बासमती चावल की शुद्धता बचाने के लिए सरकार का बड़ा फैसला, 30 जिलों में 12 कीटनाशकों पर रोक

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India News Live,Digital Desk : बासमती चावल की गुणवत्ता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी पहचान बनाए रखने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। कीटनाशी अधिनियम 1968 की धारा 27(1) के तहत राज्यपाल ने आदेश जारी करते हुए मुरादाबाद सहित प्रदेश के 30 जिलों में 12 खतरनाक कीटनाशकों की बिक्री, वितरण और उपयोग पर अगले 60 दिनों तक रोक लगा दी है।

कृषि विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि कोई विक्रेता इस आदेश की अवहेलना करता है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसमें लाइसेंस रद्द होने से लेकर भारी जुर्माना और आपराधिक मुकदमा दर्ज होना भी शामिल है।

प्रतिबंधित कीटनाशकों में ट्राइसाइक्लाजोल, बुप्रोफेजिन, एसीफेट, क्लोरपाइरीफास, टेबुकोनोजोल, प्रोपिकोनाजोल, थायोमेथाक्साम, प्रोफेनोफास, इमिडाक्लोप्रिड, कार्बेण्डाजिम और कार्बोफ्यूरान जैसे रसायन शामिल हैं। इनका सीधा असर बासमती धान की गुणवत्ता पर पड़ता है और निर्यात बाजार में भारत की साख को नुकसान पहुंचाता है।

जिला कृषि रक्षा अधिकारी डॉ. राजेंद्र पाल सिंह ने चेतावनी दी है कि इस अवधि में कोई भी विक्रेता इन प्रतिबंधित दवाओं को न बेचे और न ही इनके उपयोग को बढ़ावा दे।

कृषि विभाग ने इस कार्रवाई के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) भी जारी की है। इसके तहत विक्रेताओं की दुकानों पर लगातार निगरानी रखी जाएगी और फसलों का निरीक्षण किया जाएगा। यह कदम सिर्फ किसानों को अनुशासित करने के लिए नहीं, बल्कि बासमती चावल की अंतरराष्ट्रीय विश्वसनीयता और निर्यात को बचाने के लिए उठाया गया है।

सरकार का संदेश साफ है – बासमती चावल की शुद्धता और विश्वसनीयता पर अब कोई समझौता नहीं होगा। यदि कोई विक्रेता इन आदेशों का उल्लंघन करता पाया गया, तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई तय है।