पापमोचनी एकादशी पर भूलकर भी न करें ये गलतियां, वरना पुण्य की जगह लग सकता है पाप; जानें जरूरी नियम
India News Live,Digital Desk : चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को 'पापमोचनी एकादशी' (Papmochani Ekadashi 2026) के रूप में मनाया जाता है। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, यह एकादशी समस्त पापों का नाश करने वाली मानी गई है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा करने से जाने-अनजाने में हुए अपराधों से मुक्ति मिलती है। हालांकि, इस व्रत के नियम अत्यंत कठोर हैं। यदि अनजाने में भी कुछ वर्जित कार्य कर दिए जाएं, तो व्रत खंडित हो सकता है। आइए जानते हैं कि इस दिन आपको किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
चावल का सेवन: सबसे बड़ी गलती
शास्त्रों के अनुसार, एकादशी के दिन चावल खाना पूरी तरह वर्जित है। माना जाता है कि इस दिन चावल का सेवन जीव हत्या के समान पाप का भागी बनाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, चावल में महर्षि मेधा के अंश का वास होता है, इसलिए व्रत रखने वालों के साथ-साथ परिवार के अन्य सदस्यों को भी इस दिन घर में चावल नहीं बनाना चाहिए।
तुलसी दल तोड़ने से बचें
भगवान विष्णु की पूजा बिना तुलसी के अधूरी मानी जाती है, लेकिन पापमोचनी एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ना वर्जित है। कहा जाता है कि इस पावन तिथि पर तुलसी माता स्वयं भगवान विष्णु के लिए व्रत रखती हैं। यदि आपको पूजा के लिए तुलसी दल चाहिए, तो उसे एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें। एकादशी पर तुलसी के पौधे में जल अर्पित करना और दीपक जलाना शुभ होता है, लेकिन उसे छूना या पत्ते तोड़ना अशुभ माना गया है।
तामसिक भोजन और व्यवहार का त्याग
पापमोचनी एकादशी आत्मशुद्धि का पर्व है। इस दिन केवल भोजन ही नहीं, बल्कि विचारों की पवित्रता भी आवश्यक है। व्रत के दौरान मांस, मदिरा, लहसुन, प्याज और मसूर की दाल जैसी तामसिक चीजों से दूर रहना चाहिए। इसके अलावा, इस दिन किसी की निंदा करना, झूठ बोलना या क्रोध करना आपके व्रत के फल को शून्य कर सकता है।
रात्रि जागरण और ब्रह्मचर्य का पालन
एकादशी की रात को सोने के बजाय भजन-कीर्तन करने का विधान है। 'श्री हरि' के नामों का जाप करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। साथ ही, इस दिन पूर्ण रूप से ब्रह्मचर्य का पालन करना अनिवार्य है। संयम और नियम ही इस व्रत की असली शक्ति हैं।
व्रत खोलने का सही समय (पारण नियम)
व्रत का पूर्ण फल तभी मिलता है जब उसका पारण यानी व्रत खोलना सही समय पर किया जाए। द्वादशी तिथि के शुभ मुहूर्त में ही व्रत खोलें। ध्यान रहे कि 'हरि वासर' (द्वादशी की पहली चौथाई अवधि) के दौरान व्रत कभी न खोलें। पारण से पहले किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान-दक्षिणा जरूर दें।