June 21 2026 05:08 am

दिवाली पर बच्चों के लिए खतरनाक बन गई ‘देसी पटाखा गन’, 14 की आँखों की रोशनी गई

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India News Live,Digital Desk : हर साल दिवाली पर कोई न कोई नया पटाखा चलन में आ जाता है और बच्चे इन ट्रेंडी पटाखों की ज़िद करते हैं। लेकिन इस बार कार्बाइड गन यानी "देसी पटाखा गन" बच्चों की आँखों के लिए ख़तरा बन गई है। ये सिर्फ़ एक खिलौना नहीं, बल्कि एक विस्फोटक उपकरण है जो पल भर में आँखों को हमेशा के लिए नुकसान पहुँचा सकता है।

14 मासूमों की आँखों की रोशनी चली गई
विदिशा ज़िले में खुलेआम बिक रही एक देसी पटाखा यानी कार्बाइड गन ने 14 मासूम बच्चों की आँखों की रोशनी छीन ली है। प्रशासन ने अब उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई शुरू कर दी है। विदिशा की 17 वर्षीय नेहा ने बताया, "हमने एक देसी कार्बाइड गन ख़रीदी थी। जब वह फटी, तो मेरी एक आँख पूरी तरह जल गई।"

एक अन्य पीड़ित राज विश्वकर्मा ने बताया, "सोशल मीडिया पर देखकर मैंने देसी पटाखों से बंदूक बनाई, और फिर उसमें विस्फोट हो गया... मेरी एक आँख चली गई।" इस मामले में विदिशा के टीआई आरके मिश्रा ने बताया, "हमने तुरंत कार्रवाई करते हुए छह लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। मामले की जाँच जारी है और आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।"

तीन दिन में 100 से ज़्यादा मामले
मध्य प्रदेश के भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर समेत कई राज्यों में सिर्फ़ तीन दिनों में 122 से ज़्यादा बच्चे आँखों में गंभीर चोट के साथ अस्पतालों में भर्ती हुए। अकेले भोपाल के हमीदिया अस्पताल में ही 26 से ज़्यादा मामले देखे गए। घर में बनी पटाखा बंदूक के बारे में डॉक्टर साफ़ कह रहे हैं कि यह कोई खिलौना नहीं, बल्कि "जुगाड़ बम" है। इसके परिणाम बेहद ख़तरनाक हो सकते हैं।

ये खतरनाक बंदूकें कैसे बनती हैं?
बताया जा रहा है कि बच्चे माचिस और बारूद को मिलाकर प्लास्टिक या टिन की ट्यूब में भरकर बंदूकें बनाते हैं। विस्फोट के दौरान, नुकीले ब्लेड और धातु के कण सीधे आँखों में लगते हैं। कई मामलों में, आँखों की पुतलियाँ फट गई हैं, जिसके लिए तुरंत सर्जरी की ज़रूरत पड़ी है।

डॉक्टरों की खुली चेतावनी
हमीदिया अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनीष शर्मा और अन्य नेत्र विशेषज्ञों ने कहा है कि "यह कोई खेल नहीं है। घर में बनी पटाखा बंदूकें सीधे आँखों की रोशनी को नुकसान पहुँचा सकती हैं।" कई बच्चों को आईसीयू में भी भर्ती कराना पड़ा है। डॉक्टरों का कहना है कि इस चोट से आँखों की रोशनी भी जा सकती है।

सोशल मीडिया: इंस्टाग्राम, रील्स और यूट्यूब पर सबसे बड़े खतरे वाले
चैलेंज वीडियो को इस ट्रेंड के लिए ज़िम्मेदार ठहराया जा रहा है। "पटाखा गन चैलेंज" जैसे वायरल वीडियो देखने के बाद, बच्चे घर पर ही गैराज जैसी प्रयोगशालाएँ बना रहे हैं, जिससे खुद को और दूसरों को भी खतरा हो रहा है।

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