बिजली विभाग का 'करंट', 710 रुपये से सीधे 60 हजार पहुंचा बिल; दफ्तरों के चक्कर काट रहे 75 वर्षीय बुजुर्ग
India News Live,Digital Desk : उत्तर प्रदेश के भदोही जिले में बिजली विभाग की एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। दुर्गागंज इलाके के मतेथू गांव में रहने वाले एक 75 वर्षीय बुजुर्ग रमाशंकर दुबे को विभाग ने एक महीने के भीतर 60,420 रुपये का बिजली बिल थमा दिया है। खास बात यह है कि पिछले महीने तक उनका बिल महज 710 रुपये आता था। इस भारी-भरकम बिल ने बुजुर्ग को मानसिक रूप से परेशान कर दिया है और वे न्याय के लिए दर-दर भटक रहे हैं।
पूरा मामला: दिसंबर में 710, जनवरी में 60 हजार
पाली विद्युत उपकेंद्र के अंतर्गत आने वाले मतेथू गांव के रमाशंकर दुबे नियमित रूप से अपना बिजली बिल जमा करते हैं।
दिसंबर का बिल: 710 रुपये।
जनवरी का बिल: 60,420 रुपये।
विभागीय तर्क: जब पीड़ित ने बिजली दफ्तर में शिकायत की, तो उन्हें बताया गया कि मीटर 'स्टोर' (तकनीकी खराबी के कारण रीडिंग रुक जाना) हो गया था, जिसकी वजह से पुरानी सारी रीडिंग एक साथ जुड़कर बिल में आ गई है।
JE और मीटर रीडर की कार्यप्रणाली पर सवाल
बुजुर्ग उपभोक्ता ने विभागीय अधिकारियों, विशेषकर अवर अभियंता (JE) और मीटर रीडर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका तर्क है कि:
यदि मीटर में कोई तकनीकी समस्या थी, तो उन्हें समय रहते सूचित क्यों नहीं किया गया?
मीटर रीडर हर महीने रीडिंग लेने आता है, तो उसने पहले इस विसंगति को क्यों नहीं पकड़ा?
एक सामान्य ग्रामीण परिवार का बिल अचानक 60 हजार हो जाना स्पष्ट रूप से विभागीय लापरवाही और गलत रीडिंग की ओर इशारा करता है।
शिकायत के बाद भी समाधान नहीं
रमाशंकर दुबे पिछले एक महीने से पाली विद्युत उपकेंद्र और अन्य दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अब तक उनका बिल ठीक नहीं किया गया है। थक-हारकर उन्होंने अब जिलाधिकारी (DM) और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस मामले में हस्तक्षेप करने की गुहार लगाई है।
अधिकारियों का आश्वासन
इस मामले में जब एसडीओ (SDO) धीरज मिश्र से बात की गई, तो उन्होंने कहा कि फिलहाल यह मामला उनके संज्ञान में नहीं है। हालांकि, उन्होंने आश्वासन दिया कि यदि उपभोक्ता प्रार्थना पत्र देते हैं, तो मामले की जांच कराई जाएगी और यदि बिल गलत पाया गया, तो उसे तत्काल ठीक कर दिया जाएगा।