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July 14 2026 06:55 pm

बवाल में बालेन: Gen Z ने बनाया, कहीं वही गिरा न दे नेपाल की सरकार; जानें क्यों सड़कों पर उतरे युवा

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नेपाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। अभी कुछ ही महीने पहले केपी शर्मा ओली की सरकार को उखाड़ फेंकने वाली नेपाल की युवा पीढ़ी यानी Gen Z ने जिस बालेन शाह को देश की सत्ता सौंपी थी, आज वही युवा उनके खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं। बालेन शाह को प्रधानमंत्री पद की शपथ लिए अभी महज 104 दिन ही बीते हैं कि उनके खिलाफ जनता का असंतोष चरम पर पहुंच गया है, जिससे नई सरकार के गिरने का खतरा मंडराने लगा है।

क्यों भड़का नेपाल के युवाओं का गुस्सा?

इस पूरे बवाल की मुख्य वजह काठमांडू में नदी के किनारों पर बसी अवैध बस्तियों (Slums) को हटाने का सरकार का कड़ा अभियान है। प्रधानमंत्री बालेन शाह के निर्देश पर प्रशासन ने बिना किसी पुनर्वास योजना (Rehabilitation Plan) के इन बस्तियों को ढहाना शुरू कर दिया है। सरकार के इस बेदखली अभियान के कारण हजारों लोग कड़कड़ाती ठंड और विपरीत मौसम में बेघर हो गए हैं। इस कार्रवाई के विरोध में एक स्थानीय नागरिक द्वारा आत्मदाह (Self-Immolation) करने और उसकी मौत हो जाने के बाद लोगों का गुस्सा फूट पड़ा।

जिन युवाओं ने सरकार बनवाई, आज वही पहुंचे जेल

काठमांडू के माइतीघर में हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारी इकट्ठा होकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं। आंदोलन को कुचलने के लिए पुलिस और सुरक्षा बलों का सहारा लिया जा रहा है:

प्रमुख चेहरों की गिरफ्तारी: Gen Z आंदोलन के मुख्य चेहरे और बालेन शाह को सत्ता तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाने वाले युवा नेता माजिद अंसारी और सरिश्मा थापा को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है।

पुलिस प्रताड़ना के आरोप: प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि हिरासत में लिए गए युवाओं को पुलिस बुरी तरह प्रताड़ित कर रही है। पुलिसिया कार्रवाई में चोटिल हुए माजिद अंसारी फिलहाल अस्पताल में भर्ती हैं।

आत्मदाह की कोशिशें: सरकार के अड़ियल रुख के खिलाफ जनता में इस कदर खौफ और गुस्सा है कि अश्विन राउत और विवेक मंडल जैसे युवाओं ने भी सार्वजनिक रूप से आत्मदाह करने का प्रयास किया है।

मेयर के जमाने से बालेन शाह के निशाने पर थीं बस्तियां

प्रधानमंत्री बनने से पहले बालेन शाह काठमांडू के मेयर रह चुके हैं और यह प्रोजेक्ट उनके एजेंडे में काफी लंबे समय से था। नेपाल में सरकारी जमीन पर बिना मालिकाना हक के रहने वाले इन गरीब लोगों को 'कब्जेदार' कहा जाता है।

एक आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, काठमांडू घाटी में नदी किनारे लगभग 3,500 से अधिक लोग इन अवैध झुग्गी-बस्तियों में जीवन यापन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे अवैध निर्माण हटाने के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन सरकार को इन गरीब परिवारों के सिर छुपाने के लिए वैकल्पिक जमीन या घर का इंतजाम पहले करना चाहिए था। बिना तैयारी के चलाए गए इस बुलडोजर अभियान ने अब बालेन शाह की कुर्सी को ही संकट में डाल दिया है।