DNPA Conclave 2026: अश्विनी वैष्णव की टेक कंपनियों को दो टूक 'कंटेंट क्रिएटर्स को दें कमाई का सही हिस्सा, वरना बनेगा कानून'

Post

India News Live,Digital Desk : राजधानी में आयोजित DNPA (Digital News Publishers Association) कॉन्क्लेव 2026 में केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म्स और बिग टेक कंपनियों को कड़ा संदेश दिया है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि अब वह समय आ गया है जब प्लेटफॉर्म्स को मूल कंटेंट बनाने वालों (Original Content Creators) के साथ रेवेन्यू शेयरिंग के मॉडल पर गंभीरता से काम करना होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कंपनियां स्वेच्छा से ऐसा नहीं करती हैं, तो सरकार को सख्त कानूनी कदम उठाने पड़ेंगे।

कंटेंट क्रिएटर्स के हक की बात: राजस्व में मिले उचित हिस्सा

आईटी मंत्री ने कहा कि डिजिटल युग में दूरदराज के इलाकों में बैठे क्रिएटर्स दिन-रात मेहनत कर कंटेंट तैयार करते हैं, लेकिन उनकी मेहनत की कमाई का बड़ा हिस्सा प्लेटफॉर्म्स डकार जाते हैं।

उचित मूल्य: वैष्णव ने जोर दिया कि कंटेंट बनाने वालों को उनके काम की सही कीमत मिलनी चाहिए।

कानूनी हल: उन्होंने उदाहरण दिया कि कई देशों ने पहले ही ऐसे कानून बना लिए हैं जहाँ टेक कंपनियों को प्रकाशकों और क्रिएटर्स को भुगतान करना पड़ता है। भारत भी इसी दिशा में बढ़ सकता है।

समाज के प्रति जिम्मेदारी: मंत्री ने कहा कि समाज ने जिन संस्थागत मूल्यों का निर्माण किया है, टेक कंपनियों को उनका सम्मान करना चाहिए।

डीपफेक और सिंथेटिक वीडियो पर सरकार सख्त

डीपफेक (Deepfake) के बढ़ते खतरों पर मंत्री ने गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि तकनीक का दुरुपयोग कर किसी की आवाज या चेहरा बदलकर वीडियो बनाना गलत है।

सहमति अनिवार्य: उन्होंने प्रस्ताव दिया कि किसी भी व्यक्ति का सिंथेटिक वीडियो बनाने से पहले उसकी स्पष्ट सहमति लेना अनिवार्य होना चाहिए।

सोशल मीडिया रील का क्रेज: भारत में इंस्टाग्राम के 40 करोड़ यूजर्स में से 95% लोग रील देखते हैं। फेसबुक और एक्स (X) पर भी रील का काफी चलन है, इसलिए इस क्षेत्र में नियमन बेहद जरूरी है।

प्लेटफॉर्म्स को लेनी होगी कंटेंट की जिम्मेदारी

अश्विनी वैष्णव ने दो टूक शब्दों में कहा कि अब प्लेटफॉर्म्स "केवल एक माध्यम" होने का बहाना बनाकर जिम्मेदारी से बच नहीं सकते।

ऑनलाइन सुरक्षा: बच्चों की सुरक्षा और किसी भी व्यक्ति की ऑनलाइन डिग्निटी की जिम्मेदारी सीधे तौर पर उस प्लेटफॉर्म की होगी जहाँ वह कंटेंट चल रहा है।

फिजिकल vs डिजिटल: उन्होंने तर्क दिया कि जो चीजें समाज में भौतिक (Physical) रूप से अपराध या गलत मानी जाती हैं, उन्हें ऑनलाइन जगत में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

बड़े बदलाव की तैयारी

वैष्णव के इस संबोधन ने संकेत दे दिया है कि सरकार जल्द ही डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही तय करने के लिए नए नियम या 'डिजिटल इंडिया बिल' में कड़े प्रावधान ला सकती है। इसका सीधा असर गूगल, मेटा (फेसबुक/इंस्टाग्राम) और एक्स जैसे बड़े प्लेटफॉर्म्स पर पड़ेगा।