Iran Political Crisis 2026: क्या युद्ध के बीच ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने दिया इस्तीफा
India News Live,Digital Desk : अमेरिका और ईरान के बीच पिछले 3 महीनों से जारी भीषण महायुद्ध (US-Iran War 2026) के बीच अब तेहरान के शीर्ष नेतृत्व और सत्ता के गलियारों से एक अत्यंत विस्फोटक व चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। एक तरफ जहाँ अमेरिका के साथ शांति समझौते को लेकर जारी बातचीत बार-बार अटक रही है, वहीं दूसरी तरफ ईरान के आंतरिक शासन में एक बहुत बड़ी राजनीतिक दरार (Political Crisis) उजागर हो गई है।
लंदन स्थित प्रतिष्ठित मीडिया आउटलेट 'ईरान इंटरनेशनल' (Iran International) ने अपनी एक सनसनीखेज रिपोर्ट में दावा किया है कि ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन (Masoud Pezeshkian) ने अपने पद से इस्तीफे की पेशकश कर दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस अप्रत्याशित कदम के पीछे की मुख्य वजह ईरान की सबसे ताकतवर सेना—इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के साथ उनके बढ़ते तीखे और गंभीर मतभेद हैं।
सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के दफ्तर को भेजी चिट्ठी
विस्फोटक रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने रविवार को ईरान के सुप्रीम लीडर (सर्वोच्च धार्मिक नेता) मोजतबा खामेनेई के कार्यालय को अपना आधिकारिक इस्तीफा सौंप दिया।
सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि पेजेशकियन ने इस गोपनीय चिट्ठी में सेना पर बेहद गंभीर और सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि:
IRGC ने युद्ध की आड़ में ईरान की चुनी हुई असैन्य सरकार और उसके बड़े प्रशासनिक हिस्सों पर पूरी तरह से कब्जा कर लिया है।
इस महायुद्ध के दौरान राष्ट्रपति होने के बावजूद उन्हें और देश के अन्य शीर्ष कैबिनेट मंत्रियों को रणनीतिक व जरूरी फैसले लेने के अधिकार से पूरी तरह बेदखल (दूर) कर दिया गया है।
"सेना युद्ध लंबा खींच रही है, अर्थव्यवस्था बर्बाद हो रही है"
रिपोर्ट में ईरान के एक अज्ञात वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि राष्ट्रपति पेजेशकियन और IRGC के चीफ के बीच पिछले कई हफ्तों से पर्दे के पीछे गंभीर विवाद चल रहा था।
पेजेशकियन इस बात से बेहद नाराज और चिंतित हैं कि सेना जिस आक्रामक तरीके से अमेरिका के खिलाफ इस युद्ध को लगातार और लंबा खींच रही है, उससे ईरान की अर्थव्यवस्था (Economy) पूरी तरह जमींदोज और बर्बाद हो चुकी है, जिसके कारण देश की आम जनता दाने-दाने को तरस रही है और बेहद परेशान है। पेजेशकियन ने अपनी त्यागपत्र वाली चिट्ठी में साफ शब्दों में लिखा, "सैन्य ताकतों के ऐसे भारी दबाव और मौजूदा बदतर हालातों में मैं न तो सरकार चला पा रहा हूँ और न ही अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों को निभाने में सक्षम हूँ, इसलिए मुझे तत्काल इस पद से मुक्त कर दिया जाए।"
ईरान सरकार ने दावों को किया खारिज: बताया—विदेशी ताकतों का 'ख्याली पुलाव'
इस सनसनीखेज खबर के अंतरराष्ट्रीय मीडिया में हेडलाइन बनते ही तेहरान में हड़कंप मच गया, जिसके बाद ईरान सरकार को तुरंत सामने आकर इस पर सफाई देनी पड़ी। ईरान के राष्ट्रपति कार्यालय ने इन सभी खबरों को सिरे से खारिज करते हुए इसे पश्चिमी देशों और दुश्मनों द्वारा तेहरान को बदनाम करने और युद्ध के बीच मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की एक सोची-समझी साजिश करार दिया है।
राष्ट्रपति कार्यालय का आधिकारिक बयान:
राष्ट्रपति कार्यालय के सूचना विभाग के प्रमुख सैयद मेहदी तबातबाई ने एक बेहद कड़ा और आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा, "विदेशी और दुश्मन मीडिया नेटवर्क्स ईरान में अस्थिरता पैदा करने के लिए पूरी तरह से मनगढ़ंत और झूठी अफवाहें फैला रहे हैं। इस दावे में रत्ती भर भी हकीकत नहीं है, यह केवल हमारे दुश्मनों का एक 'ख्याली पुलाव' है। राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन मजबूती के साथ अपने पद पर बने हुए हैं और वे देश व जनता की सेवा के रास्ते से कभी पीछे नहीं हटेंगे। जो ताकतें इस युद्ध के समय ईरान की आंतरिक एकता को तोड़ना चाहती हैं, वे अपनी इस नापाक इच्छा को सीधे अपने साथ कब्र में लेकर जाएंगी।”
भले ही ईरान सरकार आधिकारिक तौर पर इस इस्तीफे की खबर को 'अफवाह' बता रही हो, लेकिन अंतरराष्ट्रीय रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि युद्ध के इस नाजुक दौर में अमेरिका द्वारा समझौते की शर्तों को लगातार कड़ा किए जाने और ट्रंप की सैन्य धमकियों के कारण ईरान के भीतर 'उदारवादी' राष्ट्रपति और 'कट्टरपंथी' IRGC सेना के बीच की यह आपसी खींचतान अब पूरी तरह खुलकर सतह पर आ चुकी है।