एक साथ न पहनें पहनें तुलसी और रुद्राक्ष की माला शास्त्रों के अनुसार जान लें इसके पीछे का कारण और नियम

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India News Live, Digital Desk: हिंदू धर्म में पूजा-पाठ और आध्यात्मिक साधना के दौरान विभिन्न प्रकार की मालाओं को धारण करने का विशेष महत्व बताया गया है। इनमें तुलसी और रुद्राक्ष की माला को सबसे अधिक पवित्र और चमत्कारी माना जाता है। अक्सर लोग मन की शांति, ग्रहों के अशुभ प्रभाव को कम करने और ईश्वर की कृपा पाने के लिए इन मालाओं को गले में धारण करते हैं। लेकिन कई बार अज्ञानता के कारण लोग तुलसी और रुद्राक्ष दोनों की माला एक साथ पहन लेते हैं। ज्योतिष और धार्मिक शास्त्रों के अनुसार ऐसा करना उचित नहीं माना जाता है। आइए विस्तार से जानते हैं कि क्या वाकई इन दोनों पवित्र मालाओं को एक साथ धारण किया जा सकता है और इसके पीछे क्या नियम हैं।

रुद्राक्ष और तुलसी का धार्मिक महत्व धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रुद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शिव के आंसुओं से हुई है। इसलिए इसे महादेव का साक्षात स्वरूप माना जाता है और शिव भक्त इसे बड़े चाव से धारण करते हैं। वहीं दूसरी ओर तुलसी को देवी का दर्जा प्राप्त है और यह भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है। भगवान श्री कृष्ण और विष्णु जी के भक्त मुख्य रूप से तुलसी की माला धारण करते हैं। दोनों ही मालाओं की अपनी अलग ऊर्जा और आध्यात्मिक प्रभाव होता है।

क्या एक साथ पहन सकते हैं दोनों मालाएं? 

ज्योतिष शास्त्र और जानकारों के अनुसार रुद्राक्ष और तुलसी की माला को कभी भी एक साथ गले में धारण नहीं करना चाहिए। इसके पीछे का मुख्य कारण दोनों की ऊर्जाओं का अलग-अलग होना है। रुद्राक्ष भगवान शिव की उग्र और वैराग्य ऊर्जा का प्रतीक है जबकि तुलसी भगवान विष्णु की सौम्य और पालनहार ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करती है। जब कोई व्यक्ति इन दोनों को एक साथ पहनता है तो शरीर में दो विपरीत ऊर्जाओं का टकराव हो सकता है जिससे मानसिक अशांति और जीवन में परेशानियां आने की संभावना बढ़ जाती है।

नियमों में है बड़ा अंतर इन दोनों मालाओं को धारण करने के नियम भी एक-दूसरे से काफी अलग हैं। रुद्राक्ष पहनने वाले व्यक्ति को सात्विक भोजन के साथ-साथ कई कठोर नियमों का पालन करना होता है। वहीं तुलसी की माला पहनने वाले के लिए भी प्याज, लहसुन, मांस-मदिरा का सेवन पूरी तरह से वर्जित होता है। दोनों के नियमों को एक साथ साधना बहुत मुश्किल हो जाता है। यदि नियमों में थोड़ी सी भी चूक हो जाए तो व्यक्ति को इसके नकारात्मक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

धारण करने का सही तरीका अगर आप शिव और विष्णु दोनों के अनन्य भक्त हैं और दोनों का आशीर्वाद पाना चाहते हैं तो इसके लिए एक विशेष नियम का पालन किया जा सकता है। आप रुद्राक्ष को गले में धारण कर सकते हैं और तुलसी की माला से केवल नाम जाप कर सकते हैं या इसे अपने घर के मंदिर में रख सकते हैं। इसके अलावा कुछ विद्वानों का मानना है कि यदि आप चाहें तो गले में रुद्राक्ष और दाहिने हाथ की कलाई पर तुलसी धारण कर सकते हैं लेकिन एक ही जगह पर दोनों को स्पर्श करते हुए पहनना शास्त्र सम्मत नहीं है। किसी भी माला को धारण करने से पहले किसी योग्य ज्योतिषी या विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लेनी चाहिए।