Delhi Gymkhana Club Dispute: जिमखाना क्लब पर 5 जून को नहीं होगा सरकारी कब्जा, दिल्ली हाई कोर्ट में केंद्र सरकार ने दिया बड़ा आश्वासन, जानिए क्या है पूरा मामला
India News Live, Digital Desk : राजधानी दिल्ली के लुटियंस जोन में स्थित ऐतिहासिक और 113 साल पुराने दिल्ली जिमखाना क्लब (Delhi Gymkhana Club) को लेकर चल रहा विवाद अब एक बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है। क्लब परिसर को खाली कराने के सरकार के सख्त रुख के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में मंगलवार को एक हाई-वोल्टेज सुनवाई हुई। इस सुनवाई के दौरान कोर्ट में मौजूद क्लब के सैकड़ों सदस्यों और वहां काम करने वाले कर्मचारियों को उस समय बहुत बड़ी राहत मिली, जब केंद्र सरकार ने अदालत को स्पष्ट आश्वासन दिया कि आगामी 5 जून को क्लब परिसर पर कोई भी जबरन कब्जा या बेदखली की कार्रवाई नहीं की जाएगी। इस भरोसे के बाद पिछले कई दिनों से क्लब के भविष्य को लेकर बनी अनिश्चितता और डर का माहौल फिलहाल शांत हो गया है।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट में साफ किया सरकार का रुख, कहा- कानून के तहत ही होगी कार्रवाई
दिल्ली हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति अवनीश झिंगन के समक्ष हुई इस महत्वपूर्ण सुनवाई के दौरान सरकार का पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट किया। उन्होंने अदालत को आश्वस्त किया कि लुटियंस दिल्ली के इस प्रतिष्ठित क्लब के खिलाफ कोई भी दंडात्मक या बेदखली की कार्रवाई अचानक नहीं की जाएगी। सरकार जो भी कदम उठाएगी, वह पूरी तरह से देश के कानून और तय कानूनी प्रक्रिया (Due Process of Law) के दायरे में ही होगा। उन्होंने साफ किया कि परिसर में मौजूद लोगों को उचित और वैधानिक नोटिस देने के बाद ही आगे की कोई भी वैधानिक कार्यवाही अमल में लाई जाएगी। सरकार के इस आधिकारिक बयान के बाद कोर्ट ने राहत की सांस ली।
22 मई के सरकारी आदेश से सदमे में थे सदस्य, 13 दिन के अल्टीमेटम से पैदा हो गई थी भारी चिंता
दरअसल, यह पूरा विवाद तब और गहरा गया था जब केंद्र सरकार ने बीते 22 मई को एक कड़ा आदेश जारी करते हुए दिल्ली जिमखाना क्लब को महज कुछ ही दिनों के भीतर पूरा परिसर खाली करने का फरमान सुना दिया था। इस अचानक आए नोटिस से क्लब के सदस्यों और वहां के स्टाफ में हड़कंप मच गया था। क्लब के सदस्य शिवम भाटिया ने अदालती कार्यवाही के बाद राहत जताते हुए कहा कि सॉलिसिटर जनरल के बयान से अब यह साफ हो गया है कि कोई अचानक या जबरन बेदखली नहीं होने जा रही है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि यह 113 साल पुरानी एक बेहद सम्मानित संस्था है, जिससे 90 साल से अधिक उम्र के बुजुर्ग सदस्य, कई रिटायर्ड पूर्व सैनिक और लगभग 600 कर्मचारी जुड़े हैं, जिनकी पूरी आजीविका इसी क्लब पर निर्भर है। ऐसे में सिर्फ 13 दिनों का नोटिस देना बेहद हैरान करने वाला था।
रिटायर्ड सैनिकों और कर्मचारियों को मिली बड़ी मोहलत, कानूनी लड़ाई को मजबूत करने का मिला समय
अदालत के इस रुख के बाद क्लब के एक अन्य वरिष्ठ सदस्य और सेवानिवृत्त मेजर अतुल देव ने बताया कि इस फैसले ने सभी को अपनी बात रखने का एक निष्पक्ष मौका दिया है। अब सदस्यों के पास सरकार के दावों के खिलाफ अपना कानूनी पक्ष और दस्तावेज ठीक से कोर्ट के सामने तैयार करने के लिए पर्याप्त समय मिल गया है। वहीं, सदस्य विक्रम भल्ला और सुरेश गोयल ने भी इस अस्थायी राहत का स्वागत किया, हालांकि उनका मानना है कि क्लब के पट्टे (Lease) और जमीन को लेकर मुख्य कानूनी लड़ाई अभी लंबी चलेगी। इस आश्वासन से कम से कम यह सुनिश्चित हो गया है कि सैकड़ों लोगों को रातों-रात सड़क पर नहीं आना पड़ेगा।
आखिर क्यों 27.3 एकड़ की इस बेशकीमती जमीन को वापस लेना चाहती है केंद्र सरकार? जानिए इनसाइड स्टोरी
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को उस मुख्य वजह के बारे में भी बताया जिसके तहत यह नोटिस जारी किया गया था। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का यह नोटिस दिल्ली जिमखाना क्लब को दी गई 27.3 एकड़ की इस बेहद प्राइम और आलीशान जमीन के स्थायी पट्टे (Permanent Lease) को समाप्त करने और भूमि पर सरकार का दोबारा नियंत्रण स्थापित करने के उद्देश्य से जारी किया गया था। सरकार का तर्क है कि देश के रक्षा बुनियादी ढांचे (Defense Infrastructure) को मजबूत और सुरक्षित करने के साथ-साथ अन्य महत्वपूर्ण सार्वजनिक सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा के उद्देश्यों के लिए इस जमीन की तत्काल आवश्यकता है। फिलहाल, हाई कोर्ट ने बेदखली नोटिस को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर केंद्र सरकार और क्लब प्रबंधन दोनों को समन जारी कर उनका लिखित जवाब मांगा है।