Holika Dahan 2026: आखिर कौन है 'भद्रा' जिसके साये में शुभ काम करना माना जाता है वर्जित, जानें शनि देव की बहन की पौराणिक कथा

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India News Live,Digital Desk : हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य या मांगलिक अनुष्ठान से पहले 'भद्रा' का विचार करना अनिवार्य माना जाता है। इस साल 3 मार्च 2026 को होलिका दहन (Holika Dahan 2026) के दिन भद्रा और चंद्र ग्रहण का एक अत्यंत दुर्लभ संयोग बन रहा है। ज्योतिष शास्त्र में भद्रा काल को 'विघ्नकारी' समय माना गया है। विद्वानों का मानना है कि भद्रा के साये में किया गया कोई भी शुभ कार्य न केवल अधूरा रहता है, बल्कि उसके अशुभ परिणाम भी झेलने पड़ सकते हैं। आइए जानते हैं कौन है यह भद्रा और क्यों होलिका दहन के समय इनका इतना खौफ रहता है।

कौन है भद्रा? शनि देव से क्या है इनका रिश्ता

पौराणिक कथाओं के अनुसार, भद्रा भगवान सूर्य देव की पुत्री और कर्मफल दाता शनि देव की सगी बहन हैं। भद्रा का स्वरूप और स्वभाव उनके भाई शनि देव की तरह ही कठोर माना गया है। कहा जाता है कि जब भद्रा का जन्म हुआ, तो वे स्वभाव से अत्यंत उग्र और विनाशकारी थीं। वे जन्म लेते ही पूरी सृष्टि को निगलने और ऋषि-मुनियों के यज्ञ-अनुष्ठानों में बाधा डालने लगीं। उनके इस व्यवहार से देवलोक और पृथ्वीलोक, दोनों ही भयभीत रहने लगे।

ब्रह्मा जी ने क्यों दिया भद्रा को 'अशुभ' समय का स्थान?

भद्रा के विनाशकारी स्वभाव को नियंत्रित करने के लिए ब्रह्मा जी ने उन्हें पंचांग के एक विशेष काल (विष्टि करण) में स्थान दिया। ब्रह्मा जी ने निर्देश दिया कि जो भी व्यक्ति भद्रा काल के दौरान विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन या कोई भी मांगलिक कार्य करेगा, उसे सफलता नहीं मिलेगी और कार्यों में बाधा आएगी। तभी से शुभ कार्यों में 'भद्रा' का त्याग करने की परंपरा शुरू हुई।

होलिका दहन और भद्रा का गहरा संबंध

शास्त्रों में एक विशेष श्लोक है— 'भद्रायां द्वे न कर्तव्ये श्रावणी फाल्गुनी तथा'। इसका अर्थ है कि भद्रा काल में दो मुख्य कार्य कभी नहीं करने चाहिए: श्रावणी (रक्षाबंधन पर राखी बांधना) और फाल्गुनी (होलिका दहन करना)। मान्यता है कि यदि भद्रा काल में होलिका जलाई जाए, तो उस क्षेत्र में नकारात्मक ऊर्जा का वास होता है और वहां जन-धन की हानि की आशंका बढ़ जाती है। अग्नि देव की पूजा भद्रा की समाप्ति के बाद ही फलदायी होती है।

3 मार्च 2026: चंद्र ग्रहण और भद्रा का दोहरा साया

इस वर्ष होलिका दहन की तिथि काफी संवेदनशील है। 3 मार्च को भद्रा के साथ-साथ चंद्र ग्रहण का भी प्रभाव रहेगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस समय ग्रहों की स्थिति व्यक्ति के भीतर क्रोध और भ्रम पैदा कर सकती है। ग्रहण के सूतक काल और भद्रा दोष से बचने के लिए ज्योतिषियों ने केवल शुभ मुहूर्त में ही पूजन करने की सलाह दी है। सही समय पर किया गया होलिका पूजन ही आपके जीवन के दुखों को भस्म कर सुख-समृद्धि ला सकता है।