सोने की चमक ने निवेशकों को किया मालामाल! ₹9 वाला गोल्ड ईटीएफ पहुंचा ₹125 के पार, 1200% रिटर्न के बाद क्या अब दांव लगाना सही..
India News Live,Digital Desk : निवेश के सुरक्षित ठिकानों में शुमार 'सोना' केवल आभूषणों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि डिजिटल गोल्ड के रूप में इसने निवेशकों की किस्मत बदल दी है। देश के सबसे पुराने गोल्ड ईटीएफ (Gold ETF) ने रिटर्न के मामले में बड़े-बड़े स्टॉक्स को पीछे छोड़ दिया है। आंकड़ों पर नजर डालें तो कभी महज 9 रुपये की कीमत पर ट्रेड करने वाला यह ईटीएफ आज 125 रुपये के स्तर को पार कर चुका है। 1200 प्रतिशत से भी ज्यादा की इस तूफानी तेजी ने उन निवेशकों को बंपर मुनाफा दिया है जिन्होंने लंबी अवधि के लिए इसमें भरोसा जताया था। अब सवाल यह है कि क्या रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद भी इसमें निवेश का मौका बचा है?
महज ₹9 से ₹125 तक का सफर: निवेश की ताकत
गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड यानी गोल्ड ईटीएफ ने पिछले कुछ वर्षों में भारतीय निवेशकों के बीच अपनी खास जगह बनाई है। यह फंड सीधे तौर पर सोने की कीमतों से जुड़ा होता है। इस सबसे पुराने गोल्ड ईटीएफ के चार्ट को देखें तो इसकी शुरुआत बहुत ही मामूली कीमत से हुई थी। तब सोने की कीमतें आज के मुकाबले काफी कम थीं। जैसे-जैसे वैश्विक अनिश्चितता और महंगाई बढ़ी, सोने की मांग में इजाफा हुआ और इसका सीधा असर ईटीएफ की एनएवी (NAV) पर पड़ा। आज यह फंड अपने निवेशकों के लिए एक मल्टीबैगर साबित हुआ है, जिसने उनकी पूंजी को कई गुना बढ़ा दिया है।
क्यों बढ़ रही है गोल्ड ईटीएफ की चमक?
फिजिकल गोल्ड (जेवर या सिक्के) खरीदने के मुकाबले गोल्ड ईटीएफ में निवेश करना ज्यादा सुरक्षित और किफायती माना जाता है। इसमें न तो मेकिंग चार्ज का झंझट होता है और न ही शुद्धता की चिंता। आप इसे अपने डीमैट खाते के जरिए ठीक उसी तरह खरीद और बेच सकते हैं जैसे किसी कंपनी के शेयर। पिछले एक दशक में जिस तरह से वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव बढ़ा है, निवेशकों ने सुरक्षित निवेश के लिए सोने का रुख किया है। यही वजह है कि गोल्ड ईटीएफ में लगातार निवेश बढ़ रहा है और इसकी कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिल रहा है।
क्या अब भी किया जा सकता है निवेश? विशेषज्ञों की राय
1200 प्रतिशत के भारी-भरकम रिटर्न के बाद अब नए निवेशक असमंजस में हैं कि क्या इस ऊंचे भाव पर खरीदारी करना सही होगा। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सोने में निवेश कभी भी बेकार नहीं जाता, खासकर लंबी अवधि के लिए। हालांकि, मौजूदा स्तरों पर एकमुश्त (Lumpsum) निवेश के बजाय 'एसआईपी' (SIP) मोड में खरीदारी करना अधिक समझदारी भरा फैसला हो सकता है। यदि सोने की कीमतों में मामूली गिरावट आती है, तो वह खरीदारी का बेहतरीन मौका होगा। पोर्टफोलियो विविधीकरण (Diversification) के लिहाज से हर निवेशक को अपनी कुल पूंजी का 10 से 15 प्रतिशत हिस्सा गोल्ड ईटीएफ में जरूर रखना चाहिए।