गोरखपुर यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह के दौरान किए गए औचक निरीक्षण ने प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा दिया है। यूनिवर्सिटी के हॉस्टलों और मेस की दयनीय हालत को देखकर राज्यपाल भड़क उठीं। उन्होंने न सिर्फ मेस के खाने और तेल की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाए, बल्कि यह तक कह दिया कि मुख्यमंत्री के गृह जिले में ऐसी लापरवाही कतई बर्दाश्त नहीं की जा सकती।

मेस के तेल को बताया 'भंगार', खुद लखनऊ लेकर गईं सैंपल

गोरखपुर यूनिवर्सिटी के दौरे के दौरान राज्यपाल ने हॉस्टलों की मेस का जायजा लिया। लड़कों के हॉस्टल में मेस का संचालन ही नहीं हो रहा था, जबकि लड़कियों के हॉस्टल के मेस में रखे सामान की स्थिति देखकर वह दंग रह गईं।

तेल पर फूटा गुस्सा: मेस के डिब्बों में रखे तेल को देखकर राज्यपाल ने कर्मचारियों से तीखे लहजे में पूछा, “यह तेल है या भंगार (कबाड़) है?”

खुद ले गईं सैंपल: एक गृहिणी होने के नाते रसोई के सामान की समझ रखने वाली राज्यपाल ने तुरंत फूड सेफ्टी अधिकारियों को मौके पर बुलाया। उन्होंने खाद्य सामग्रियों के दो सैंपल भरवाए और बीच में सैंपल बदले जाने की आशंका के चलते दूसरा सैंपल अपने साथ सुरक्षित लखनऊ लेकर रवाना हो गईं ताकि उसकी निष्पक्ष जांच कराई जा सके।

"गोरखपुर में ऐसी लापरवाही? जहां खुद मुख्यमंत्री विराजमान हैं"

राज्यपाल ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि यह प्रदेश का वह शहर है जहां स्वयं मुख्यमंत्री विराजमान हैं, ऐसे में यूनिवर्सिटी के भीतर इस तरह की अव्यवस्थाएं होना बेहद शर्मनाक और चिंताजनक है। उन्होंने दीक्षांत समारोह के अपने भाषण में भी इन कमियों का खुलकर जिक्र किया।

टिफिन व्यवस्था और सुरक्षा पर गंभीर आरोप

राज्यपाल ने खुलासा किया कि लड़कों के हॉस्टल में मेस न होने के कारण बाहर से टिफिन मंगवाया जाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या बच्चों को वह खाना पसंद आता होगा? इसके साथ ही उन्होंने कड़े शब्दों में चेतावनी दी:
 

ड्रग्स और शराब का अंदेशा: राज्यपाल ने कहा कि टिफिन व्यवस्था को तुरंत बंद किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “मैंने देखा है कि टिफिन में बाहर से क्या-क्या आता है। टिफिन में दारू भी आती है और ड्रग्स भी आता है।”

मां होने के नाते चिंता: उन्होंने एक मां की ममता और चिंता जताते हुए कहा कि छात्रों को शुद्ध खुराक मिलना जरूरी है, वरना उनका बौद्धिक विकास प्रभावित होगा।

जनभवन की निरीक्षण रिपोर्ट में सामने आई भारी खामियां

राज्यपाल द्वारा भेजी गई जनभवन की टीम ने जब यूनिवर्सिटी के हॉस्टलों और परिसरों की जांच की, तो स्थिति बेहद बदतर पाई गई:

अलकनंदा हॉस्टल: वाई-फाई बंद मिला और पंखे नदारद थे (हालांकि राज्यपाल के आने की सूचना पर आनन-फानन में पंखे लगवाए गए)।
रामप्रसाद शुक्ल हॉस्टल: परिसर पूरी तरह गंदगी से पटा हुआ मिला।

अमरावती गर्ल्स हॉस्टल: पीने के पानी और बिजली तक की उचित व्यवस्था नहीं थी।
चंद्रावत हॉस्टल: पिछले तीन सालों से जर्जर हालत में खड़ा है, लेकिन उसे गिराया नहीं जा सका है।

अन्य शैक्षणिक और आवासीय ब्लॉक: साइंस विभाग में पंखों का अभाव, केमिस्ट्री लैब में पानी की टोंटियों में पानी न आना, सीसीटीवी कैमरों का बंद रहना, हिंदी व जंतु विज्ञान विभागों में फायर सेफ्टी उपकरणों का एक्सपायर होना और हीरापुरी कॉलोनी व टाइप-2 आवासों में भारी गंदगी पाई गई।

3 महीने के भीतर व्यवस्था सुधारने का अल्टीमेटम

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राज्यपाल ने यूनिवर्सिटी प्रशासन को सख्त निर्देश दिए हैं कि 3 महीने के भीतर सभी कमियों को पूरी तरह दूर किया जाए। इसके लिए विभागों के अध्यक्षों और छात्रों को शामिल करके विशेष कमेटियों का गठन करने को कहा गया है। इन समितियों की रिपोर्ट तीन महीने बाद सीधे जनभवन भेजी जाएगी, जिसके बाद यूनिवर्सिटी की दोबारा समीक्षा की जाएगी।